पारा 27 قال فما خطبكم

सूरह Adh-Dhariyat 51:31 से सूरह Al-Hadid 57:29 तक

अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari

सूरह Adh-Dhariyat

۞ قَالَ فَمَا خَطۡبُكُمۡ أَيُّهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ ٣١

उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?

قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرۡسِلۡنَآ إِلَىٰ قَوۡمٖ مُّجۡرِمِينَ ٣٢

उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।

لِنُرۡسِلَ عَلَيۡهِمۡ حِجَارَةٗ مِّن طِينٖ ٣٣

ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।

مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلۡمُسۡرِفِينَ ٣٤

जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित9 हैं।

فَأَخۡرَجۡنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٣٥

फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।

فَمَا وَجَدۡنَا فِيهَا غَيۡرَ بَيۡتٖ مِّنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ٣٦

तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर10 के सिवा कोई और नहीं पाया।

وَتَرَكۡنَا فِيهَآ ءَايَةٗ لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ ٣٧

तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।

وَفِي مُوسَىٰٓ إِذۡ أَرۡسَلۡنَٰهُ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ ٣٨

तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।

فَتَوَلَّىٰ بِرُكۡنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ أَوۡ مَجۡنُونٞ ٣٩

तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।

فَأَخَذۡنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٞ ٤٠

अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।

وَفِي عَادٍ إِذۡ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلۡعَقِيمَ ٤١

तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ11 हवा भेजी दी।

مَا تَذَرُ مِن شَيۡءٍ أَتَتۡ عَلَيۡهِ إِلَّا جَعَلَتۡهُ كَٱلرَّمِيمِ ٤٢

वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।

وَفِي ثَمُودَ إِذۡ قِيلَ لَهُمۡ تَمَتَّعُواْ حَتَّىٰ حِينٖ ٤٣

तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।

فَعَتَوۡاْ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِمۡ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَهُمۡ يَنظُرُونَ ٤٤

फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।

فَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ مِن قِيَامٖ وَمَا كَانُواْ مُنتَصِرِينَ ٤٥

फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।

وَقَوۡمَ نُوحٖ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ ٤٦

तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।12

وَٱلسَّمَآءَ بَنَيۡنَٰهَا بِأَيۡيْدٖ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ ٤٧

तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।

وَٱلۡأَرۡضَ فَرَشۡنَٰهَا فَنِعۡمَ ٱلۡمَٰهِدُونَ ٤٨

तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।

وَمِن كُلِّ شَيۡءٍ خَلَقۡنَا زَوۡجَيۡنِ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ ٤٩

तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।

فَفِرُّوٓاْ إِلَى ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞ ٥٠

अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।

وَلَا تَجۡعَلُواْ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞ ٥١

और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।

كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُواْ سَاحِرٌ أَوۡ مَجۡنُونٌ ٥٢

इसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।

أَتَوَاصَوۡاْ بِهِۦۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٞ طَاغُونَ ٥٣

क्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत13 की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।

فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٖ ٥٤

अतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।

وَذَكِّرۡ فَإِنَّ ٱلذِّكۡرَىٰ تَنفَعُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٥٥

तथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।

وَمَا خَلَقۡتُ ٱلۡجِنَّ وَٱلۡإِنسَ إِلَّا لِيَعۡبُدُونِ ٥٦

और मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।

مَآ أُرِيدُ مِنۡهُم مِّن رِّزۡقٖ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطۡعِمُونِ ٥٧

मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।

إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلۡقُوَّةِ ٱلۡمَتِينُ ٥٨

निःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।

فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ ذَنُوبٗا مِّثۡلَ ذَنُوبِ أَصۡحَٰبِهِمۡ فَلَا يَسۡتَعۡجِلُونِ ٥٩

अतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।

فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن يَوۡمِهِمُ ٱلَّذِي يُوعَدُونَ ٦٠

अतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन14 से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।

सूरह At-Tur

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلطُّورِ ١

क़सम है तूर1 (पर्वत) की!

وَكِتَٰبٖ مَّسۡطُورٖ ٢

और एक पुस्तक2 की जो लिखी हुई है!

فِي رَقّٖ مَّنشُورٖ ٣

ऐसे पन्ने में जो खुला हुआ है।

وَٱلۡبَيۡتِ ٱلۡمَعۡمُورِ ٤

तथा बैतुल-मा'मूर (आबाद घर)3 की!

وَٱلسَّقۡفِ ٱلۡمَرۡفُوعِ ٥

तथा ऊँची उठाई हुई छत (आकाश) की!

وَٱلۡبَحۡرِ ٱلۡمَسۡجُورِ ٦

और लबालब भरे हुए समुद्र 4 की!

إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٞ ٧

कि निश्चय आपके पालनहार की यातना अवश्चय घटित होने वाली है।

مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٖ ٨

उसे कोई टालने वाला नहीं।

يَوۡمَ تَمُورُ ٱلسَّمَآءُ مَوۡرٗا ٩

जिस दिन आकाश बुरी तरह डगमगाएगा।

وَتَسِيرُ ٱلۡجِبَالُ سَيۡرٗا ١٠

तथा पर्वत बहुत तेज़ी से चलेंगे।

فَوَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ ١١

तो उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ी तबाही है।

ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي خَوۡضٖ يَلۡعَبُونَ ١٢

जो व्यर्थ बातों में पड़े खेल रहे हैं।

يَوۡمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا ١٣

जिस दिन उन्हें ज़ोर से धक्का देकर जहन्नम की आग में धकेला जाएगा।

هَٰذِهِ ٱلنَّارُ ٱلَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ١٤

यही है वह आग, जिसे तुम झुठलाते थे।

أَفَسِحۡرٌ هَٰذَآ أَمۡ أَنتُمۡ لَا تُبۡصِرُونَ ١٥

तो क्या यह जादू है, या तुम नहीं देख रहे?

