وَلَا تُطِعۡ كُلَّ حَلَّافٖ مَّهِينٍ ١٠
और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।3
फ़ुटनोट
3 इन आयतों में किसी विशेष काफ़िर की दशा का वर्णन नहीं, बल्कि काफ़िरों के प्रमुखों के नैतिक पतन तथा कुविचारों और दुराचारों को बताया गया है, जो लोगों को इस्लाम के विरुद्ध उकसा रहे थे। तो फिर क्या इनकी बात मानी जा सकती है?
तफ़सीर
और आप हर ऐसे व्यक्ति की बात न मानें, जो बहुत ज़्यादा झूठी क़समें खाने वाला और तुच्छ है।