पारा 29 تبارك الذي

सूरह Al-Mulk 67:1 से सूरह Al-Mursalat 77:50 तक

अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari

सूरह Al-Mulk

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

تَبَٰرَكَ ٱلَّذِي بِيَدِهِ ٱلۡمُلۡكُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ ١

बहुत बरकत वाला है वह (अल्लाह) जिसके हाथ में सारा राज्य है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान् है।

ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلۡمَوۡتَ وَٱلۡحَيَوٰةَ لِيَبۡلُوَكُمۡ أَيُّكُمۡ أَحۡسَنُ عَمَلٗاۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡغَفُورُ ٢

जिसने मृत्यु तथा जीवन को पैदा किया, ताकि तुम्हारा परीक्षण करे कि तुम में किसका कर्म अधिक अच्छा है? तथा वही प्रभुत्वशाली, अति क्षमावान् है।1

ٱلَّذِي خَلَقَ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖ طِبَاقٗاۖ مَّا تَرَىٰ فِي خَلۡقِ ٱلرَّحۡمَٰنِ مِن تَفَٰوُتٖۖ فَٱرۡجِعِ ٱلۡبَصَرَ هَلۡ تَرَىٰ مِن فُطُورٖ ٣

जिसने ऊपर-तले सात आकाश बनाए। तुम अत्यंत दयावान् की रचना में कोई असंगति नहीं देखोगे। फिर पुनः देखो, क्या तुम्हें कोई दरार दिखाई देता है?

ثُمَّ ٱرۡجِعِ ٱلۡبَصَرَ كَرَّتَيۡنِ يَنقَلِبۡ إِلَيۡكَ ٱلۡبَصَرُ خَاسِئٗا وَهُوَ حَسِيرٞ ٤

फिर बार-बार निगाह दौड़ाओ। निगाह असफल होकर तुम्हारी ओर पलट आएगी और वह थकी हुई होगी।

وَلَقَدۡ زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِمَصَٰبِيحَ وَجَعَلۡنَٰهَا رُجُومٗا لِّلشَّيَٰطِينِۖ وَأَعۡتَدۡنَا لَهُمۡ عَذَابَ ٱلسَّعِيرِ ٥

और निःसंदेह हमने (धरती से) निकटतम आकाश को दीपों से सजाया है तथा हमने उन्हें शैतानों2 को मार भगाने का साधन बनाया है और हमने उनके लिए भड़कती हुई आग की यातना तैयार कर रखी है।

وَلِلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡ عَذَابُ جَهَنَّمَۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ ٦

और उन लोगों के लिए जिन्होंने अपने पालनहार का इनकार किया, जहन्नम की यातना है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।

إِذَآ أُلۡقُواْ فِيهَا سَمِعُواْ لَهَا شَهِيقٗا وَهِيَ تَفُورُ ٧

जब वे उसमें फेंके जाएँगे, तो उसकी दहाड़ सुनेंगे और वह उबल रहा होगा।

تَكَادُ تَمَيَّزُ مِنَ ٱلۡغَيۡظِۖ كُلَّمَآ أُلۡقِيَ فِيهَا فَوۡجٞ سَأَلَهُمۡ خَزَنَتُهَآ أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ نَذِيرٞ ٨

क़रीब होगा कि वह क्रोध से फट जाए। जब भी कोई समूह उसमें फेंका जाएगा, तो उसके प्रहरी उनसे पूछेंगे : क्या तुम्हारे पास कोई सावधान करने वाला नहीं आया?

قَالُواْ بَلَىٰ قَدۡ جَآءَنَا نَذِيرٞ فَكَذَّبۡنَا وَقُلۡنَا مَا نَزَّلَ ٱللَّهُ مِن شَيۡءٍ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ كَبِيرٖ ٩

वे कहेंगे : क्यों नहीं, निश्चय हमारे पास सावधान करने वाला आया था। पर, हमने झुठला दिया और हमने कहा कि अल्लाह ने कुछ नहीं उतारा है। तुम तो बहुत बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो।

وَقَالُواْ لَوۡ كُنَّا نَسۡمَعُ أَوۡ نَعۡقِلُ مَا كُنَّا فِيٓ أَصۡحَٰبِ ٱلسَّعِيرِ ١٠

तथा वे कहेंगे : यदि हम सुनते होते या समझते होते, तो भड़कती हुई आग वालों में न होते।

فَٱعۡتَرَفُواْ بِذَنۢبِهِمۡ فَسُحۡقٗا لِّأَصۡحَٰبِ ٱلسَّعِيرِ ١١

इस तरह, वे अपने पाप को स्वीकार करेंगे। तो दूरी3 है भड़कती हुई आग वालों के लिए।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُم بِٱلۡغَيۡبِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٞ كَبِيرٞ ١٢

निःसंदेह जो लोग अपने रब से बिन देखे डरते हैं, उनके लिए क्षमा तथा बड़ा प्रतिफल है।4

وَأَسِرُّواْ قَوۡلَكُمۡ أَوِ ٱجۡهَرُواْ بِهِۦٓۖ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ١٣

और तुम अपनी बात छिपाओ या उसे ज़ोर से कहो, निश्चय वह सीनों के भेदों को भी जानता है।

أَلَا يَعۡلَمُ مَنۡ خَلَقَ وَهُوَ ٱللَّطِيفُ ٱلۡخَبِيرُ ١٤

क्या वह नहीं जानेगा जिसने पैदा किया?! जबकि वह सूक्ष्मदर्शी5, पूर्ण ख़बर रखने वाला है।

هُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ ذَلُولٗا فَٱمۡشُواْ فِي مَنَاكِبِهَا وَكُلُواْ مِن رِّزۡقِهِۦۖ وَإِلَيۡهِ ٱلنُّشُورُ ١٥

वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को वशीभूत कर दिया, अतः उसके रास्तों में चलो-फिरो तथा उसकी प्रदान की हुई रोज़ी में से खाओ। और उसी की ओर तुम्हें फिर जीवित हो कर जाना है।

ءَأَمِنتُم مَّن فِي ٱلسَّمَآءِ أَن يَخۡسِفَ بِكُمُ ٱلۡأَرۡضَ فَإِذَا هِيَ تَمُورُ ١٦

क्या तुम उससे निर्भय हो गए हो, जो आकाश में है कि वह तुम्हें धरती में धँसा दे, फिर वह अचानक काँपने लगे?

أَمۡ أَمِنتُم مَّن فِي ٱلسَّمَآءِ أَن يُرۡسِلَ عَلَيۡكُمۡ حَاصِبٗاۖ فَسَتَعۡلَمُونَ كَيۡفَ نَذِيرِ ١٧

अथवा तुम उससे निर्भय हो गए हो, जो आकाश में है कि वह तुम पर पत्थर बरसा दे, फिर तुम जान लोगे कि मेरा डराना कैसा है?

وَلَقَدۡ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَكَيۡفَ كَانَ نَكِيرِ ١٨

तथा निश्चय इनसे पहले के लोग6 भी झुठला चुके हैं, फिर किस तरह था मेरा इनकार?

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ إِلَى ٱلطَّيۡرِ فَوۡقَهُمۡ صَٰٓفَّٰتٖ وَيَقۡبِضۡنَۚ مَا يُمۡسِكُهُنَّ إِلَّا ٱلرَّحۡمَٰنُۚ إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَيۡءِۭ بَصِيرٌ ١٩

क्या उन्होंने अपने ऊपर पंख फैलाते तथा समेटते हुए पक्षियों को नहीं देखे? अत्यंत दयावान् के सिवा कोई उन्हें थाम नहीं रहा होता। निःसंदेह वह प्रत्येक चीज़ को खूब देखने वाला है।

أَمَّنۡ هَٰذَا ٱلَّذِي هُوَ جُندٞ لَّكُمۡ يَنصُرُكُم مِّن دُونِ ٱلرَّحۡمَٰنِۚ إِنِ ٱلۡكَٰفِرُونَ إِلَّا فِي غُرُورٍ ٢٠

या वह कौन है जो तुम्हारी सेना बनकर अल्लाह के विरुद्ध तुम्हारी सहायता करे? इनकार करने वाले तो मात्र धोखे में पड़े हैं।

أَمَّنۡ هَٰذَا ٱلَّذِي يَرۡزُقُكُمۡ إِنۡ أَمۡسَكَ رِزۡقَهُۥۚ بَل لَّجُّواْ فِي عُتُوّٖ وَنُفُورٍ ٢١

या वह कौन है जो तुम्हें रोज़ी दे, यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? बल्कि वे सरकशी तथा बिदकने पर अड़े हुए हैं।7

أَفَمَن يَمۡشِي مُكِبًّا عَلَىٰ وَجۡهِهِۦٓ أَهۡدَىٰٓ أَمَّن يَمۡشِي سَوِيًّا عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٢٢

तो क्या वह व्यक्ति जो अपने मुँह के बल उलटा होकर चलता है, अधिक मार्गदर्शन पर है या वह जो सीधा होकर सीधे मार्ग पर चलता है?8

قُلۡ هُوَ ٱلَّذِيٓ أَنشَأَكُمۡ وَجَعَلَ لَكُمُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَٰرَ وَٱلۡأَفۡـِٔدَةَۚ قَلِيلٗا مَّا تَشۡكُرُونَ ٢٣

आप कह दें : वही है जिसने तुम्हें पैदा किया तथा तुम्हारे लिए कान तथा आँखें और दिल बनाए। तुम बहुत कम आभार प्रकट करते हो।

قُلۡ هُوَ ٱلَّذِي ذَرَأَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ ٢٤

आप कह दें : वही है जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और तुम उसी की ओर एकत्र9 किए जाओगे।

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٢٥

तथा वे कहते हैं : (क़ियामत का) यह वचन कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?

قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡعِلۡمُ عِندَ ٱللَّهِ وَإِنَّمَآ أَنَا۠ نَذِيرٞ مُّبِينٞ ٢٦

आप कह दें : इसका ज्ञान तो केवल अल्लाह के पास है। और मैं तो मात्र एक स्पष्ट डराने वाला हूँ।

فَلَمَّا رَأَوۡهُ زُلۡفَةٗ سِيٓـَٔتۡ وُجُوهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَقِيلَ هَٰذَا ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تَدَّعُونَ ٢٧

फिर जब वे उसे निकट देखेंगे, तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार किया और कहा जाएगा : यही है वह जो तुम माँगा करते थे।

قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِنۡ أَهۡلَكَنِيَ ٱللَّهُ وَمَن مَّعِيَ أَوۡ رَحِمَنَا فَمَن يُجِيرُ ٱلۡكَٰفِرِينَ مِنۡ عَذَابٍ أَلِيمٖ ٢٨

आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि अल्लाह मुझे और उनको, जो मेरे साथ हैं, विनष्ट कर दे या हम पर दया करे, तो काफ़िरों को दर्दनाक यातना10 से कौन शरण देगा?