ٱصۡلَوۡهَا فَٱصۡبِرُوٓاْ أَوۡ لَا تَصۡبِرُواْ سَوَآءٌ عَلَيۡكُمۡۖ إِنَّمَا تُجۡزَوۡنَ مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ١٦

इसमें प्रवेश कर जाओ। फिर सब्र करो या सब्र न करो, तुम्हारे लिए बराबर है। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّٰتٖ وَنَعِيمٖ ١٧

निःसंदेह डरने वाले लोग बागों और बड़ी नेमत में हैं।

فَٰكِهِينَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡ وَوَقَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡ عَذَابَ ٱلۡجَحِيمِ ١٨

उसका आनंद लेने वाले हैं जो उनके रब ने उन्हें दिया और उनके रब ने उन्हें दहकती हुई आग की यातना से बचा लिया।

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ هَنِيٓـَٔۢا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ١٩

मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ سُرُرٖ مَّصۡفُوفَةٖۖ وَزَوَّجۡنَٰهُم بِحُورٍ عِينٖ ٢٠

पंक्तिबद्ध तख़्तों पर तकिया लगाए हुए होंगे और हमने उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर दिया, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली हैं।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱتَّبَعَتۡهُمۡ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَٰنٍ أَلۡحَقۡنَا بِهِمۡ ذُرِّيَّتَهُمۡ وَمَآ أَلَتۡنَٰهُم مِّنۡ عَمَلِهِم مِّن شَيۡءٖۚ كُلُّ ٱمۡرِيِٕۭ بِمَا كَسَبَ رَهِينٞ ٢١

और जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने ईमान के साथ उनका अनुसरण किया, हम उनकी संतान को उनके साथ मिला देंगे तथा उनके कर्मों में उनसे कुछ भी कम न करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले में जो उसने कमाया, गिरवी5 रखा हुआ है।

وَأَمۡدَدۡنَٰهُم بِفَٰكِهَةٖ وَلَحۡمٖ مِّمَّا يَشۡتَهُونَ ٢٢

तथा हम उन्हें और अधिक फल और मांस देंगे उसमें से जो वे चाहेंगे।

يَتَنَٰزَعُونَ فِيهَا كَأۡسٗا لَّا لَغۡوٞ فِيهَا وَلَا تَأۡثِيمٞ ٢٣

वे उसमें एक-दूसरे से मदिरा का प्याला लेंगे, जिसमें न कोई व्यर्थ बात होगी और न गुनाह में डालना।

۞ وَيَطُوفُ عَلَيۡهِمۡ غِلۡمَانٞ لَّهُمۡ كَأَنَّهُمۡ لُؤۡلُؤٞ مَّكۡنُونٞ ٢٤

तथा उनके आस-पास चक्कर लगाते रहेंगे उन्हीं के बच्चे, जैसे वे छुपाए हुए मोती हों।

وَأَقۡبَلَ بَعۡضُهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖ يَتَسَآءَلُونَ ٢٥

और वे एक-दूसरे की ओर मुतवज्जह होकर आपस में सवाल करेंगे।

قَالُوٓاْ إِنَّا كُنَّا قَبۡلُ فِيٓ أَهۡلِنَا مُشۡفِقِينَ ٢٦

वे कहेंगे : निःसंदेह हम इससे पहले6 अपने घरवालों में डरने वाले थे।

فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيۡنَا وَوَقَىٰنَا عَذَابَ ٱلسَّمُومِ ٢٧

तो अल्लाह ने हमपर उपकार किया और हमें विषैली लू की यातना से बचा लिया।

إِنَّا كُنَّا مِن قَبۡلُ نَدۡعُوهُۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡبَرُّ ٱلرَّحِيمُ ٢٨

निःसंदेह हम इससे पहले7 ही उसे पुकारा करते थे। निश्चय वही तो अति परोपकारी, अत्यंत दयावान् है।

فَذَكِّرۡ فَمَآ أَنتَ بِنِعۡمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٖ وَلَا مَجۡنُونٍ ٢٩

अतः आप नसीहत करें। क्योंकि अपने पालनहार के अनुग्रह से आप न तो काहिन हैं और न ही पागल।8

أَمۡ يَقُولُونَ شَاعِرٞ نَّتَرَبَّصُ بِهِۦ رَيۡبَ ٱلۡمَنُونِ ٣٠

या वे कहते है कि यह एक कवि है जिसपर हम ज़माने की घटनाओं का इंतज़ार करते हैं?9

قُلۡ تَرَبَّصُواْ فَإِنِّي مَعَكُم مِّنَ ٱلۡمُتَرَبِّصِينَ ٣١

आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करते रहो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।

أَمۡ تَأۡمُرُهُمۡ أَحۡلَٰمُهُم بِهَٰذَآۚ أَمۡ هُمۡ قَوۡمٞ طَاغُونَ ٣٢

क्या उन्हें उनकी बुद्धियाँ इस बात का आदेश देती हैं, ये वे स्वयं ही सरकश लोग हैं?

أَمۡ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُۥۚ بَل لَّا يُؤۡمِنُونَ ٣٣

या वे कहते हैं कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है? बल्कि वे ईमान नहीं लाते।

فَلۡيَأۡتُواْ بِحَدِيثٖ مِّثۡلِهِۦٓ إِن كَانُواْ صَٰدِقِينَ ٣٤

तो फिर वे इस (क़ुरआन) के समान एक ही बात बनाकर ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं।

أَمۡ خُلِقُواْ مِنۡ غَيۡرِ شَيۡءٍ أَمۡ هُمُ ٱلۡخَٰلِقُونَ ٣٥

या वे बिना किसी चीज़ के10 पैदा हो गए हैं, या वे (स्वयं) पैदा करने वाले हैं?

