أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَن يُتۡرَكَ سُدًى ٣٦
क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?11
फ़ुटनोट
11 अर्थात न उसे किसी बात का आदेश दिया जाएगा और न रोका जाएगा और न उससे कर्मों का ह़िसाब लिया जाएगा।
तफ़सीर
क्या इनसान यह समझता है कि अल्लाह उसे शरीयत का बाध्य किए बिना यूँ ही बेकार छोड़ देगा?!