सूरह Al-Mursalat المرسلات

अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلۡمُرۡسَلَٰتِ عُرۡفٗا ١

क़सम है उन हवाओं की जो निरंतर भेजी जाती हैं!

فَٱلۡعَٰصِفَٰتِ عَصۡفٗا ٢

फिर बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम!

وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشۡرٗا ٣

और बादलों को फैलाने वाली हवाओं1 की क़सम!

فَٱلۡفَٰرِقَٰتِ فَرۡقٗا ٤

फिर सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़2 के साथ उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!

فَٱلۡمُلۡقِيَٰتِ ذِكۡرًا ٥

फिर वह़्य3 लेकर उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!

عُذۡرًا أَوۡ نُذۡرًا ٦

उज़्र (बहाना) समाप्त करने या डराने4 के लिए।

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٞ ٧

निःसंदेह तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, निश्चय वह होकर रहने वाली है।

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتۡ ٨

फिर जब तारे मिटा दिए जाएँगे।

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتۡ ٩

और जब आकाश फाड़ दिया जाएगा।

وَإِذَا ٱلۡجِبَالُ نُسِفَتۡ ١٠

और जब पर्वत उड़ा दिए जाएँगे।

وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتۡ ١١

और जब रसूलों को निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।5

لِأَيِّ يَوۡمٍ أُجِّلَتۡ ١٢

किस दिन के लिए वे विलंबित किए गए हैं?

لِيَوۡمِ ٱلۡفَصۡلِ ١٣

निर्णय के दिन के लिए।

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِ ١٤

और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ١٥

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

أَلَمۡ نُهۡلِكِ ٱلۡأَوَّلِينَ ١٦

क्या हमने पहलों को विनष्ट नहीं किया?

ثُمَّ نُتۡبِعُهُمُ ٱلۡأٓخِرِينَ ١٧

फिर हम उनके पीछे बाद वालों को भेजेंगे।6

كَذَٰلِكَ نَفۡعَلُ بِٱلۡمُجۡرِمِينَ ١٨

हम अपराधियों के साथ ऐसा ही करते हैं।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ١٩

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

أَلَمۡ نَخۡلُقكُّم مِّن مَّآءٖ مَّهِينٖ ٢٠

क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?

فَجَعَلۡنَٰهُ فِي قَرَارٖ مَّكِينٍ ٢١

फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठिकाने में रखा।

إِلَىٰ قَدَرٖ مَّعۡلُومٖ ٢٢

एक ज्ञात अवधि तक।7

فَقَدَرۡنَا فَنِعۡمَ ٱلۡقَٰدِرُونَ ٢٣

फिर हमने अनुमान8 लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٢٤

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

أَلَمۡ نَجۡعَلِ ٱلۡأَرۡضَ كِفَاتًا ٢٥

क्या हमने धरती को समेटने9 वाली नहीं बनाया?

أَحۡيَآءٗ وَأَمۡوَٰتٗا ٢٦

जीवित और मृत लोगों को।

وَجَعَلۡنَا فِيهَا رَوَٰسِيَ شَٰمِخَٰتٖ وَأَسۡقَيۡنَٰكُم مَّآءٗ فُرَاتٗا ٢٧

तथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٢٨

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

ٱنطَلِقُوٓاْ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ٢٩

(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।

ٱنطَلِقُوٓاْ إِلَىٰ ظِلّٖ ذِي ثَلَٰثِ شُعَبٖ ٣٠

एक छाया10 की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।

لَّا ظَلِيلٖ وَلَا يُغۡنِي مِنَ ٱللَّهَبِ ٣١

जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचाएगी।

إِنَّهَا تَرۡمِي بِشَرَرٖ كَٱلۡقَصۡرِ ٣٢

निःसंदेह वह (आग) भवन के समान चिंगारियाँ फेंकेगी।

كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٞ صُفۡرٞ ٣٣

जैसे वे पीले ऊँट हों।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٣٤

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

هَٰذَا يَوۡمُ لَا يَنطِقُونَ ٣٥

यह वह दिन है कि वे बोल11 नहीं सकेंगे।

وَلَا يُؤۡذَنُ لَهُمۡ فَيَعۡتَذِرُونَ ٣٦

और न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٣٧

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

هَٰذَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِۖ جَمَعۡنَٰكُمۡ وَٱلۡأَوَّلِينَ ٣٨

यह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।

فَإِن كَانَ لَكُمۡ كَيۡدٞ فَكِيدُونِ ٣٩

तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल12 हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٠

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي ظِلَٰلٖ وَعُيُونٖ ٤١

निश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।

وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشۡتَهُونَ ٤٢

तथा फलों में, जिसमें से वे चाहेंगे।

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ هَنِيٓـَٔۢا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٤٣

(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٤٤

हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٥

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

كُلُواْ وَتَمَتَّعُواْ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجۡرِمُونَ ٤٦

(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा13 आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٧

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرۡكَعُواْ لَا يَرۡكَعُونَ ٤٨

तथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।

وَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ٤٩

उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

فَبِأَيِّ حَدِيثِۭ بَعۡدَهُۥ يُؤۡمِنُونَ ٥٠

फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान14 लाएँगे?

फ़ुटनोट के नंबर आयत के पेज पर ले जाते हैं, जहां अनुवादक के नोट्स दिए गए हैं।

सवाल-जवाब

सूरह Al-Mursalat में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Mursalat में 50 आयतें हैं। यह क़ुरआन की सूरह नंबर 77 है।

सूरह Al-Mursalat मक्की है या मदनी?

सूरह Al-Mursalat एक मक्की सूरह है।

सूरह Al-Mursalat किस पारे में है?

सूरह Al-Mursalat पारा 29 में है।

क्या मैं सूरह Al-Mursalat सुन सकता हूं?

हां। इस पेज के ऊपर चलाएं दबाएं, या किसी भी आयत से शुरू करें। Qabas ऐप में आप इसे ऑफ़लाइन सुनने के लिए डाउनलोड भी कर सकते हैं।