أَمۡ خَلَقُواْ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ ٣٦

या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया है? बल्कि वे विश्वास ही नहीं करते।

أَمۡ عِندَهُمۡ خَزَآئِنُ رَبِّكَ أَمۡ هُمُ ٱلۡمُصَۜيۡطِرُونَ ٣٧

या उनके पास आपके पालनहार के ख़ज़ाने हैं, या वही अधिकार चलाने वाले हैं?

أَمۡ لَهُمۡ سُلَّمٞ يَسۡتَمِعُونَ فِيهِۖ فَلۡيَأۡتِ مُسۡتَمِعُهُم بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٍ ٣٨

या उनके पास कोई सीढ़ी है, जिसपर वे अच्छी तरह सुन11 लेते हैं? तो उनके सुनने वाले को चाहिए कि वह कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करे।

أَمۡ لَهُ ٱلۡبَنَٰتُ وَلَكُمُ ٱلۡبَنُونَ ٣٩

या उस (अल्लाह) के लिए तो बेटियाँ है और तुम्हारे लिए बेटे?

أَمۡ تَسۡـَٔلُهُمۡ أَجۡرٗا فَهُم مِّن مَّغۡرَمٖ مُّثۡقَلُونَ ٤٠

या आप उनसे कोई पारिश्रमिक12 माँगते हैं? तो वे उस तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं।

أَمۡ عِندَهُمُ ٱلۡغَيۡبُ فَهُمۡ يَكۡتُبُونَ ٤١

या उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है? तो वे उसे लिखते13 रहते हैं।

أَمۡ يُرِيدُونَ كَيۡدٗاۖ فَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ هُمُ ٱلۡمَكِيدُونَ ٤٢

या वे कोई चाल चलना चाहते हैं? तो जिन लोगों ने इनकार किया, वही चाल में आने वाले हैं।

أَمۡ لَهُمۡ إِلَٰهٌ غَيۡرُ ٱللَّهِۚ سُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يُشۡرِكُونَ ٤٣

या उनका अल्लाह के सिवा कोई पूज्य है? पवित्र है अल्लाह उससे जो वे साझी ठहराते हैं।

وَإِن يَرَوۡاْ كِسۡفٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ سَاقِطٗا يَقُولُواْ سَحَابٞ مَّرۡكُومٞ ٤٤

और यदि वे आकाश से कोई टुकड़ा गिरता हुआ देख लें, तो कह देंगे कि यह परत दर परत बादल है।14

فَذَرۡهُمۡ حَتَّىٰ يُلَٰقُواْ يَوۡمَهُمُ ٱلَّذِي فِيهِ يُصۡعَقُونَ ٤٥

अतः आप उन्हें छोड़ दें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन को जा मिलें, जिसमें15 वे बेहोश किए जाएँगे।

يَوۡمَ لَا يُغۡنِي عَنۡهُمۡ كَيۡدُهُمۡ شَيۡـٔٗا وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ ٤٦

जिस दिन न तो उनकी चाल काम आएगी और न उनकी सहायता की जाएगी।

وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ عَذَابٗا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ٤٧

तथा निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उस (आख़िरत) से पहले भी एक यातना16 है। परंतु उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते।

وَٱصۡبِرۡ لِحُكۡمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعۡيُنِنَاۖ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ ٤٨

और (ऐ नबी!) आप अपने पालनहार का आदेश आने तक धैर्य रखें। निःसंदेह आप हमारी आँखों के सामने हैं। तथा जब आप उठें, तो अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें।

وَمِنَ ٱلَّيۡلِ فَسَبِّحۡهُ وَإِدۡبَٰرَ ٱلنُّجُومِ ٤٩

तथा रात के कुछ भाग में फिर उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सितारों के चले जाने के बाद भी।17

सूरह An-Najm

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلنَّجۡمِ إِذَا هَوَىٰ ١

क़सम है तारे की जब वह गिरे!

مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمۡ وَمَا غَوَىٰ ٢

तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।

وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلۡهَوَىٰٓ ٣

और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।

إِنۡ هُوَ إِلَّا وَحۡيٞ يُوحَىٰ ٤

वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।

عَلَّمَهُۥ شَدِيدُ ٱلۡقُوَىٰ ٥

उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते)1 ने सिखाया है।

ذُو مِرَّةٖ فَٱسۡتَوَىٰ ٦

जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।

وَهُوَ بِٱلۡأُفُقِ ٱلۡأَعۡلَىٰ ٧

जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।

ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ ٨

फिर वह निकट हुआ और उतर आया।

فَكَانَ قَابَ قَوۡسَيۡنِ أَوۡ أَدۡنَىٰ ٩

फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।

فَأَوۡحَىٰٓ إِلَىٰ عَبۡدِهِۦ مَآ أَوۡحَىٰ ١٠

फिर उसने अल्लाह के बंदे2 की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।

مَا كَذَبَ ٱلۡفُؤَادُ مَا رَأَىٰٓ ١١

दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।

أَفَتُمَٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ ١٢

फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

وَلَقَدۡ رَءَاهُ نَزۡلَةً أُخۡرَىٰ ١٣

हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

عِندَ سِدۡرَةِ ٱلۡمُنتَهَىٰ ١٤

सिदरतुल-मुनतहा'3 के पास।

عِندَهَا جَنَّةُ ٱلۡمَأۡوَىٰٓ ١٥

उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

إِذۡ يَغۡشَى ٱلسِّدۡرَةَ مَا يَغۡشَىٰ ١٦

जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।4

مَا زَاغَ ٱلۡبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ ١٧

न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

لَقَدۡ رَأَىٰ مِنۡ ءَايَٰتِ رَبِّهِ ٱلۡكُبۡرَىٰٓ ١٨

निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ5 देखीं।

أَفَرَءَيۡتُمُ ٱللَّٰتَ وَٱلۡعُزَّىٰ ١٩

फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।

وَمَنَوٰةَ ٱلثَّالِثَةَ ٱلۡأُخۡرَىٰٓ ٢٠

तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?6

أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلۡأُنثَىٰ ٢١

क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?