قُلۡ هُوَ ٱلرَّحۡمَٰنُ ءَامَنَّا بِهِۦ وَعَلَيۡهِ تَوَكَّلۡنَاۖ فَسَتَعۡلَمُونَ مَنۡ هُوَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ ٢٩

आप कह दें : वही अत्यंत दयावान् है। हम उसपर ईमान लाए तथा हमने उसी पर भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे कि वह कौन है जो खुली गुमराही में है।

قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِنۡ أَصۡبَحَ مَآؤُكُمۡ غَوۡرٗا فَمَن يَأۡتِيكُم بِمَآءٖ مَّعِينِۭ ٣٠

आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि तुम्हारा पानी गहराई में चला जाए, तो कौन है जो तुम्हारे पास बहता हुआ पानी लाएगा?

सूरह Al-Qalam

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

نٓۚ وَٱلۡقَلَمِ وَمَا يَسۡطُرُونَ ١

नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी1 जो वे लिखते हैं।

مَآ أَنتَ بِنِعۡمَةِ رَبِّكَ بِمَجۡنُونٖ ٢

आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।

وَإِنَّ لَكَ لَأَجۡرًا غَيۡرَ مَمۡنُونٖ ٣

तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।

وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٖ ٤

तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।

فَسَتُبۡصِرُ وَيُبۡصِرُونَ ٥

अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।

بِأَييِّكُمُ ٱلۡمَفۡتُونُ ٦

कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।

إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُهۡتَدِينَ ٧

निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।

فَلَا تُطِعِ ٱلۡمُكَذِّبِينَ ٨

अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।

وَدُّواْ لَوۡ تُدۡهِنُ فَيُدۡهِنُونَ ٩

वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी2 करें।

وَلَا تُطِعۡ كُلَّ حَلَّافٖ مَّهِينٍ ١٠

और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।3

هَمَّازٖ مَّشَّآءِۭ بِنَمِيمٖ ١١

जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।

مَّنَّاعٖ لِّلۡخَيۡرِ مُعۡتَدٍ أَثِيمٍ ١٢

भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।

عُتُلِّۭ بَعۡدَ ذَٰلِكَ زَنِيمٍ ١٣

क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।

أَن كَانَ ذَا مَالٖ وَبَنِينَ ١٤

इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।

إِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِ ءَايَٰتُنَا قَالَ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ ١٥

जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।

سَنَسِمُهُۥ عَلَى ٱلۡخُرۡطُومِ ١٦

शीघ्र ही हम उसकी थूथन4 पर दाग़ लगाएँगे।

إِنَّا بَلَوۡنَٰهُمۡ كَمَا بَلَوۡنَآ أَصۡحَٰبَ ٱلۡجَنَّةِ إِذۡ أَقۡسَمُواْ لَيَصۡرِمُنَّهَا مُصۡبِحِينَ ١٧

निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला5 है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।

وَلَا يَسۡتَثۡنُونَ ١٨

और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।

فَطَافَ عَلَيۡهَا طَآئِفٞ مِّن رَّبِّكَ وَهُمۡ نَآئِمُونَ ١٩

तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।

فَأَصۡبَحَتۡ كَٱلصَّرِيمِ ٢٠

तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।

فَتَنَادَوۡاْ مُصۡبِحِينَ ٢١

फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :

أَنِ ٱغۡدُواْ عَلَىٰ حَرۡثِكُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰرِمِينَ ٢٢

कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।

فَٱنطَلَقُواْ وَهُمۡ يَتَخَٰفَتُونَ ٢٣

चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।

أَن لَّا يَدۡخُلَنَّهَا ٱلۡيَوۡمَ عَلَيۡكُم مِّسۡكِينٞ ٢٤

कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन6 हरगिज़ न आने पाए।

وَغَدَوۡاْ عَلَىٰ حَرۡدٖ قَٰدِرِينَ ٢٥

और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।

فَلَمَّا رَأَوۡهَا قَالُوٓاْ إِنَّا لَضَآلُّونَ ٢٦

फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।

بَلۡ نَحۡنُ مَحۡرُومُونَ ٢٧

बल्कि हम वंचित7 कर दिए गए हैं।

قَالَ أَوۡسَطُهُمۡ أَلَمۡ أَقُل لَّكُمۡ لَوۡلَا تُسَبِّحُونَ ٢٨

उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?

قَالُواْ سُبۡحَٰنَ رَبِّنَآ إِنَّا كُنَّا ظَٰلِمِينَ ٢٩

उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।

فَأَقۡبَلَ بَعۡضُهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖ يَتَلَٰوَمُونَ ٣٠

फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।

قَالُواْ يَٰوَيۡلَنَآ إِنَّا كُنَّا طَٰغِينَ ٣١

उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।

عَسَىٰ رَبُّنَآ أَن يُبۡدِلَنَا خَيۡرٗا مِّنۡهَآ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا رَٰغِبُونَ ٣٢

आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।

كَذَٰلِكَ ٱلۡعَذَابُۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ ٣٣

इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!

إِنَّ لِلۡمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمۡ جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ ٣٤

निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।

أَفَنَجۡعَلُ ٱلۡمُسۡلِمِينَ كَٱلۡمُجۡرِمِينَ ٣٥

तो क्या हम आज्ञाकारियों8 को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?

مَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ ٣٦

तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?

أَمۡ لَكُمۡ كِتَٰبٞ فِيهِ تَدۡرُسُونَ ٣٧

क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?

إِنَّ لَكُمۡ فِيهِ لَمَا تَخَيَّرُونَ ٣٨

(कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?

أَمۡ لَكُمۡ أَيۡمَٰنٌ عَلَيۡنَا بَٰلِغَةٌ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ إِنَّ لَكُمۡ لَمَا تَحۡكُمُونَ ٣٩

या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?

سَلۡهُمۡ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ ٤٠

आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?

أَمۡ لَهُمۡ شُرَكَآءُ فَلۡيَأۡتُواْ بِشُرَكَآئِهِمۡ إِن كَانُواْ صَٰدِقِينَ ٤١

क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ9, यदि वे सच्चे हैं।

يَوۡمَ يُكۡشَفُ عَن سَاقٖ وَيُدۡعَوۡنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ ٤٢

जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।10

خَٰشِعَةً أَبۡصَٰرُهُمۡ تَرۡهَقُهُمۡ ذِلَّةٞۖ وَقَدۡ كَانُواْ يُدۡعَوۡنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ وَهُمۡ سَٰلِمُونَ ٤٣

उनकी आँखें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। हालाँकि उन्हें (संसार में) सजदे की ओर बुलाया जाता था, जबकि वे भले-चंगे थे।

فَذَرۡنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا ٱلۡحَدِيثِۖ سَنَسۡتَدۡرِجُهُم مِّنۡ حَيۡثُ لَا يَعۡلَمُونَ ٤٤

अतः आप मुझे तथा उसको छोड़ दें, जो इस वाणी (क़ुरआन) को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे (यातना की ओर) इस प्रकार ले जाएँगे11 कि वे जान भी न सकेंगे।

وَأُمۡلِي لَهُمۡۚ إِنَّ كَيۡدِي مَتِينٌ ٤٥

और मैं उन्हें मोहलत (अवकाश) दूँगा।12 निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है।

أَمۡ تَسۡـَٔلُهُمۡ أَجۡرٗا فَهُم مِّن مَّغۡرَمٖ مُّثۡقَلُونَ ٤٦

क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक13 माँगते हैं कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं?

أَمۡ عِندَهُمُ ٱلۡغَيۡبُ فَهُمۡ يَكۡتُبُونَ ٤٧

अथवा उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है, तो वे लिख14 रहे हैं?

فَٱصۡبِرۡ لِحُكۡمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ ٱلۡحُوتِ إِذۡ نَادَىٰ وَهُوَ مَكۡظُومٞ ٤٨

अतः अपने पालनहार के निर्णय तक धैर्य रखें और मछली वाले के समान15 न हो जाएँ, जब उसने (अल्लाह को) पुकारा, इस हाल में कि वह शोक से भरा हुआ था।

لَّوۡلَآ أَن تَدَٰرَكَهُۥ نِعۡمَةٞ مِّن رَّبِّهِۦ لَنُبِذَ بِٱلۡعَرَآءِ وَهُوَ مَذۡمُومٞ ٤٩

और यदि उसके पालनहार की अनुकंपा ने उसे संभाल न लिया होता, तो निश्चय वह चटियल मैदान में इस दशा में फेंक दिया जाता कि वह निंदित होता।

فَٱجۡتَبَٰهُ رَبُّهُۥ فَجَعَلَهُۥ مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ ٥٠

फिर उसके पालनहार ने उसे चुन लिया और उसे सदाचारियों में से बना दिया।

وَإِن يَكَادُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَيُزۡلِقُونَكَ بِأَبۡصَٰرِهِمۡ لَمَّا سَمِعُواْ ٱلذِّكۡرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُۥ لَمَجۡنُونٞ ٥١

और वे लोग जिन्होंने इनकार किया, निश्चय क़रीब हैं कि वे अपनी निगाहों से (घूर घूरकर) आपको अवश्य ही फिसला देंगे, जब वे क़ुरआन को सुनते हैं और कहते हैं कि यह अवश्य ही दीवाना है।

وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكۡرٞ لِّلۡعَٰلَمِينَ ٥٢

हालाँकि वह सर्व संसार के लिए मात्र एक उपदेश16 है।

सूरह Al-Haqqah

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ٱلۡحَآقَّةُ ١

होकर रहने वाली।

مَا ٱلۡحَآقَّةُ ٢

क्या है वह होकर रहने वाली?

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡحَآقَّةُ ٣

और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?

كَذَّبَتۡ ثَمُودُ وَعَادُۢ بِٱلۡقَارِعَةِ ٤

समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।

فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهۡلِكُواْ بِٱلطَّاغِيَةِ ٥

फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।

وَأَمَّا عَادٞ فَأُهۡلِكُواْ بِرِيحٖ صَرۡصَرٍ عَاتِيَةٖ ٦

और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।

سَخَّرَهَا عَلَيۡهِمۡ سَبۡعَ لَيَالٖ وَثَمَٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومٗاۖ فَتَرَى ٱلۡقَوۡمَ فِيهَا صَرۡعَىٰ كَأَنَّهُمۡ أَعۡجَازُ نَخۡلٍ خَاوِيَةٖ ٧

अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।1

فَهَلۡ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٖ ٨

तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?

