सूरह Al-Haqqah, आयत 41

69:41

وَمَا هُوَ بِقَوۡلِ شَاعِرٖۚ قَلِيلٗا مَّا تُؤۡمِنُونَ ٤١

और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।

तफ़सीर

यह किसी कवि की वाणी नहीं है। क्योंकि यह कविता के रूप में नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।