تِلۡكَ إِذٗا قِسۡمَةٞ ضِيزَىٰٓ ٢٢

तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।

إِنۡ هِيَ إِلَّآ أَسۡمَآءٞ سَمَّيۡتُمُوهَآ أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلۡطَٰنٍۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهۡوَى ٱلۡأَنفُسُۖ وَلَقَدۡ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلۡهُدَىٰٓ ٢٣

ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल7 के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।

أَمۡ لِلۡإِنسَٰنِ مَا تَمَنَّىٰ ٢٤

क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?

فَلِلَّهِ ٱلۡأٓخِرَةُ وَٱلۡأُولَىٰ ٢٥

(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।

۞ وَكَم مِّن مَّلَكٖ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ لَا تُغۡنِي شَفَٰعَتُهُمۡ شَيۡـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعۡدِ أَن يَأۡذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرۡضَىٰٓ ٢٦

और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।8

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ لَيُسَمُّونَ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ تَسۡمِيَةَ ٱلۡأُنثَىٰ ٢٧

निःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।

وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنۡ عِلۡمٍۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغۡنِي مِنَ ٱلۡحَقِّ شَيۡـٔٗا ٢٨

हालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।

فَأَعۡرِضۡ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكۡرِنَا وَلَمۡ يُرِدۡ إِلَّا ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا ٢٩

अतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।

ذَٰلِكَ مَبۡلَغُهُم مِّنَ ٱلۡعِلۡمِۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِمَنِ ٱهۡتَدَىٰ ٣٠

यही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।

وَلِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ لِيَجۡزِيَ ٱلَّذِينَ أَسَٰٓـُٔواْ بِمَا عَمِلُواْ وَيَجۡزِيَ ٱلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ بِٱلۡحُسۡنَى ٣١

तथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।

ٱلَّذِينَ يَجۡتَنِبُونَ كَبَٰٓئِرَ ٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡفَوَٰحِشَ إِلَّا ٱللَّمَمَۚ إِنَّ رَبَّكَ وَٰسِعُ ٱلۡمَغۡفِرَةِۚ هُوَ أَعۡلَمُ بِكُمۡ إِذۡ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ وَإِذۡ أَنتُمۡ أَجِنَّةٞ فِي بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمۡۖ فَلَا تُزَكُّوٓاْ أَنفُسَكُمۡۖ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَنِ ٱتَّقَىٰٓ ٣٢

वे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों9 से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती10 से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।

أَفَرَءَيۡتَ ٱلَّذِي تَوَلَّىٰ ٣٣

फिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?

وَأَعۡطَىٰ قَلِيلٗا وَأَكۡدَىٰٓ ٣٤

और थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।

أَعِندَهُۥ عِلۡمُ ٱلۡغَيۡبِ فَهُوَ يَرَىٰٓ ٣٥

क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।11

أَمۡ لَمۡ يُنَبَّأۡ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ ٣٦

या उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?

وَإِبۡرَٰهِيمَ ٱلَّذِي وَفَّىٰٓ ٣٧

और इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।

أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡرَىٰ ٣٨

कि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।

وَأَن لَّيۡسَ لِلۡإِنسَٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ ٣٩

और यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।

وَأَنَّ سَعۡيَهُۥ سَوۡفَ يُرَىٰ ٤٠

और यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।

ثُمَّ يُجۡزَىٰهُ ٱلۡجَزَآءَ ٱلۡأَوۡفَىٰ ٤١

फिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।

وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلۡمُنتَهَىٰ ٤٢

और यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضۡحَكَ وَأَبۡكَىٰ ٤٣

तथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحۡيَا ٤٤

तथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।

وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوۡجَيۡنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلۡأُنثَىٰ ٤٥

और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।

مِن نُّطۡفَةٍ إِذَا تُمۡنَىٰ ٤٦

एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।

وَأَنَّ عَلَيۡهِ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأُخۡرَىٰ ٤٧

और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार12 पैदा करना है।

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغۡنَىٰ وَأَقۡنَىٰ ٤٨

और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।

وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعۡرَىٰ ٤٩

और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' 13 का रब है।

وَأَنَّهُۥٓ أَهۡلَكَ عَادًا ٱلۡأُولَىٰ ٥٠

और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' 14 को विनष्ट किया।

وَثَمُودَاْ فَمَآ أَبۡقَىٰ ٥١

तथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।

وَقَوۡمَ نُوحٖ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ هُمۡ أَظۡلَمَ وَأَطۡغَىٰ ٥٢

तथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।

وَٱلۡمُؤۡتَفِكَةَ أَهۡوَىٰ ٥٣

और उलट जाने वाली बस्ती15 को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।

فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰ ٥٤

तो ढाँप दिया16 उसे जिस चीज़ से ढाँपा।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ ٥٥

तो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?

هَٰذَا نَذِيرٞ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلۡأُولَىٰٓ ٥٦

यह17 पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।

أَزِفَتِ ٱلۡأٓزِفَةُ ٥٧

निकट आने वाली निकट आ गई।

لَيۡسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌ ٥٨

जिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।

أَفَمِنۡ هَٰذَا ٱلۡحَدِيثِ تَعۡجَبُونَ ٥٩

तो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?

وَتَضۡحَكُونَ وَلَا تَبۡكُونَ ٦٠

तथा हँसते हो और रोते नहीं हो?

وَأَنتُمۡ سَٰمِدُونَ ٦١

तथा तुम ग़ाफ़िल हो!

