सूरह Nuh, आयत 7

71:7

وَإِنِّي كُلَّمَا دَعَوۡتُهُمۡ لِتَغۡفِرَ لَهُمۡ جَعَلُوٓاْ أَصَٰبِعَهُمۡ فِيٓ ءَاذَانِهِمۡ وَٱسۡتَغۡشَوۡاْ ثِيَابَهُمۡ وَأَصَرُّواْ وَٱسۡتَكۡبَرُواْ ٱسۡتِكۡبَارٗا ٧

और निःसंदेह मैंने जब भी उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं तथा अपने कपड़े ओढ़ लिए2 और हठ दिखाया और बड़ा घमंड किया।

फ़ुटनोट

2 ताकि मेरी बात न सुन सकें।

तफ़सीर

और जब भी मैंने उन्हें उस चीज़ की ओर आमंत्रित किया, जिसमें उनके पापों की क्षमा का कारण है; जैसे कि केवल तेरी इबादत करना तथा तेरा आज्ञापालन और तेरे रसूल का आज्ञापालन करना - तो उन्होंने अपनी उँगलियों से अपने कान बंद कर लिए; ताकि उन्हें मेरी बात सुनने से रोक दें, और अपने चेहरे को अपने कपड़ों से ढँक लिए, ताकि वे मुझे न देखें, तथा अपने शिर्क पर जमे रहे, और जिसकी ओर मैं उन्हें आमंत्रित करता हूँ, उसे स्वीकार करने और उसका पालन करने से अभिमान दिखाया।