وَجَآءَ فِرۡعَوۡنُ وَمَن قَبۡلَهُۥ وَٱلۡمُؤۡتَفِكَٰتُ بِٱلۡخَاطِئَةِ ٩

और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।

فَعَصَوۡاْ رَسُولَ رَبِّهِمۡ فَأَخَذَهُمۡ أَخۡذَةٗ رَّابِيَةً ١٠

उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।

إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلۡمَآءُ حَمَلۡنَٰكُمۡ فِي ٱلۡجَارِيَةِ ١١

निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव2 में सवार किया।

لِنَجۡعَلَهَا لَكُمۡ تَذۡكِرَةٗ وَتَعِيَهَآ أُذُنٞ وَٰعِيَةٞ ١٢

ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।

فَإِذَا نُفِخَ فِي ٱلصُّورِ نَفۡخَةٞ وَٰحِدَةٞ ١٣

फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।

وَحُمِلَتِ ٱلۡأَرۡضُ وَٱلۡجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةٗ وَٰحِدَةٗ ١٤

और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।3

فَيَوۡمَئِذٖ وَقَعَتِ ٱلۡوَاقِعَةُ ١٥

तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।

وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِيَ يَوۡمَئِذٖ وَاهِيَةٞ ١٦

तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।

وَٱلۡمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرۡجَآئِهَاۚ وَيَحۡمِلُ عَرۡشَ رَبِّكَ فَوۡقَهُمۡ يَوۡمَئِذٖ ثَمَٰنِيَةٞ ١٧

और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।

يَوۡمَئِذٖ تُعۡرَضُونَ لَا تَخۡفَىٰ مِنكُمۡ خَافِيَةٞ ١٨

उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।

فَأَمَّا مَنۡ أُوتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقۡرَءُواْ كِتَٰبِيَهۡ ١٩

फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।

إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَٰقٍ حِسَابِيَهۡ ٢٠

मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।

فَهُوَ فِي عِيشَةٖ رَّاضِيَةٖ ٢١

चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।

فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٖ ٢٢

एक ऊँची जन्नत में।

قُطُوفُهَا دَانِيَةٞ ٢٣

जिसके फल निकट होंगे।

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ هَنِيٓـَٔۢا بِمَآ أَسۡلَفۡتُمۡ فِي ٱلۡأَيَّامِ ٱلۡخَالِيَةِ ٢٤

(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।

وَأَمَّا مَنۡ أُوتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي لَمۡ أُوتَ كِتَٰبِيَهۡ ٢٥

और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।

وَلَمۡ أَدۡرِ مَا حِسَابِيَهۡ ٢٦

तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!

يَٰلَيۡتَهَا كَانَتِ ٱلۡقَاضِيَةَ ٢٧

ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली4 होती।

مَآ أَغۡنَىٰ عَنِّي مَالِيَهۡۜ ٢٨

मेरा धन मेरे किसी काम न आया।

هَلَكَ عَنِّي سُلۡطَٰنِيَهۡ ٢٩

मेरी सत्ता5 मुझसे जाती रही।

خُذُوهُ فَغُلُّوهُ ٣٠

(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।

ثُمَّ ٱلۡجَحِيمَ صَلُّوهُ ٣١

फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।

ثُمَّ فِي سِلۡسِلَةٖ ذَرۡعُهَا سَبۡعُونَ ذِرَاعٗا فَٱسۡلُكُوهُ ٣٢

फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।

إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ ٱلۡعَظِيمِ ٣٣

निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلۡمِسۡكِينِ ٣٤

तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।

فَلَيۡسَ لَهُ ٱلۡيَوۡمَ هَٰهُنَا حَمِيمٞ ٣٥

अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।

وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنۡ غِسۡلِينٖ ٣٦

और न पीप के सिवा कोई भोजन है।

لَّا يَأۡكُلُهُۥٓ إِلَّا ٱلۡخَٰطِـُٔونَ ٣٧

जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।

فَلَآ أُقۡسِمُ بِمَا تُبۡصِرُونَ ٣٨

मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।

وَمَا لَا تُبۡصِرُونَ ٣٩

तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।

إِنَّهُۥ لَقَوۡلُ رَسُولٖ كَرِيمٖ ٤٠

निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल6 का कथन है।

وَمَا هُوَ بِقَوۡلِ شَاعِرٖۚ قَلِيلٗا مَّا تُؤۡمِنُونَ ٤١

और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।

وَلَا بِقَوۡلِ كَاهِنٖۚ قَلِيلٗا مَّا تَذَكَّرُونَ ٤٢

और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।

تَنزِيلٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٤٣

(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।

وَلَوۡ تَقَوَّلَ عَلَيۡنَا بَعۡضَ ٱلۡأَقَاوِيلِ ٤٤

और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर7 लगाता।

لَأَخَذۡنَا مِنۡهُ بِٱلۡيَمِينِ ٤٥

तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।

ثُمَّ لَقَطَعۡنَا مِنۡهُ ٱلۡوَتِينَ ٤٦

फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।

فَمَا مِنكُم مِّنۡ أَحَدٍ عَنۡهُ حَٰجِزِينَ ٤٧

फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।

وَإِنَّهُۥ لَتَذۡكِرَةٞ لِّلۡمُتَّقِينَ ٤٨

निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।

وَإِنَّا لَنَعۡلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ ٤٩

तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।

وَإِنَّهُۥ لَحَسۡرَةٌ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ ٥٠

और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों8 के लिए पछतावे का कारण है।

وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلۡيَقِينِ ٥١

और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।

فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِيمِ ٥٢

अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।

सूरह Al-Ma'arij

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

سَأَلَ سَآئِلُۢ بِعَذَابٖ وَاقِعٖ ١

एक माँगने वाले1 ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।

لِّلۡكَٰفِرِينَ لَيۡسَ لَهُۥ دَافِعٞ ٢

काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।

مِّنَ ٱللَّهِ ذِي ٱلۡمَعَارِجِ ٣

ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।

تَعۡرُجُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ إِلَيۡهِ فِي يَوۡمٖ كَانَ مِقۡدَارُهُۥ خَمۡسِينَ أَلۡفَ سَنَةٖ ٤

फ़रिश्ते और रूह2 उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।

فَٱصۡبِرۡ صَبۡرٗا جَمِيلًا ٥

अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।

إِنَّهُمۡ يَرَوۡنَهُۥ بَعِيدٗا ٦

निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।

وَنَرَىٰهُ قَرِيبٗا ٧

और हम उसे निकट देख रहे हैं।

يَوۡمَ تَكُونُ ٱلسَّمَآءُ كَٱلۡمُهۡلِ ٨

जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।

وَتَكُونُ ٱلۡجِبَالُ كَٱلۡعِهۡنِ ٩

और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।3

وَلَا يَسۡـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمٗا ١٠

और कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।

يُبَصَّرُونَهُمۡۚ يَوَدُّ ٱلۡمُجۡرِمُ لَوۡ يَفۡتَدِي مِنۡ عَذَابِ يَوۡمِئِذِۭ بِبَنِيهِ ١١

हालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।

وَصَٰحِبَتِهِۦ وَأَخِيهِ ١٢

तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।

وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِي تُـٔۡوِيهِ ١٣

तथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।

وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا ثُمَّ يُنجِيهِ ١٤

और उन सभी लोगों4 को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।

كَلَّآۖ إِنَّهَا لَظَىٰ ١٥

कदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।

نَزَّاعَةٗ لِّلشَّوَىٰ ١٦

जो खाल उधेड़ देने वाली है।

تَدۡعُواْ مَنۡ أَدۡبَرَ وَتَوَلَّىٰ ١٧

वह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी5 और मुँह मोड़ा।

وَجَمَعَ فَأَوۡعَىٰٓ ١٨

तथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।

۞ إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ خُلِقَ هَلُوعًا ١٩

निःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।

إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعٗا ٢٠

जब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।

وَإِذَا مَسَّهُ ٱلۡخَيۡرُ مَنُوعًا ٢١

और जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।

إِلَّا ٱلۡمُصَلِّينَ ٢٢

सिवाय नमाज़ियों के।

ٱلَّذِينَ هُمۡ عَلَىٰ صَلَاتِهِمۡ دَآئِمُونَ ٢٣

जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।

وَٱلَّذِينَ فِيٓ أَمۡوَٰلِهِمۡ حَقّٞ مَّعۡلُومٞ ٢٤

और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।

لِّلسَّآئِلِ وَٱلۡمَحۡرُومِ ٢٥

माँगने वाले तथा वंचित6 के लिए।

وَٱلَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوۡمِ ٱلدِّينِ ٢٦

और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।

وَٱلَّذِينَ هُم مِّنۡ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشۡفِقُونَ ٢٧

और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।

إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمۡ غَيۡرُ مَأۡمُونٖ ٢٨

निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।

وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِفُرُوجِهِمۡ حَٰفِظُونَ ٢٩

और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।

إِلَّا عَلَىٰٓ أَزۡوَٰجِهِمۡ أَوۡ مَا مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُهُمۡ فَإِنَّهُمۡ غَيۡرُ مَلُومِينَ ٣٠

सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों7 से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।

فَمَنِ ٱبۡتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡعَادُونَ ٣١

फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।

وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِأَمَٰنَٰتِهِمۡ وَعَهۡدِهِمۡ رَٰعُونَ ٣٢

और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।

وَٱلَّذِينَ هُم بِشَهَٰدَٰتِهِمۡ قَآئِمُونَ ٣٣

और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।

وَٱلَّذِينَ هُمۡ عَلَىٰ صَلَاتِهِمۡ يُحَافِظُونَ ٣٤

तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ فِي جَنَّٰتٖ مُّكۡرَمُونَ ٣٥

वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।

فَمَالِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ قِبَلَكَ مُهۡطِعِينَ ٣٦

फिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?

عَنِ ٱلۡيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ عِزِينَ ٣٧

दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।8

أَيَطۡمَعُ كُلُّ ٱمۡرِيٕٖ مِّنۡهُمۡ أَن يُدۡخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٖ ٣٨

क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?