فَٱسۡجُدُواْۤ لِلَّهِۤ وَٱعۡبُدُواْ۩ ٦٢

अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत18 करो।

सूरह Al-Qamar

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ٱقۡتَرَبَتِ ٱلسَّاعَةُ وَٱنشَقَّ ٱلۡقَمَرُ ١

क़ियामत बहुत निकट आ गई1 और चाँद फट गया।

وَإِن يَرَوۡاْ ءَايَةٗ يُعۡرِضُواْ وَيَقُولُواْ سِحۡرٞ مُّسۡتَمِرّٞ ٢

और यदि वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं कि (यह) एक जादू है जो समाप्त हो जाने वाला है।

وَكَذَّبُواْ وَٱتَّبَعُوٓاْ أَهۡوَآءَهُمۡۚ وَكُلُّ أَمۡرٖ مُّسۡتَقِرّٞ ٣

उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का पालन किया और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।

وَلَقَدۡ جَآءَهُم مِّنَ ٱلۡأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزۡدَجَرٌ ٤

और निःसंदेह उनके पास ऐसी सूचनाएँ आ चुकी हैं, जिनमें डाँटडपट है।

حِكۡمَةُۢ بَٰلِغَةٞۖ فَمَا تُغۡنِ ٱلنُّذُرُ ٥

पूर्णतया हिकमत है, फिर भी डरानेवाली चीज़ें काम नहीं आतीं।

فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡۘ يَوۡمَ يَدۡعُ ٱلدَّاعِ إِلَىٰ شَيۡءٖ نُّكُرٍ ٦

अतः आप उनसे मुँह फेर लें, जिस दिन पुकारने वाला एक अप्रिय चीज़2 की ओर पुकारेगा।

خُشَّعًا أَبۡصَٰرُهُمۡ يَخۡرُجُونَ مِنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ كَأَنَّهُمۡ جَرَادٞ مُّنتَشِرٞ ٧

उनकी आँखें झुकी होंगी। वे कब्रों से ऐसे निकलेंगे, जैसे वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हों।

مُّهۡطِعِينَ إِلَى ٱلدَّاعِۖ يَقُولُ ٱلۡكَٰفِرُونَ هَٰذَا يَوۡمٌ عَسِرٞ ٨

वे बुलाने वाले की ओर तेज़ी से भाग रहे होंगे। काफ़िर कहेंगे : यह बड़ा कठिन दिन है।

۞ كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٖ فَكَذَّبُواْ عَبۡدَنَا وَقَالُواْ مَجۡنُونٞ وَٱزۡدُجِرَ ٩

इनसे पहले नूह़ की जाति ने झुठलाया। तो उन्होंने हमारे बंदे को झुठलाया और कहा कि वह पागल है और उसे झिड़क दिया गया।

فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنِّي مَغۡلُوبٞ فَٱنتَصِرۡ ١٠

तो उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मैं विवश हूँ, अतः तू बदला ले।

فَفَتَحۡنَآ أَبۡوَٰبَ ٱلسَّمَآءِ بِمَآءٖ مُّنۡهَمِرٖ ١١

तो हमने ज़ोर से बरसने वाले पानी के साथ आकाश के द्वार खोल दिए।

وَفَجَّرۡنَا ٱلۡأَرۡضَ عُيُونٗا فَٱلۡتَقَى ٱلۡمَآءُ عَلَىٰٓ أَمۡرٖ قَدۡ قُدِرَ ١٢

तथा हमने धरती को स्रोतों के साथ फाड़ दिया, तो सारा जल एक साथ मिल गया, उस कार्य के लिए जो नियत हो चुका था।

وَحَمَلۡنَٰهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلۡوَٰحٖ وَدُسُرٖ ١٣

और हमने उसे तख़्तों और कीलों वाली (नाव) पर सवार कर दिया।

تَجۡرِي بِأَعۡيُنِنَا جَزَآءٗ لِّمَن كَانَ كُفِرَ ١٤

जो हमारी आँखों के सामने चल रही थी, उसका बदला लेने के लिए जिसका इनकार किया गया था।

وَلَقَد تَّرَكۡنَٰهَآ ءَايَةٗ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ ١٥

और निःसंदेह हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ा, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ١٦

फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ ١٧

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

كَذَّبَتۡ عَادٞ فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ١٨

आद ने (भी) झुठलाया। तो कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ رِيحٗا صَرۡصَرٗا فِي يَوۡمِ نَحۡسٖ مُّسۡتَمِرّٖ ١٩

निःसंदहे हमने एक निरंतर अशुभ दिन में उनपर एक तेज़ ठंडी हवा भेज दी।

تَنزِعُ ٱلنَّاسَ كَأَنَّهُمۡ أَعۡجَازُ نَخۡلٖ مُّنقَعِرٖ ٢٠

वह लोगों को ऐसे उखाड़ फेंकती थी, जैसे वे उखड़े हुए खजूर के तने हों।

فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ٢١

फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ ٢٢

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

كَذَّبَتۡ ثَمُودُ بِٱلنُّذُرِ ٢٣

समूद3 ने डराने वालों को झुठलाया।

فَقَالُوٓاْ أَبَشَرٗا مِّنَّا وَٰحِدٗا نَّتَّبِعُهُۥٓ إِنَّآ إِذٗا لَّفِي ضَلَٰلٖ وَسُعُرٍ ٢٤

तो उन्होंने कहा : क्या हम अपने ही में से एक आदमी का अनुसरण करें? निश्चय ही हम उस समय बड़ी गुमराही और बावलेपन में होंगे।

أَءُلۡقِيَ ٱلذِّكۡرُ عَلَيۡهِ مِنۢ بَيۡنِنَا بَلۡ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٞ ٢٥

क्या यह उपदेश हमारे बीच में से उसी पर उतारा गया है? बल्कि वह बड़ा झूठा है, अहंकारी है।

سَيَعۡلَمُونَ غَدٗا مَّنِ ٱلۡكَذَّابُ ٱلۡأَشِرُ ٢٦

शीघ्र ही वे कल जान लेंगे कि बहुत झूठा, अहंकारी कौन है?

