قُلۡ إِنِّي لَن يُجِيرَنِي مِنَ ٱللَّهِ أَحَدٞ وَلَنۡ أَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلۡتَحَدًا ٢٢
आप कह दें : निश्चय मुझे कदापि कोई अल्लाह से नहीं बचा सकेगा4 और न मैं उसके सिवा कभी कोई शरण का स्थान पाऊँगा।
फ़ुटनोट
4 अर्थात यदि मैं उसकी अवज्ञा करूँ और वह मुझे यातना देना चाहे।
तफ़सीर
आप उनसे कह दें : अगर मैं अल्लाह की अवज्ञा करूँ, तो उसकी पकड़ से मुझे कोई नहीं बचा सकेगा और न मुझे उसके अलावा कोई शरण लेने का स्थान मिल सकेगा।