كَلَّآۖ إِنَّا خَلَقۡنَٰهُم مِّمَّا يَعۡلَمُونَ ٣٩

कदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़9 से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।

فَلَآ أُقۡسِمُ بِرَبِّ ٱلۡمَشَٰرِقِ وَٱلۡمَغَٰرِبِ إِنَّا لَقَٰدِرُونَ ٤٠

तो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।

عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ خَيۡرٗا مِّنۡهُمۡ وَمَا نَحۡنُ بِمَسۡبُوقِينَ ٤١

कि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।

فَذَرۡهُمۡ يَخُوضُواْ وَيَلۡعَبُواْ حَتَّىٰ يُلَٰقُواْ يَوۡمَهُمُ ٱلَّذِي يُوعَدُونَ ٤٢

अतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।

يَوۡمَ يَخۡرُجُونَ مِنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ سِرَاعٗا كَأَنَّهُمۡ إِلَىٰ نُصُبٖ يُوفِضُونَ ٤٣

जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर10 दौड़े जा रहे हैं।

خَٰشِعَةً أَبۡصَٰرُهُمۡ تَرۡهَقُهُمۡ ذِلَّةٞۚ ذَٰلِكَ ٱلۡيَوۡمُ ٱلَّذِي كَانُواْ يُوعَدُونَ ٤٤

उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया11 जाता था।

सूरह Nuh

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦٓ أَنۡ أَنذِرۡ قَوۡمَكَ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ ١

निःसंदेह हमने नूह़ को उनकी जाति की ओर भेजा कि अपनी जाति को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनके पास दर्दनाक यातना आ जाए।

قَالَ يَٰقَوۡمِ إِنِّي لَكُمۡ نَذِيرٞ مُّبِينٌ ٢

उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से डराने वाला हूँ।

أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ ٣

कि अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो और मेरी बात मानो।

يَغۡفِرۡ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَيُؤَخِّرۡكُمۡ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمًّىۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُۚ لَوۡ كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ٤

वह तुम्हारे लिए तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा तथा तुम्हें एक निर्धारित समय1 तक मोहलत देगा। निश्चय जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जाता है, तो वह टाला नहीं जाता, काश कि तुम जानते होते।

قَالَ رَبِّ إِنِّي دَعَوۡتُ قَوۡمِي لَيۡلٗا وَنَهَارٗا ٥

उसने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह मैंने अपनी जाति को रात-दिन बुलाया।

فَلَمۡ يَزِدۡهُمۡ دُعَآءِيٓ إِلَّا فِرَارٗا ٦

तो मेरे बुलाने से ये लोग और ज़्यादा भागने लगे।

وَإِنِّي كُلَّمَا دَعَوۡتُهُمۡ لِتَغۡفِرَ لَهُمۡ جَعَلُوٓاْ أَصَٰبِعَهُمۡ فِيٓ ءَاذَانِهِمۡ وَٱسۡتَغۡشَوۡاْ ثِيَابَهُمۡ وَأَصَرُّواْ وَٱسۡتَكۡبَرُواْ ٱسۡتِكۡبَارٗا ٧

और निःसंदेह मैंने जब भी उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं तथा अपने कपड़े ओढ़ लिए2 और हठ दिखाया और बड़ा घमंड किया।

ثُمَّ إِنِّي دَعَوۡتُهُمۡ جِهَارٗا ٨

फिर निःसंदेह मैंने उन्हें खुल्ल-मखुल्ला बुलाया।

ثُمَّ إِنِّيٓ أَعۡلَنتُ لَهُمۡ وَأَسۡرَرۡتُ لَهُمۡ إِسۡرَارٗا ٩

फिर निःसंदेह मैंने उन्हें उच्च स्वर में आमंत्रित किया और मैंने उन्हें चुपके-चुपके (भी) समझाया।

فَقُلۡتُ ٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمۡ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارٗا ١٠

तो मैंने कहा : अपने पालनहार से क्षमा माँगो। निःसंदेह वह बहुत क्षमा करने वाला है।

يُرۡسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيۡكُم مِّدۡرَارٗا ١١

वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा।

وَيُمۡدِدۡكُم بِأَمۡوَٰلٖ وَبَنِينَ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ جَنَّٰتٖ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ أَنۡهَٰرٗا ١٢

और वह तुम्हें धन और बच्चों में वृद्धि प्रदान करेगा तथा तुम्हारे लिए बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरें निकाल देगा।

مَّا لَكُمۡ لَا تَرۡجُونَ لِلَّهِ وَقَارٗا ١٣

तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महिमा से नहीं डरते?

وَقَدۡ خَلَقَكُمۡ أَطۡوَارًا ١٤

हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न चरणों3 में पैदा किया है।

أَلَمۡ تَرَوۡاْ كَيۡفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖ طِبَاقٗا ١٥

क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस तरह ऊपर-तले सात आकाश बनाए?

وَجَعَلَ ٱلۡقَمَرَ فِيهِنَّ نُورٗا وَجَعَلَ ٱلشَّمۡسَ سِرَاجٗا ١٦

और उसने उनमें चाँद को प्रकाश बनाया और सूर्य को दीपक बनाया।

وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ نَبَاتٗا ١٧

और अल्लाह ही ने तुम्हें धरती4 से (विशेष ढंग से) उगाया।

ثُمَّ يُعِيدُكُمۡ فِيهَا وَيُخۡرِجُكُمۡ إِخۡرَاجٗا ١٨

फिर वह तुम्हें उसी में वापस ले जाएगा और तुम्हें (उसी से) निकालेगा।

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ بِسَاطٗا ١٩

और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया।

لِّتَسۡلُكُواْ مِنۡهَا سُبُلٗا فِجَاجٗا ٢٠

ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।

قَالَ نُوحٞ رَّبِّ إِنَّهُمۡ عَصَوۡنِي وَٱتَّبَعُواْ مَن لَّمۡ يَزِدۡهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارٗا ٢١

नूह ने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह उन्होंने मेरी अवज्ञा की और उसका5 अनुसरण किया, जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।

وَمَكَرُواْ مَكۡرٗا كُبَّارٗا ٢٢

और उन्होंने बहुत बड़ी चाल चली।

وَقَالُواْ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمۡ وَلَا تَذَرُنَّ وَدّٗا وَلَا سُوَاعٗا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسۡرٗا ٢٣

और उन्होंने कहा : तुम अपने पूज्यों को कदापि न छोड़ना, और न कभी वद्द को छोड़ना, और न सुवाअ को और न यग़ूस और यऊक़ तथा नस्र6 को।

وَقَدۡ أَضَلُّواْ كَثِيرٗاۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَٰلٗا ٢٤

और निश्चय उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तथा तू अत्याचारियों की पथभ्रष्टता7 ही में वृद्धि कर।

مِّمَّا خَطِيٓـَٰٔتِهِمۡ أُغۡرِقُواْ فَأُدۡخِلُواْ نَارٗا فَلَمۡ يَجِدُواْ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارٗا ٢٥

वे अपने पापों के कारण डुबो8 दिए गए, फिर जहन्नम में डाल दिए गए, तो उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने लिए कोई मदद करने वाले नहीं पाए।

وَقَالَ نُوحٞ رَّبِّ لَا تَذَرۡ عَلَى ٱلۡأَرۡضِ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ دَيَّارًا ٢٦

तथा नूह़ ने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर (इन) काफ़िरों में से कोई रहने वाला न छोड़।

إِنَّكَ إِن تَذَرۡهُمۡ يُضِلُّواْ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓاْ إِلَّا فَاجِرٗا كَفَّارٗا ٢٧

निःसंदेह यदि तू उन्हें छोड़े रखेगा, तो वे तेरे बंदों को पथभ्रष्ट करेंगे और दुराचारी एवं सख़्त काफ़िर ही को जन्म देंगे।

رَّبِّ ٱغۡفِرۡ لِي وَلِوَٰلِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيۡتِيَ مُؤۡمِنٗا وَلِلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارَۢا ٢٨

ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा करे दे, तथा मेरे माता-पिता को, और (हर) उस व्यक्ति को जो मेरे घर में मोमिन बन कर प्रवेश करे, तथा ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को। और अत्याचारियों को विनाश के सिवाय किसी चीज़ में न बढ़ा।

सूरह Al-Jinn

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

قُلۡ أُوحِيَ إِلَيَّ أَنَّهُ ٱسۡتَمَعَ نَفَرٞ مِّنَ ٱلۡجِنِّ فَقَالُوٓاْ إِنَّا سَمِعۡنَا قُرۡءَانًا عَجَبٗا ١

(ऐ नबी!) कह दें : मेरी ओर वह़्य1 की गई है कि जिन्नों के एक समूह ने (मेरे क़ुरआन पढ़ने को) ध्यान से सुना। फिर उन्होंने कहा : निःसंदेह हमने एक अद्भुत क़ुरआन सुना है।

يَهۡدِيٓ إِلَى ٱلرُّشۡدِ فَـَٔامَنَّا بِهِۦۖ وَلَن نُّشۡرِكَ بِرَبِّنَآ أَحَدٗا ٢

जो सीधी राह दिखाता है, तो हम उसपर ईमान ले आए और (अब) हम अपने पालनहार के साथ किसी को कभी साझी नहीं बनाएँगे।

وَأَنَّهُۥ تَعَٰلَىٰ جَدُّ رَبِّنَا مَا ٱتَّخَذَ صَٰحِبَةٗ وَلَا وَلَدٗا ٣

तथा यह कि हमारे पालनहार की महिमा बहुत ऊँची है। उसने न (अपनी) कोई संगिनी (पत्नी) बनाई है और न कोई संतान।

وَأَنَّهُۥ كَانَ يَقُولُ سَفِيهُنَا عَلَى ٱللَّهِ شَطَطٗا ٤

तथा यह कि हमारा मूर्ख अल्लाह के बारे में सत्य से हटी हुई बात कहा करता था।

وَأَنَّا ظَنَنَّآ أَن لَّن تَقُولَ ٱلۡإِنسُ وَٱلۡجِنُّ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗا ٥

और यह कि हमने समझ रखा था कि मनुष्य और जिन्न अल्लाह पर हरगिज़ कोई झूठी बात नहीं बोलेंगे।

وَأَنَّهُۥ كَانَ رِجَالٞ مِّنَ ٱلۡإِنسِ يَعُوذُونَ بِرِجَالٖ مِّنَ ٱلۡجِنِّ فَزَادُوهُمۡ رَهَقٗا ٦

और वास्तविकता यह है कि मनुष्यों में से कुछ लोग, जिन्नों में से कुछ लोगों की शरण लिया करते थे। तो उन्होंने उन (जिन्नों) को सरकशी में बढ़ा दिया।

وَأَنَّهُمۡ ظَنُّواْ كَمَا ظَنَنتُمۡ أَن لَّن يَبۡعَثَ ٱللَّهُ أَحَدٗا ٧

और यह कि उन (इनसानों) ने गुमान किया था, जैसे कि तुमने गुमान किया था कि अल्लाह किसी को कभी नहीं उठाएगा।

وَأَنَّا لَمَسۡنَا ٱلسَّمَآءَ فَوَجَدۡنَٰهَا مُلِئَتۡ حَرَسٗا شَدِيدٗا وَشُهُبٗا ٨

तथा यह कि हमने आकाश को टटोला, तो उसे सख़्त पहरेदारों और उल्काओं से भरा हुआ पाया।

وَأَنَّا كُنَّا نَقۡعُدُ مِنۡهَا مَقَٰعِدَ لِلسَّمۡعِۖ فَمَن يَسۡتَمِعِ ٱلۡأٓنَ يَجِدۡ لَهُۥ شِهَابٗا رَّصَدٗا ٩

और यह कि हम उसके कई स्थानों में सुनने के लिए बैठा करते थे। परन्तु, अब जो सुनने का प्रयास करता है, वह अपने लिए एक उल्का घात में लगा हुआ पाता है।

وَأَنَّا لَا نَدۡرِيٓ أَشَرٌّ أُرِيدَ بِمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ أَمۡ أَرَادَ بِهِمۡ رَبُّهُمۡ رَشَدٗا ١٠

और यह कि हम नहीं जानते कि क्या धरती वालों के साथ किसी बुराई का इरादा किया गया है या उनके पालनहार ने उनके साथ किसी भलाई का इरादा किया है?

