فَلَيۡسَ لَهُ ٱلۡيَوۡمَ هَٰهُنَا حَمِيمٞ ٣٥
अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
तफ़सीर
अतः क़ियामत के दिन उसका कोई क़रीबी (रिश्तेदार) नहीं है, जो उससे यातना को टाल सके।
فَلَيۡسَ لَهُ ٱلۡيَوۡمَ هَٰهُنَا حَمِيمٞ ٣٥
अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
अतः क़ियामत के दिन उसका कोई क़रीबी (रिश्तेदार) नहीं है, जो उससे यातना को टाल सके।