إِنَّا مُرۡسِلُواْ ٱلنَّاقَةِ فِتۡنَةٗ لَّهُمۡ فَٱرۡتَقِبۡهُمۡ وَٱصۡطَبِرۡ ٢٧

निःसंदेह हम यह ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए भेजने वाले हैं। अतः उनकी प्रतीक्षा करो और ख़ूब धैर्य रखो।

وَنَبِّئۡهُمۡ أَنَّ ٱلۡمَآءَ قِسۡمَةُۢ بَيۡنَهُمۡۖ كُلُّ شِرۡبٖ مُّحۡتَضَرٞ ٢٨

और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। पीने की प्रत्येक बारी4 पर उपस्थित हुआ जाएगा।

فَنَادَوۡاْ صَاحِبَهُمۡ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ ٢٩

तो उन्होंने अपने साथी को पुकारा। सो उसने (उसे) पकड़ा और उसका वध कर दिया।

فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ٣٠

फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَكَانُواْ كَهَشِيمِ ٱلۡمُحۡتَظِرِ ٣١

हमने उनपर एक ही चिंघाड़ भेजी, तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह हो गए।

وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ ٣٢

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

كَذَّبَتۡ قَوۡمُ لُوطِۭ بِٱلنُّذُرِ ٣٣

लूत की जाति ने डराने वालों को झुठला दिया।

إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ حَاصِبًا إِلَّآ ءَالَ لُوطٖۖ نَّجَّيۡنَٰهُم بِسَحَرٖ ٣٤

निःसंदेह हमने उनपर पत्थर बरसाने वाली एक हवा भेजी, सिवाय लूत के घरवालों के। उन्हें हमने भोर से कुछ पहले ही बचा लिया।

نِّعۡمَةٗ مِّنۡ عِندِنَاۚ كَذَٰلِكَ نَجۡزِي مَن شَكَرَ ٣٥

अपनी ओर से (विशेष) अनुग्रह करते हुए। इसी प्रकार हम उसे बदला देते हैं, जो धन्यवाद करे।

وَلَقَدۡ أَنذَرَهُم بَطۡشَتَنَا فَتَمَارَوۡاْ بِٱلنُّذُرِ ٣٦

और निःसंदेह उसने उन्हें हमारी पकड़ से डराया, तो उन्होंने डराने में संदेह किया।

وَلَقَدۡ رَٰوَدُوهُ عَن ضَيۡفِهِۦ فَطَمَسۡنَآ أَعۡيُنَهُمۡ فَذُوقُواْ عَذَابِي وَنُذُرِ ٣٧

और निःसंदेह उन्होंने उसे उसके अतिथियों से बहकाने5 का प्रयास किया, तो हमने उनकी आँखें मेट दीं। अतः मेरी यातना और मेरी चेतावनी का मज़ा चखो।

وَلَقَدۡ صَبَّحَهُم بُكۡرَةً عَذَابٞ مُّسۡتَقِرّٞ ٣٨

और निःसंदेह सुबह सवेरे ही उनपर एक न टलने वाली यातना आ पहुँची।

فَذُوقُواْ عَذَابِي وَنُذُرِ ٣٩

अतः मेरे अज़ाब और मेरे डराने का स्वाद चखो।

وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ ٤٠

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

وَلَقَدۡ جَآءَ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ ٱلنُّذُرُ ٤١

तथा निःसंदेह फ़िरऔनियों के पास डराने वाले आए।

كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذۡنَٰهُمۡ أَخۡذَ عَزِيزٖ مُّقۡتَدِرٍ ٤٢

उन्होंने हमारी सब निशानियों को झुठला दिया, तो हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार सब पर प्रभुत्वशाली, सबसे शक्तिशाली पकड़ता है।

أَكُفَّارُكُمۡ خَيۡرٞ مِّنۡ أُوْلَٰٓئِكُمۡ أَمۡ لَكُم بَرَآءَةٞ فِي ٱلزُّبُرِ ٤٣

क्या तुम्हारे काफ़िर उन लोगों से बेहतर हैं, या तुम्हारे लिए (पहली) पुस्कतों में कोई मुक्ति लिखी हुई है?

أَمۡ يَقُولُونَ نَحۡنُ جَمِيعٞ مُّنتَصِرٞ ٤٤

या वे कहते हैं कि हम एक जत्था हैं, जो बदला लेकर रहने वाले हैं?

سَيُهۡزَمُ ٱلۡجَمۡعُ وَيُوَلُّونَ ٱلدُّبُرَ ٤٥

शीध्र ही यह समूह पराजित कर दिया जाएगा और ये लोग पीठ दिखाकर भागेंगे।6

بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوۡعِدُهُمۡ وَٱلسَّاعَةُ أَدۡهَىٰ وَأَمَرُّ ٤٦

बल्कि क़यामत ही उनके वादे का समय है और क़ियामत कहीं बड़ी विपत्ति और अधिक कड़वी है।

إِنَّ ٱلۡمُجۡرِمِينَ فِي ضَلَٰلٖ وَسُعُرٖ ٤٧

निश्चय अपराधी लोग बड़ी गुमराही और यातना में हैं।

يَوۡمَ يُسۡحَبُونَ فِي ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمۡ ذُوقُواْ مَسَّ سَقَرَ ٤٨

जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे। (कहा जाएगा :) जहन्नम की यातना का मज़ा चखो।

إِنَّا كُلَّ شَيۡءٍ خَلَقۡنَٰهُ بِقَدَرٖ ٤٩

निःसंदेह हमने प्रत्येक वस्तु को एक अनुमान के साथ पैदा किया है।

وَمَآ أَمۡرُنَآ إِلَّا وَٰحِدَةٞ كَلَمۡحِۭ بِٱلۡبَصَرِ ٥٠

और हमारा आदेश तो केवल एक बार होता है, जैसे आँख की एक झपक।7

وَلَقَدۡ أَهۡلَكۡنَآ أَشۡيَاعَكُمۡ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ ٥١

और निःसंदेह हमने तुम्हारे जैसे कई समूहों को विनष्ट कर दिया, तो क्या है कोई नसीहत हासिल करने वाला?