وَأَنَّا مِنَّا ٱلصَّٰلِحُونَ وَمِنَّا دُونَ ذَٰلِكَۖ كُنَّا طَرَآئِقَ قِدَدٗا ١١

और यह कि हममें से कुछ सदाचारी हैं तथा हममें से कुछ इसके अलावा हैं। हम विभिन्न तरीक़ों पर हैं।

وَأَنَّا ظَنَنَّآ أَن لَّن نُّعۡجِزَ ٱللَّهَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَن نُّعۡجِزَهُۥ هَرَبٗا ١٢

तथा यह कि हमें विश्वास हो गया कि निःसंदेह हम धरती में अल्लाह को कदापि विवश नहीं कर सकेंगे और न ही उसे भागकर कभी विवश कर सकेंगे।

وَأَنَّا لَمَّا سَمِعۡنَا ٱلۡهُدَىٰٓ ءَامَنَّا بِهِۦۖ فَمَن يُؤۡمِنۢ بِرَبِّهِۦ فَلَا يَخَافُ بَخۡسٗا وَلَا رَهَقٗا ١٣

तथा यह कि जब हमने मार्गदर्शन की बात सुनी, तो उसपर ईमान ले आए। अब जो कोई अपने पालनहार पर ईमान लाएगा, तो वह न किसी हानि से डरेगा और न किसी अत्याचार से।

وَأَنَّا مِنَّا ٱلۡمُسۡلِمُونَ وَمِنَّا ٱلۡقَٰسِطُونَۖ فَمَنۡ أَسۡلَمَ فَأُوْلَٰٓئِكَ تَحَرَّوۡاْ رَشَدٗا ١٤

और यह कि हममें से कुछ आज्ञाकारी हैं और हममें से कुछ अत्याचारी हैं। फिर जो आज्ञाकारी हो गया, तो वही लोग हैं जिन्होंने सीधा रास्ता खोजा।

وَأَمَّا ٱلۡقَٰسِطُونَ فَكَانُواْ لِجَهَنَّمَ حَطَبٗا ١٥

तथा जो अत्याचारी हैं, तो वे जहन्नम का ईंधन होंगे।

وَأَلَّوِ ٱسۡتَقَٰمُواْ عَلَى ٱلطَّرِيقَةِ لَأَسۡقَيۡنَٰهُم مَّآءً غَدَقٗا ١٦

और यह (वह़्य की गई है) कि यदि वे सीधी राह पर क़ायम रहते, तो हम उन्हें अवश्य भरपूर जल से सैराब करते।

لِّنَفۡتِنَهُمۡ فِيهِۚ وَمَن يُعۡرِضۡ عَن ذِكۡرِ رَبِّهِۦ يَسۡلُكۡهُ عَذَابٗا صَعَدٗا ١٧

ताकि हम उसमें उनका परीक्षण करें। और जो अपने पालनहार की याद से विमुख होगा, वह उसे कड़ी यातना में दाख़िल करेगा।

وَأَنَّ ٱلۡمَسَٰجِدَ لِلَّهِ فَلَا تَدۡعُواْ مَعَ ٱللَّهِ أَحَدٗا ١٨

और यह कि मस्जिदें2 केवल अल्लाह के लिए हैं। अतः अल्लाह के साथ किसी को भी मत पुकारो।

وَأَنَّهُۥ لَمَّا قَامَ عَبۡدُ ٱللَّهِ يَدۡعُوهُ كَادُواْ يَكُونُونَ عَلَيۡهِ لِبَدٗا ١٩

और यह कि जब अल्लाह का बंदा3 उसे पुकारता हुआ खड़ा हुआ, तो निकट था कि वे उनपर जत्थे बनकर टूट पड़ते।

قُلۡ إِنَّمَآ أَدۡعُواْ رَبِّي وَلَآ أُشۡرِكُ بِهِۦٓ أَحَدٗا ٢٠

आप कह दें : मैं तो केवल अपने पालनहार को पुकारता हूँ और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।

قُلۡ إِنِّي لَآ أَمۡلِكُ لَكُمۡ ضَرّٗا وَلَا رَشَدٗا ٢١

आप कह दें : निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए न किसी हानि का अधिकार रखता हूँ और न किसी भलाई का।

قُلۡ إِنِّي لَن يُجِيرَنِي مِنَ ٱللَّهِ أَحَدٞ وَلَنۡ أَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلۡتَحَدًا ٢٢

आप कह दें : निश्चय मुझे कदापि कोई अल्लाह से नहीं बचा सकेगा4 और न मैं उसके सिवा कभी कोई शरण का स्थान पाऊँगा।

إِلَّا بَلَٰغٗا مِّنَ ٱللَّهِ وَرِسَٰلَٰتِهِۦۚ وَمَن يَعۡصِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَإِنَّ لَهُۥ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًا ٢٣

परंतु (मैं तो केवल) अल्लाह के आदेश पहुँचाने और उसके संदेशों का (अधिकार रखता हूँ)। और जो अल्लाह तथा उसके रसूल की अवज्ञा करेगा, तो निश्चय उसी के लिए जहन्नम की आग है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहने वाले हैं।

حَتَّىٰٓ إِذَا رَأَوۡاْ مَا يُوعَدُونَ فَسَيَعۡلَمُونَ مَنۡ أَضۡعَفُ نَاصِرٗا وَأَقَلُّ عَدَدٗا ٢٤

यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे, जिसका उनसे वादा किया जाता है, तो अवश्य जान लेंगे कि कौन है जो सहायक की दृष्टि से अधिक कमज़ोर है और जो संख्या में अधिक कम है?

قُلۡ إِنۡ أَدۡرِيٓ أَقَرِيبٞ مَّا تُوعَدُونَ أَمۡ يَجۡعَلُ لَهُۥ رَبِّيٓ أَمَدًا ٢٥

आप कह दें : मैं नहीं जानता कि जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जाता है, वह निकट है अथवा मेरा पालनहार उसके लिए कोई अवधि निर्धारित करेगा?

عَٰلِمُ ٱلۡغَيۡبِ فَلَا يُظۡهِرُ عَلَىٰ غَيۡبِهِۦٓ أَحَدًا ٢٦

वही ग़ैब (प्रोक्ष) का जानने वाला है। वह अपने ग़ैब (प्रोक्ष) को किसी पर प्रकट नहीं करता।

إِلَّا مَنِ ٱرۡتَضَىٰ مِن رَّسُولٖ فَإِنَّهُۥ يَسۡلُكُ مِنۢ بَيۡنِ يَدَيۡهِ وَمِنۡ خَلۡفِهِۦ رَصَدٗا ٢٧

सिवाय किसी रसूल के, जिसे वह पसंद कर ले। तो निःसंदेह वह उसके आगे तथा उसके पीछे पहरेदार नियुक्त कर देता है।5

لِّيَعۡلَمَ أَن قَدۡ أَبۡلَغُواْ رِسَٰلَٰتِ رَبِّهِمۡ وَأَحَاطَ بِمَا لَدَيۡهِمۡ وَأَحۡصَىٰ كُلَّ شَيۡءٍ عَدَدَۢا ٢٨

ताकि वह जान ले कि उन्होंने वास्तव में अपने पालनहार के संदेश6 पहुँचा दिए हैं। और उसने उन सभी चीज़ों को घेर रखा है, जो उनके पास हैं और प्रत्येक वस्तु को गिन रखा है।

सूरह Al-Muzzammil

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمُزَّمِّلُ ١

ऐ कपड़े में लिपटने वाले!

قُمِ ٱلَّيۡلَ إِلَّا قَلِيلٗا ٢

रात्रि के समय (नमाज़ में) खड़े रहें, सिवाय उसके थोड़े भाग के।1

نِّصۡفَهُۥٓ أَوِ ٱنقُصۡ مِنۡهُ قَلِيلًا ٣

आधी रात (नमाज़ पढ़ें) अथवा उससे थोड़ा-सा कम कर लें।

أَوۡ زِدۡ عَلَيۡهِ وَرَتِّلِ ٱلۡقُرۡءَانَ تَرۡتِيلًا ٤

या उससे कुछ अधिक कर लें। और क़ुरआन को ठहर-ठहर कर पढ़ें।

إِنَّا سَنُلۡقِي عَلَيۡكَ قَوۡلٗا ثَقِيلًا ٥

निश्चय हम आपपर (ऐ नबी!) एक भारी वाणी (क़ुरआन) उतारेंगे।

إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيۡلِ هِيَ أَشَدُّ وَطۡـٔٗا وَأَقۡوَمُ قِيلًا ٦

निःसंदेह रात की इबादत हृदय में अधिक प्रभावी होती है और बात के लिए अधिक उपयुक्त होती है।

إِنَّ لَكَ فِي ٱلنَّهَارِ سَبۡحٗا طَوِيلٗا ٧

निःसंदेह आपके लिए दिन में बहुत-से कार्य हैं।

وَٱذۡكُرِ ٱسۡمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلۡ إِلَيۡهِ تَبۡتِيلٗا ٨

और अपने पालनहार के नाम का स्मरण करें और सबसे अलग होकर उसी की ओर ध्यान आकर्षित कर लें।

رَّبُّ ٱلۡمَشۡرِقِ وَٱلۡمَغۡرِبِ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱتَّخِذۡهُ وَكِيلٗا ٩

वह पूर्व तथा पश्चिम का पालनहार है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो।

وَٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱهۡجُرۡهُمۡ هَجۡرٗا جَمِيلٗا ١٠

और जो कुछ वे कह रहे हैं2, उसपर धैर्य से काम लें और उन्हें अच्छे ढंग से छोड़ दें।

وَذَرۡنِي وَٱلۡمُكَذِّبِينَ أُوْلِي ٱلنَّعۡمَةِ وَمَهِّلۡهُمۡ قَلِيلًا ١١

तथा मुझे और इन झुठलाने वाले संपन्न लोगों को छोड़ दें और उन्हें थोड़ी-सी मोहलत दें।

إِنَّ لَدَيۡنَآ أَنكَالٗا وَجَحِيمٗا ١٢

निःसंदेह हमारे पास बेड़ियाँ हैं तथा भड़कती हुई आग।

وَطَعَامٗا ذَا غُصَّةٖ وَعَذَابًا أَلِيمٗا ١٣

और गले में फँस जाने वाला भोजन तथा दर्दनाक यातना है।

يَوۡمَ تَرۡجُفُ ٱلۡأَرۡضُ وَٱلۡجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلۡجِبَالُ كَثِيبٗا مَّهِيلًا ١٤

जिस दिन धरती और पर्वत काँप उठेंगे तथा पर्वत गिराई हुई रेत के ढेर हो जाएँगे।

إِنَّآ أَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡكُمۡ رَسُولٗا شَٰهِدًا عَلَيۡكُمۡ كَمَآ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ رَسُولٗا ١٥

निःसंदेह हमने तुम्हारी ओर एक रसूल3 भेजा, जो तुमपर गवाही देने वाला है, जिस प्रकार हमने फ़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा।

فَعَصَىٰ فِرۡعَوۡنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذۡنَٰهُ أَخۡذٗا وَبِيلٗا ١٦

चुनाँचे फ़िरऔन ने उस रसूल की अवज्ञा की, तो हमने उसकी बड़ी सख़्त पकड़ की।

فَكَيۡفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرۡتُمۡ يَوۡمٗا يَجۡعَلُ ٱلۡوِلۡدَٰنَ شِيبًا ١٧

फिर तुम कैसे बचोगे, यदि तुमने कुफ्र किया, उस दिन से जो बच्चों को बूढ़े कर देगा?

ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرُۢ بِهِۦۚ كَانَ وَعۡدُهُۥ مَفۡعُولًا ١٨

उस दिन आकाश फट जाएगा। उसका वादा पूरा होकर रहेगा।

إِنَّ هَٰذِهِۦ تَذۡكِرَةٞۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا ١٩

निश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर रास्ता बना ले।4

۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعۡلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدۡنَىٰ مِن ثُلُثَيِ ٱلَّيۡلِ وَنِصۡفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٞ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَۚ وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحۡصُوهُ فَتَابَ عَلَيۡكُمۡۖ فَٱقۡرَءُواْ مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلۡقُرۡءَانِۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرۡضَىٰ وَءَاخَرُونَ يَضۡرِبُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ يَبۡتَغُونَ مِن فَضۡلِ ٱللَّهِ وَءَاخَرُونَ يُقَٰتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۖ فَٱقۡرَءُواْ مَا تَيَسَّرَ مِنۡهُۚ وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَقۡرِضُواْ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗاۚ وَمَا تُقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُم مِّنۡ خَيۡرٖ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيۡرٗا وَأَعۡظَمَ أَجۡرٗاۚ وَٱسۡتَغۡفِرُواْ ٱللَّهَۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمُۢ ٢٠

निःसंदेह आपका पालनहार जानता है कि आप (तहज्जुद की नमाज़ में) रात के दो-तिहाई भाग से कुछ कम तथा उसका आधा भाग और उसका एक-तिहाई भाग खड़े होते हैं। तथा आपके साथियों का एक समूह भी (ऐसा करता है)। और अल्लाह ही रात तथा दिन का अनुमान रखता है। उसने जान लिया कि तुम हरगिज़ उसकी क्षमता नहीं रखोगे। अतः उसने तुमपर दया की। अतः क़ुरआन में से जो आसान हो, पढ़ो।5 वह जानता है कि निश्चय तुममें से कुछ लोग बीमार होंगे और कुछ अन्य लोग धरती में यात्रा करेंगे, अल्लाह का अनुग्रह तलाश करेंगे और कुछ दूसरे लोग अल्लाह की राह में युद्ध करेंगे। अतः उसमें से जो आसान हो, पढ़ो। तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और अल्लाह को उत्तम ऋण6 दो। तथा तुम अपने लिए जो भी भलाई आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास अति उत्तम और बदले की दृष्टि से बढ़कर पाओगे। और अल्लाह से क्षमा याचना करो। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

सूरह Al-Muddaththir

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمُدَّثِّرُ ١

ऐ कपड़े में लिपटने वाले!1

قُمۡ فَأَنذِرۡ ٢

खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।

وَرَبَّكَ فَكَبِّرۡ ٣

तथा अपने पालनहार ही की महिमा का वर्णन करो।

وَثِيَابَكَ فَطَهِّرۡ ٤

तथा अपने कपड़े को पवित्र रखो।

وَٱلرُّجۡزَ فَٱهۡجُرۡ ٥

और गंदगी (बुतों) से दूर रहो।

وَلَا تَمۡنُن تَسۡتَكۡثِرُ ٦

तथा उपकार न जताओ (अपनी नेकियों को) अधिक समझ कर।

وَلِرَبِّكَ فَٱصۡبِرۡ ٧

और अपने पालनहार ही के लिए धैर्य से काम लो।

فَإِذَا نُقِرَ فِي ٱلنَّاقُورِ ٨

फिर जब सूर में फूँक2 मारी जाएगी।

فَذَٰلِكَ يَوۡمَئِذٖ يَوۡمٌ عَسِيرٌ ٩

तो वह दिन अति भीषण दिन होगा।

عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ غَيۡرُ يَسِيرٖ ١٠

काफ़िरों पर आसान न होगा।

ذَرۡنِي وَمَنۡ خَلَقۡتُ وَحِيدٗا ١١

आप मुझे और उसे छोड़ दें, जिसे मैंने अकेला पैदा किया।

وَجَعَلۡتُ لَهُۥ مَالٗا مَّمۡدُودٗا ١٢

और मैंने उसे बहुत सारा धन प्रदान किया।

وَبَنِينَ شُهُودٗا ١٣

और उपस्थित रहने वाले बेटे3 दिए।

وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمۡهِيدٗا ١٤

और मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन दिया।

ثُمَّ يَطۡمَعُ أَنۡ أَزِيدَ ١٥

फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसे और अधिक दूँ।

كَلَّآۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِأٓيَٰتِنَا عَنِيدٗا ١٦

कदापि नहीं! निश्चय वह हमारी आयतों का सख़्त विरोधी है।

سَأُرۡهِقُهُۥ صَعُودًا ١٧

शीघ्र ही मैं उसे एक कठोर चढ़ाई4 चढ़ाऊँगा।

إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ ١٨

निःसंदेह उसने सोच-विचार किया और बात बनाई।5

فَقُتِلَ كَيۡفَ قَدَّرَ ١٩

तो वह मारा जाए! उसने कैसी कैसी बात बनाई?

ثُمَّ قُتِلَ كَيۡفَ قَدَّرَ ٢٠

फिर मारा जाए! उसने कैसी बात बनाई?

ثُمَّ نَظَرَ ٢١

फिर उसने देखा।

ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ ٢٢

फिर उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया।

ثُمَّ أَدۡبَرَ وَٱسۡتَكۡبَرَ ٢٣

फिर उसने पीठ फेरी और घमंड किया।

فَقَالَ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ يُؤۡثَرُ ٢٤

फिर उसने कहा : यह तो मात्र एक जादू है, जो (पहलों से) नक़ल (उद्धृत) किया जाता है।6

إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا قَوۡلُ ٱلۡبَشَرِ ٢٥

यह तो मात्र मनुष्य7 की वाणी है।

سَأُصۡلِيهِ سَقَرَ ٢٦

मैं उसे शीघ्र ही 'सक़र' (जहन्नम) में झोंक दूँगा।

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا سَقَرُ ٢٧

और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि 'सक़र' (जहन्नम) क्या है?

لَا تُبۡقِي وَلَا تَذَرُ ٢٨

वह न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।

لَوَّاحَةٞ لِّلۡبَشَرِ ٢٩

वह खाल को झुलस देने वाली है।

عَلَيۡهَا تِسۡعَةَ عَشَرَ ٣٠

उसपर उन्नीस (फ़रिश्ते) नियुक्त हैं।

وَمَا جَعَلۡنَآ أَصۡحَٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَٰٓئِكَةٗۖ وَمَا جَعَلۡنَا عِدَّتَهُمۡ إِلَّا فِتۡنَةٗ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ لِيَسۡتَيۡقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ وَيَزۡدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِيمَٰنٗا وَلَا يَرۡتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡمُؤۡمِنُونَ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٞ وَٱلۡكَٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلٗاۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَمَا يَعۡلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَۚ وَمَا هِيَ إِلَّا ذِكۡرَىٰ لِلۡبَشَرِ ٣١

और हमने जहन्नम के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाए हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षण बनाया है। ताकि अह्ले किताब8 विश्वास कर लें और ईमान वाले ईमान में आगे बढ़ जाएँ। और किताब वाले एवं ईमान वाले किसी संदेह में न पड़ें। और ताकि वे लोग जिनके दिलों में रोग है और वे लोग जो काफ़िर9 हैं, यह कहें कि इस उदाहरण से अल्लाह का क्या तात्पर्य है? ऐसे ही, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। और आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह तो केवल मनुष्य के लिए उपदेश है।

كَلَّا وَٱلۡقَمَرِ ٣٢

कदापि नहीं, क़सम है चाँद की!

وَٱلَّيۡلِ إِذۡ أَدۡبَرَ ٣٣

तथा रात की, जब वह जाने लगे!

وَٱلصُّبۡحِ إِذَآ أَسۡفَرَ ٣٤

और सुबह की, जब वह प्रकाशित हो जाए!

إِنَّهَا لَإِحۡدَى ٱلۡكُبَرِ ٣٥

निःसंदेह वह (जहन्नम) निश्चय बहुत बड़ी चीज़ों10 में से एक है।

نَذِيرٗا لِّلۡبَشَرِ ٣٦

मनुष्य के लिए डराने वाली है।

لِمَن شَآءَ مِنكُمۡ أَن يَتَقَدَّمَ أَوۡ يَتَأَخَّرَ ٣٧

तुम में से उसके लिए, जो आगे बढ़ना चाहे अथवा पीछे हटना चाहे।11

كُلُّ نَفۡسِۭ بِمَا كَسَبَتۡ رَهِينَةٌ ٣٨

प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले जो उसने कमाया, गिरवी12 रखा हुआ है।

إِلَّآ أَصۡحَٰبَ ٱلۡيَمِينِ ٣٩

सिवाय दाहिने वालों के।

فِي جَنَّٰتٖ يَتَسَآءَلُونَ ٤٠

वे जन्नतों में एक-दूसरे से पूछेंगे।

عَنِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ ٤١

अपराधियों के बारे में।

مَا سَلَكَكُمۡ فِي سَقَرَ ٤٢

तुम्हें किस चीज़ ने जहन्नम में डाला?

