وَأَنَّا كُنَّا نَقۡعُدُ مِنۡهَا مَقَٰعِدَ لِلسَّمۡعِۖ فَمَن يَسۡتَمِعِ ٱلۡأٓنَ يَجِدۡ لَهُۥ شِهَابٗا رَّصَدٗا ٩
और यह कि हम उसके कई स्थानों में सुनने के लिए बैठा करते थे। परन्तु, अब जो सुनने का प्रयास करता है, वह अपने लिए एक उल्का घात में लगा हुआ पाता है।
तफ़सीर
हम पहले आकाश में कुछ स्थानों पर बैठा करते थे, जहाँ से हम फ़रिश्तों के बीच आदान-प्रदान होने वाली बातों को सुनते थे, फिर उन्हें धरती में मौजूद काहिनों को बता दिया करते थे। लेकिन (अब) मामला बदल गया है। अब, हम में से जो सुनने का प्रयास करता है, वह अपने लिए एक जलती हुई आग को तैयार पाता है। जब वह निकट जाता है, तो वह उसपर छोड़ दी जाती है, जो उसे जला देती है।