وَكُلُّ شَيۡءٖ فَعَلُوهُ فِي ٱلزُّبُرِ ٥٢

और उन्होंने जो कुछ भी किया वह किताबों (कर्मपत्रों) में दर्ज है।8

وَكُلُّ صَغِيرٖ وَكَبِيرٖ مُّسۡتَطَرٌ ٥٣

और हर छोटी और बड़ी बात लिखी हुई है।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّٰتٖ وَنَهَرٖ ٥٤

निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वाले बाग़ो और नहरों में होंगे।

فِي مَقۡعَدِ صِدۡقٍ عِندَ مَلِيكٖ مُّقۡتَدِرِۭ ٥٥

सत्य की सभा में, महान बादशाह के पास, जो असीम शक्ति वाला है।

सूरह Ar-Rahman

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ٱلرَّحۡمَٰنُ ١

अत्यंत दयावान् ने।

عَلَّمَ ٱلۡقُرۡءَانَ ٢

यह क़ुरआन सिखाया।

خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ ٣

उसने मनुष्य को पैदा किया।

عَلَّمَهُ ٱلۡبَيَانَ ٤

उसे बात करना सिखाया।

ٱلشَّمۡسُ وَٱلۡقَمَرُ بِحُسۡبَانٖ ٥

सूर्य तथा चंद्रमा एक हिसाब से चल रहे हैं।

وَٱلنَّجۡمُ وَٱلشَّجَرُ يَسۡجُدَانِ ٦

तथा बिना तने के पौधे और पेड़ सजदा करते हैं।

وَٱلسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ ٱلۡمِيزَانَ ٧

और उसने आकाश को ऊँचा किया और न्याय का संतुलन स्थापित किया।1

أَلَّا تَطۡغَوۡاْ فِي ٱلۡمِيزَانِ ٨

ताकि तुम माप-तौल में अति न करो।

وَأَقِيمُواْ ٱلۡوَزۡنَ بِٱلۡقِسۡطِ وَلَا تُخۡسِرُواْ ٱلۡمِيزَانَ ٩

तथा न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और माप-तौल में कमी न करो।

وَٱلۡأَرۡضَ وَضَعَهَا لِلۡأَنَامِ ١٠

और उसने धरती को सृष्टि के लिए (रहने योग्य) बनाया।

فِيهَا فَٰكِهَةٞ وَٱلنَّخۡلُ ذَاتُ ٱلۡأَكۡمَامِ ١١

उसमें फल हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं।

وَٱلۡحَبُّ ذُو ٱلۡعَصۡفِ وَٱلرَّيۡحَانُ ١٢

और भूसे वाले अन्न तथा सुगंधित पौधे हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٣

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ مِن صَلۡصَٰلٖ كَٱلۡفَخَّارِ ١٤

उसने मनुष्य को ठीकरी की तरह बजने वाली मिट्टी से पैदा किया।

وَخَلَقَ ٱلۡجَآنَّ مِن مَّارِجٖ مِّن نَّارٖ ١٥

तथा जिन्नों को आग की ज्वाला से पैदा किया।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٦

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

رَبُّ ٱلۡمَشۡرِقَيۡنِ وَرَبُّ ٱلۡمَغۡرِبَيۡنِ ١٧

(वह) सूर्योदय2 के दोनों स्थानों तथा सूर्यास्त के दोनों स्थानों का रब है।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٨

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

مَرَجَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ يَلۡتَقِيَانِ ١٩

उसने दो सागरों को मिला दिया, जो (देखने में) आपस में मिलते हैं।

بَيۡنَهُمَا بَرۡزَخٞ لَّا يَبۡغِيَانِ ٢٠

उन दोनों के बीच एक अवरोध है (जिससे) वे आगे नहीं बढ़ते।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢١

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

يَخۡرُجُ مِنۡهُمَا ٱللُّؤۡلُؤُ وَٱلۡمَرۡجَانُ ٢٢

उन दोनों से मोती और मूँगा निकलते हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٣

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

وَلَهُ ٱلۡجَوَارِ ٱلۡمُنشَـَٔاتُ فِي ٱلۡبَحۡرِ كَٱلۡأَعۡلَٰمِ ٢٤

तथा उसी के अधिकार में हैं समुद्र में चलने वाले पहाड़ों जैसे जहाज़।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٥

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

كُلُّ مَنۡ عَلَيۡهَا فَانٖ ٢٦

हर कोई जो इस (धरती) पर है, नष्ट होने वाला है।

وَيَبۡقَىٰ وَجۡهُ رَبِّكَ ذُو ٱلۡجَلَٰلِ وَٱلۡإِكۡرَامِ ٢٧

तथा आपके पालनहार का चेहरा बाक़ी रहेगा, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٨

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

يَسۡـَٔلُهُۥ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ كُلَّ يَوۡمٍ هُوَ فِي شَأۡنٖ ٢٩

उसी से माँगता है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। वह प्रतिदिन एक (नए) कार्य में है।3

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٠

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

سَنَفۡرُغُ لَكُمۡ أَيُّهَ ٱلثَّقَلَانِ ٣١

हम जल्द ही तुम्हारे लिए फ़ारिग़ होंगे4 ऐ दो भारी समूहो! (जिन्नो और इनसानो!)5

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٢

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

يَٰمَعۡشَرَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ إِنِ ٱسۡتَطَعۡتُمۡ أَن تَنفُذُواْ مِنۡ أَقۡطَارِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ فَٱنفُذُواْۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلۡطَٰنٖ ٣٣

ऐ जिन्न तथा मनुष्य के समूह! यदि तुम आकाशों तथा धरती के किनारों से निकल सकते हो, तो निकल भागो, (परंतु) तुम शक्ति (प्रभुत्व) के बिना नहीं निकल सकोगे।6