قَالُواْ لَمۡ نَكُ مِنَ ٱلۡمُصَلِّينَ ٤٣

वे कहेंगे : हम नमाज़ पढ़ने वालों में से न थे।

وَلَمۡ نَكُ نُطۡعِمُ ٱلۡمِسۡكِينَ ٤٤

और न हम निर्धन को खाना खिलाते थे।

وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلۡخَآئِضِينَ ٤٥

और हम बेहूदा बहस करने वालों के साथ मिलकर व्यर्थ बहस किया करते थे।

وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوۡمِ ٱلدِّينِ ٤٦

और हम बदले के दिन को झुठलाया करते थे।

حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلۡيَقِينُ ٤٧

यहाँ तक कि मौत हमारे पास आ गई।

فَمَا تَنفَعُهُمۡ شَفَٰعَةُ ٱلشَّٰفِعِينَ ٤٨

तो उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी।13

فَمَا لَهُمۡ عَنِ ٱلتَّذۡكِرَةِ مُعۡرِضِينَ ٤٩

तो उन्हें क्या हो गया है कि उपदेश से मुँह फेर रहे हैं?

كَأَنَّهُمۡ حُمُرٞ مُّسۡتَنفِرَةٞ ٥٠

जैसे वे सख़्त बिदकने वाले गधे हैं।

فَرَّتۡ مِن قَسۡوَرَةِۭ ٥١

जो शेर से भागे हैं।

بَلۡ يُرِيدُ كُلُّ ٱمۡرِيٕٖ مِّنۡهُمۡ أَن يُؤۡتَىٰ صُحُفٗا مُّنَشَّرَةٗ ٥٢

बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली पुस्तकें14 दी जाएँ।

كَلَّاۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلۡأٓخِرَةَ ٥٣

ऐसा कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वे आख़िरत से नहीं डरते।

كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذۡكِرَةٞ ٥٤

हरगिज़ नहीं, निश्चय यह (क़ुरआन) एक उपदेश (याददेहानी) है।

فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ ٥٥

अतः जो चाहे, उससे नसीहत प्राप्त करे।

وَمَا يَذۡكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُۚ هُوَ أَهۡلُ ٱلتَّقۡوَىٰ وَأَهۡلُ ٱلۡمَغۡفِرَةِ ٥٦

और वे नसीहत प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही इस योग्य है कि क्षमा करे।

सूरह Al-Qiyamah

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

لَآ أُقۡسِمُ بِيَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ ١

मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन1 की।

وَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلنَّفۡسِ ٱللَّوَّامَةِ ٢

तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा2 करने वाली अंतरात्मा की।

أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَلَّن نَّجۡمَعَ عِظَامَهُۥ ٣

क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?

بَلَىٰ قَٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّيَ بَنَانَهُۥ ٤

क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।

بَلۡ يُرِيدُ ٱلۡإِنسَٰنُ لِيَفۡجُرَ أَمَامَهُۥ ٥

बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी3 गुनाह करता रहे।

يَسۡـَٔلُ أَيَّانَ يَوۡمُ ٱلۡقِيَٰمَةِ ٦

वह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?

فَإِذَا بَرِقَ ٱلۡبَصَرُ ٧

तो जब आँख चौंधिया जाएगी।

وَخَسَفَ ٱلۡقَمَرُ ٨

और चाँद को ग्रहण लग जाएगा।

وَجُمِعَ ٱلشَّمۡسُ وَٱلۡقَمَرُ ٩

और सूर्य और चाँद एकत्र4 कर दिए जाएँगे।

يَقُولُ ٱلۡإِنسَٰنُ يَوۡمَئِذٍ أَيۡنَ ٱلۡمَفَرُّ ١٠

उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?

كَلَّا لَا وَزَرَ ١١

कदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।

إِلَىٰ رَبِّكَ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡمُسۡتَقَرُّ ١٢

उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।

يُنَبَّؤُاْ ٱلۡإِنسَٰنُ يَوۡمَئِذِۭ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ ١٣

उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।5

بَلِ ٱلۡإِنسَٰنُ عَلَىٰ نَفۡسِهِۦ بَصِيرَةٞ ١٤

बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह6 है।

وَلَوۡ أَلۡقَىٰ مَعَاذِيرَهُۥ ١٥

अगरचे वह अपने बहाने पेश करे।

لَا تُحَرِّكۡ بِهِۦ لِسَانَكَ لِتَعۡجَلَ بِهِۦٓ ١٦

(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ7, ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।

إِنَّ عَلَيۡنَا جَمۡعَهُۥ وَقُرۡءَانَهُۥ ١٧

निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।

فَإِذَا قَرَأۡنَٰهُ فَٱتَّبِعۡ قُرۡءَانَهُۥ ١٨

अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।

ثُمَّ إِنَّ عَلَيۡنَا بَيَانَهُۥ ١٩

फिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।

كَلَّا بَلۡ تُحِبُّونَ ٱلۡعَاجِلَةَ ٢٠

कदापि नहीं8, बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।

وَتَذَرُونَ ٱلۡأٓخِرَةَ ٢١

और बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।

وُجُوهٞ يَوۡمَئِذٖ نَّاضِرَةٌ ٢٢

उस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।

إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٞ ٢٣

अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।

وَوُجُوهٞ يَوۡمَئِذِۭ بَاسِرَةٞ ٢٤

और कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।

تَظُنُّ أَن يُفۡعَلَ بِهَا فَاقِرَةٞ ٢٥

उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।

كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِيَ ٢٦

कदापि नहीं9, जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।

وَقِيلَ مَنۡۜ رَاقٖ ٢٧

और कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?

وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلۡفِرَاقُ ٢٨

और उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।

وَٱلۡتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ ٢٩

और पिंडली, पिंडली10 के साथ लिपट जाएगी।

إِلَىٰ رَبِّكَ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡمَسَاقُ ٣٠

उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।

فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ ٣١

तो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।

وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ٣٢

लेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।

ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓ ٣٣

फिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।

أَوۡلَىٰ لَكَ فَأَوۡلَىٰ ٣٤

तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।

ثُمَّ أَوۡلَىٰ لَكَ فَأَوۡلَىٰٓ ٣٥

फिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।

أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَن يُتۡرَكَ سُدًى ٣٦

क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?11

أَلَمۡ يَكُ نُطۡفَةٗ مِّن مَّنِيّٖ يُمۡنَىٰ ٣٧

क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?

ثُمَّ كَانَ عَلَقَةٗ فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ ٣٨

फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।

فَجَعَلَ مِنۡهُ ٱلزَّوۡجَيۡنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلۡأُنثَىٰٓ ٣٩

फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।

أَلَيۡسَ ذَٰلِكَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحۡـِۧيَ ٱلۡمَوۡتَىٰ ٤٠

क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?

सूरह Al-Insan

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

هَلۡ أَتَىٰ عَلَى ٱلۡإِنسَٰنِ حِينٞ مِّنَ ٱلدَّهۡرِ لَمۡ يَكُن شَيۡـٔٗا مَّذۡكُورًا ١

निश्चय इनसान पर ज़माने का एक ऐसा समय भी गुज़रा है, जब वह कोई ऐसी चीज़ नहीं था जिसका (कहीं) उल्लेख1 हुआ हो।

إِنَّا خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِن نُّطۡفَةٍ أَمۡشَاجٖ نَّبۡتَلِيهِ فَجَعَلۡنَٰهُ سَمِيعَۢا بَصِيرًا ٢

निःसंदेह हमने इनसान को मिश्रित वीर्य2 से पैदा किया, हम उसकी परीक्षा लेते हैं। तो हमने उसे सुनने वाला, देखने वाला बना दिया।

إِنَّا هَدَيۡنَٰهُ ٱلسَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرٗا وَإِمَّا كَفُورًا ٣

निःसंदेह हमने उसे रास्ता दिखा दिया।3 (अब) वह चाहे कृतज्ञ बने और चाहे कृतघ्न।

إِنَّآ أَعۡتَدۡنَا لِلۡكَٰفِرِينَ سَلَٰسِلَاْ وَأَغۡلَٰلٗا وَسَعِيرًا ٤

निःसंदेह हमने काफ़िरों के लिए ज़ंजीरें तथा तौक़ और भड़कती हुई आग तैयार की है।

إِنَّ ٱلۡأَبۡرَارَ يَشۡرَبُونَ مِن كَأۡسٖ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا ٥

निश्चय सदाचारी लोग ऐसे जाम से पिएँगे, जिसमें कपूर का मिश्रण होगा।

عَيۡنٗا يَشۡرَبُ بِهَا عِبَادُ ٱللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفۡجِيرٗا ٦

यह एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के बंदे पीएँगे। वे उसे (जहाँ चाहेंगे) बहा ले जाएँगे।4

يُوفُونَ بِٱلنَّذۡرِ وَيَخَافُونَ يَوۡمٗا كَانَ شَرُّهُۥ مُسۡتَطِيرٗا ٧

जो नज़्र (मन्नत)5 पूरी करते हैं और उस दिन6 से डरते हैं जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी।

وَيُطۡعِمُونَ ٱلطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ مِسۡكِينٗا وَيَتِيمٗا وَأَسِيرًا ٨

और वे निर्धन, अनाथ और क़ैदी को खाना (खुद) उसकी चाहत रखते हुए भी खिलाते हैं।

إِنَّمَا نُطۡعِمُكُمۡ لِوَجۡهِ ٱللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمۡ جَزَآءٗ وَلَا شُكُورًا ٩

(और कहते हैं :) हम तो तुम्हें केवल अल्लाह के चेहरे की ख़ातिर खिलाते हैं। न तुमसे कोई बदला चाहते हैं और न कृतज्ञता।

إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوۡمًا عَبُوسٗا قَمۡطَرِيرٗا ١٠

हम अपने पालनहार से उस दिन से डरते हैं, जो बहुत कठिन और भयानक होगा।

فَوَقَىٰهُمُ ٱللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ ٱلۡيَوۡمِ وَلَقَّىٰهُمۡ نَضۡرَةٗ وَسُرُورٗا ١١

तो अल्लाह ने उन्हें उस दिन की आपदा से बचा लिया और उन्हें ताज़गी तथा खुशी प्रदान की।

وَجَزَىٰهُم بِمَا صَبَرُواْ جَنَّةٗ وَحَرِيرٗا ١٢

और उन्हें उनके धैर्य करने के बदले में जन्नत और रेशमी वस्त्र प्रदान किया।

مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى ٱلۡأَرَآئِكِۖ لَا يَرَوۡنَ فِيهَا شَمۡسٗا وَلَا زَمۡهَرِيرٗا ١٣

वे उसमें तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे। न उसमें धूप देखेंगे और न सख़्त ठंड।

وَدَانِيَةً عَلَيۡهِمۡ ظِلَٰلُهَا وَذُلِّلَتۡ قُطُوفُهَا تَذۡلِيلٗا ١٤

और उसके साए उनपर झुके हुए होंगे और उसके फलों के गुच्छे उनके वश में कर दिए जाएँगे।

