إِنَّمَا نُطۡعِمُكُمۡ لِوَجۡهِ ٱللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمۡ جَزَآءٗ وَلَا شُكُورًا ٩
(और कहते हैं :) हम तो तुम्हें केवल अल्लाह के चेहरे की ख़ातिर खिलाते हैं। न तुमसे कोई बदला चाहते हैं और न कृतज्ञता।
तफ़सीर
वे अपने दिल में यह बात रखते हैं कि वे उन्हें केवल अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए खाना खिलाते हैं। वे उन्हें खिलाने के लिए उनसे कोई बदला या प्रशंसा नहीं चाहते हैं।