وَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلنَّفۡسِ ٱللَّوَّامَةِ ٢
तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा2 करने वाली अंतरात्मा की।
फ़ुटनोट
2 मनुष्य की अंतरात्मा की यह विशेषता है कि वह बुराई करने पर उसकी निंदा करती है।
तफ़सीर
तथा अल्लाह ने अच्छी आत्मा की क़सम खाई है, जो इनसान को अच्छे काम में कोताही करने पर और बुरे कामों के करने पर मलामत (निंदा) करती है। अल्लाह ने इन दोनों चीज़ों की क़सम खाकर कहा है कि वह लोगों को हिसाब और बदले के लिए ज़रूर पुनर्जीवित करेगा।