وَيُطَافُ عَلَيۡهِم بِـَٔانِيَةٖ مِّن فِضَّةٖ وَأَكۡوَابٖ كَانَتۡ قَوَارِيرَا۠ ١٥

तथा उनपर चाँदी के बरतन और प्याले फिराए जाएँगे, जो शीशे के होंगे।

قَوَارِيرَاْ مِن فِضَّةٖ قَدَّرُوهَا تَقۡدِيرٗا ١٦

शीशे चाँदी के होंगे, उन्होंने उनका ठीक अनुमान लगाया होगा।7

وَيُسۡقَوۡنَ فِيهَا كَأۡسٗا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِيلًا ١٧

और उसमें वे ऐसे जाम पिलाए जाएँगे, जिसमें सोंठ मिली होगी।

عَيۡنٗا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلۡسَبِيلٗا ١٨

वह उस (जन्नत) में एक स्रोत है, जिसका नाम सलसबील है।

۞ وَيَطُوفُ عَلَيۡهِمۡ وِلۡدَٰنٞ مُّخَلَّدُونَ إِذَا رَأَيۡتَهُمۡ حَسِبۡتَهُمۡ لُؤۡلُؤٗا مَّنثُورٗا ١٩

और उनके आस-पास ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा बालक ही रहेंगे। जब तुम उन्हें देखोगे, तो उन्हें बिखरे हुए मोती समझोगे।

وَإِذَا رَأَيۡتَ ثَمَّ رَأَيۡتَ نَعِيمٗا وَمُلۡكٗا كَبِيرًا ٢٠

तथा जब तुम वहाँ देखोगे, तो महान नेमत तथा विशाल राज्य देखोगे।

عَٰلِيَهُمۡ ثِيَابُ سُندُسٍ خُضۡرٞ وَإِسۡتَبۡرَقٞۖ وَحُلُّوٓاْ أَسَاوِرَ مِن فِضَّةٖ وَسَقَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡ شَرَابٗا طَهُورًا ٢١

उनके शरीर पर महीन रेशम के हरे कपड़े तथा दबीज़ रेशमी वस्त्र होंगे और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका पालनहार उन्हें पवित्र पेय पिलाएगा।

إِنَّ هَٰذَا كَانَ لَكُمۡ جَزَآءٗ وَكَانَ سَعۡيُكُم مَّشۡكُورًا ٢٢

(तथा कहा जाएगा :) निःसंदेह यह तुम्हारा प्रतिफल है और तुम्हारे प्रयास का सम्मान किया गया।

إِنَّا نَحۡنُ نَزَّلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡقُرۡءَانَ تَنزِيلٗا ٢٣

निश्चय हम ही ने आपपर यह क़ुरआन थोड़ा-थोड़ा करके8 उतारा है।

فَٱصۡبِرۡ لِحُكۡمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعۡ مِنۡهُمۡ ءَاثِمًا أَوۡ كَفُورٗا ٢٤

अतः आप अपने पालनहार के आदेश के लिए धैर्य रखें और उनमें से किसी पापी या कृतघ्न की बात न मानें।

وَٱذۡكُرِ ٱسۡمَ رَبِّكَ بُكۡرَةٗ وَأَصِيلٗا ٢٥

तथा प्रातःकाल और संध्या समय अपने पालनहार का नाम याद करते रहें।

وَمِنَ ٱلَّيۡلِ فَٱسۡجُدۡ لَهُۥ وَسَبِّحۡهُ لَيۡلٗا طَوِيلًا ٢٦

तथा रात के कुछ हिस्से में भी उसके लिए सजदा करें और लंबी रात तक उसकी पवित्रता का वर्णन करें।

إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلۡعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمۡ يَوۡمٗا ثَقِيلٗا ٢٧

निःसंदेह ये लोग शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम रखते है और एक भारी दिन9 को अपने पीछे छोड़ रहे हैं।

نَّحۡنُ خَلَقۡنَٰهُمۡ وَشَدَدۡنَآ أَسۡرَهُمۡۖ وَإِذَا شِئۡنَا بَدَّلۡنَآ أَمۡثَٰلَهُمۡ تَبۡدِيلًا ٢٨

हम ही ने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़-बंद मज़बूत किए, तथा हम जब चाहेंगे बदलकर उन जैसे10 अन्य लोग ले आएँगे।

إِنَّ هَٰذِهِۦ تَذۡكِرَةٞۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلٗا ٢٩

निश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने वाला) मार्ग पकड़ ले।

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمٗا ٣٠

और तुम अल्लाह के चाहे बिना कुछ भी नहीं चाह सकते।11 निश्चय अल्लाह सब चीज़ों को जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।

يُدۡخِلُ مَن يَشَآءُ فِي رَحۡمَتِهِۦۚ وَٱلظَّٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمۡ عَذَابًا أَلِيمَۢا ٣١

वह जिसे चाहता है अपनी दया में दाखिल करता है और अत्याचारियों के लिए उसने दर्दनाक यातना तैयार की है।

सूरह Al-Mursalat

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلۡمُرۡسَلَٰتِ عُرۡفٗا ١

क़सम है उन हवाओं की जो निरंतर भेजी जाती हैं!

فَٱلۡعَٰصِفَٰتِ عَصۡفٗا ٢

फिर बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम!

وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشۡرٗا ٣

और बादलों को फैलाने वाली हवाओं1 की क़सम!

فَٱلۡفَٰرِقَٰتِ فَرۡقٗا ٤

फिर सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़2 के साथ उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!

فَٱلۡمُلۡقِيَٰتِ ذِكۡرًا ٥

फिर वह़्य3 लेकर उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!

عُذۡرًا أَوۡ نُذۡرًا ٦

उज़्र (बहाना) समाप्त करने या डराने4 के लिए।

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٞ ٧

निःसंदेह तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, निश्चय वह होकर रहने वाली है।

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتۡ ٨

फिर जब तारे मिटा दिए जाएँगे।

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتۡ ٩

और जब आकाश फाड़ दिया जाएगा।

وَإِذَا ٱلۡجِبَالُ نُسِفَتۡ ١٠

और जब पर्वत उड़ा दिए जाएँगे।

وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتۡ ١١

और जब रसूलों को निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।5

لِأَيِّ يَوۡمٍ أُجِّلَتۡ ١٢

किस दिन के लिए वे विलंबित किए गए हैं?

لِيَوۡمِ ٱلۡفَصۡلِ ١٣

निर्णय के दिन के लिए।

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِ ١٤

और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ١٥

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

أَلَمۡ نُهۡلِكِ ٱلۡأَوَّلِينَ ١٦

क्या हमने पहलों को विनष्ट नहीं किया?

ثُمَّ نُتۡبِعُهُمُ ٱلۡأٓخِرِينَ ١٧

फिर हम उनके पीछे बाद वालों को भेजेंगे।6

كَذَٰلِكَ نَفۡعَلُ بِٱلۡمُجۡرِمِينَ ١٨

हम अपराधियों के साथ ऐसा ही करते हैं।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ١٩

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

أَلَمۡ نَخۡلُقكُّم مِّن مَّآءٖ مَّهِينٖ ٢٠

क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?

فَجَعَلۡنَٰهُ فِي قَرَارٖ مَّكِينٍ ٢١

फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठिकाने में रखा।

إِلَىٰ قَدَرٖ مَّعۡلُومٖ ٢٢

एक ज्ञात अवधि तक।7

فَقَدَرۡنَا فَنِعۡمَ ٱلۡقَٰدِرُونَ ٢٣

फिर हमने अनुमान8 लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٢٤

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

أَلَمۡ نَجۡعَلِ ٱلۡأَرۡضَ كِفَاتًا ٢٥

क्या हमने धरती को समेटने9 वाली नहीं बनाया?

أَحۡيَآءٗ وَأَمۡوَٰتٗا ٢٦

जीवित और मृत लोगों को।

وَجَعَلۡنَا فِيهَا رَوَٰسِيَ شَٰمِخَٰتٖ وَأَسۡقَيۡنَٰكُم مَّآءٗ فُرَاتٗا ٢٧

तथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٢٨

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

ٱنطَلِقُوٓاْ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ٢٩

(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।

ٱنطَلِقُوٓاْ إِلَىٰ ظِلّٖ ذِي ثَلَٰثِ شُعَبٖ ٣٠

एक छाया10 की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।

لَّا ظَلِيلٖ وَلَا يُغۡنِي مِنَ ٱللَّهَبِ ٣١

जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचाएगी।

إِنَّهَا تَرۡمِي بِشَرَرٖ كَٱلۡقَصۡرِ ٣٢

निःसंदेह वह (आग) भवन के समान चिंगारियाँ फेंकेगी।

كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٞ صُفۡرٞ ٣٣

जैसे वे पीले ऊँट हों।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٣٤

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

هَٰذَا يَوۡمُ لَا يَنطِقُونَ ٣٥

यह वह दिन है कि वे बोल11 नहीं सकेंगे।

وَلَا يُؤۡذَنُ لَهُمۡ فَيَعۡتَذِرُونَ ٣٦

और न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٣٧

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

هَٰذَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِۖ جَمَعۡنَٰكُمۡ وَٱلۡأَوَّلِينَ ٣٨

यह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।

فَإِن كَانَ لَكُمۡ كَيۡدٞ فَكِيدُونِ ٣٩

तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल12 हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٠

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي ظِلَٰلٖ وَعُيُونٖ ٤١

निश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।

وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشۡتَهُونَ ٤٢

तथा फलों में, जिसमें से वे चाहेंगे।

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ هَنِيٓـَٔۢا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٤٣

(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٤٤

हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٥

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

كُلُواْ وَتَمَتَّعُواْ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجۡرِمُونَ ٤٦

(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा13 आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٧

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرۡكَعُواْ لَا يَرۡكَعُونَ ٤٨

तथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٩

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

فَبِأَيِّ حَدِيثِۭ بَعۡدَهُۥ يُؤۡمِنُونَ ٥٠

फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान14 लाएँगे?

सवाल-जवाब

पारा 29 कहां से शुरू होकर कहां ख़त्म होता है?

पारा 29 सूरह Al-Mulk 67:1 से शुरू होकर सूरह Al-Mursalat 77:50 पर ख़त्म होता है।

पारा 29 में कौन सी सूरतें हैं?

पारा 29 में ये सूरतें हैं: Al-Mulk, Al-Qalam, Al-Haqqah, Al-Ma'arij, Nuh, Al-Jinn, Al-Muzzammil, Al-Muddaththir, Al-Qiyamah, Al-Insan, Al-Mursalat।

पारा क्या है?

पारा (जुज़) क़ुरआन के 30 बराबर हिस्सों में से एक है। रोज़ एक पारा पढ़ने से एक महीने में क़ुरआन पूरा हो जाता है।