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٤

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

يُرۡسَلُ عَلَيۡكُمَا شُوَاظٞ مِّن نَّارٖ وَنُحَاسٞ فَلَا تَنتَصِرَانِ ٣٥

तुम दोनों पर आग का ज्वाला तथा धुआँ छोड़ा जाएगा। फिर तुम अपने आपको बचा नहीं सकोगे।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٦

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتۡ وَرۡدَةٗ كَٱلدِّهَانِ ٣٧

फिर जब आकाश फट जाएगा, तो वह तेल की तरह लाल हो जाएगा।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٨

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فَيَوۡمَئِذٖ لَّا يُسۡـَٔلُ عَن ذَنۢبِهِۦٓ إِنسٞ وَلَا جَآنّٞ ٣٩

फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा और न किसी जिन्न से।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٠

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

يُعۡرَفُ ٱلۡمُجۡرِمُونَ بِسِيمَٰهُمۡ فَيُؤۡخَذُ بِٱلنَّوَٰصِي وَٱلۡأَقۡدَامِ ٤١

अपराधियों की पहचान उनके चिह्नों से होगी, फिर माथे के बालों और पैरों से (उन्हें) पकड़ा जाएगा।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٢

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

هَٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِي يُكَذِّبُ بِهَا ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٤٣

यही है वह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग झुठलाते थे।

يَطُوفُونَ بَيۡنَهَا وَبَيۡنَ حَمِيمٍ ءَانٖ ٤٤

वे उसके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٥

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

وَلِمَنۡ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ ٤٦

और जो व्यक्ति अपने पालनहार के समक्ष खड़े होने से डर गया, उसके लिए दो बाग़ हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٧

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

ذَوَاتَآ أَفۡنَانٖ ٤٨

दोनों बहुत शाखाओं वाले हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٩

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فِيهِمَا عَيۡنَانِ تَجۡرِيَانِ ٥٠

उन दोनों में दो जल स्रोत बहते हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥١

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فِيهِمَا مِن كُلِّ فَٰكِهَةٖ زَوۡجَانِ ٥٢

उन दोनों में प्रत्येक फल के दो प्रकार हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٣

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ فُرُشِۭ بَطَآئِنُهَا مِنۡ إِسۡتَبۡرَقٖۚ وَجَنَى ٱلۡجَنَّتَيۡنِ دَانٖ ٥٤

ऐसे बिस्तरों पर तकिए लगाए होंगे, जिनके स्तर मोटे रेशम के हैं और दोनों बाग़ों के फल निकट हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٥

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فِيهِنَّ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرۡفِ لَمۡ يَطۡمِثۡهُنَّ إِنسٞ قَبۡلَهُمۡ وَلَا جَآنّٞ ٥٦

उनमें नीची निगाहों वाली औरतें हैं, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया है और न किसी जिन्न ने।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٧

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

كَأَنَّهُنَّ ٱلۡيَاقُوتُ وَٱلۡمَرۡجَانُ ٥٨

मानो वे (स्त्रियाँ) माणिक और मूँगा हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٩

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

هَلۡ جَزَآءُ ٱلۡإِحۡسَٰنِ إِلَّا ٱلۡإِحۡسَٰنُ ٦٠

एहसान का बदला एहसान के सिवा क्या है?

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦١

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ ٦٢

तथा इन दो (बाग़ों) के अलावा और दो बाग़ हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٣

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

مُدۡهَآمَّتَانِ ٦٤

दोनों गहरे हरे रंग के हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٥

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فِيهِمَا عَيۡنَانِ نَضَّاخَتَانِ ٦٦

उन दोनों में जोश मारते हुए दो जल स्रोत हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٧

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فِيهِمَا فَٰكِهَةٞ وَنَخۡلٞ وَرُمَّانٞ ٦٨

उन दोनों में फल तथा खजूर के पेड़ और अनार हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٩

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

فِيهِنَّ خَيۡرَٰتٌ حِسَانٞ ٧٠

उनमें कई अच्छे व्यवहार वाली, खूबसूरत महिलाएं हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧١

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

حُورٞ مَّقۡصُورَٰتٞ فِي ٱلۡخِيَامِ ٧٢

हूरें (यानी गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतें), जो खेमों में रोकी हुई हैं।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٣

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

لَمۡ يَطۡمِثۡهُنَّ إِنسٞ قَبۡلَهُمۡ وَلَا جَآنّٞ ٧٤

उनसे पहले न तो किसी मनुष्य ने उन्हें छुआ है और न ही किसी जिन्न ने।7

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٥

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ رَفۡرَفٍ خُضۡرٖ وَعَبۡقَرِيٍّ حِسَانٖ ٧٦

वे हरी और उत्कृष्ट एवं अति सुंदर क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे।

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٧

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

تَبَٰرَكَ ٱسۡمُ رَبِّكَ ذِي ٱلۡجَلَٰلِ وَٱلۡإِكۡرَامِ ٧٨

बहुत बरकत वाला है आपके पालनहार का नाम, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।

सूरह Al-Waqi'ah

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

إِذَا وَقَعَتِ ٱلۡوَاقِعَةُ ١

जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी।

لَيۡسَ لِوَقۡعَتِهَا كَاذِبَةٌ ٢

उसके घटित होने में कोई झूठ नहीं।

خَافِضَةٞ رَّافِعَةٌ ٣

नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।1

إِذَا رُجَّتِ ٱلۡأَرۡضُ رَجّٗا ٤

जब धरती तेज़ी से हिलाई जाएगी।

وَبُسَّتِ ٱلۡجِبَالُ بَسّٗا ٥

और पर्वत ख़ूब चूर्ण-विचूर्ण कर दिए जाएँगे।

فَكَانَتۡ هَبَآءٗ مُّنۢبَثّٗا ٦

तो वे बिखरी हुई धूल हो जाएँगे।

وَكُنتُمۡ أَزۡوَٰجٗا ثَلَٰثَةٗ ٧

और तुम तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।

فَأَصۡحَٰبُ ٱلۡمَيۡمَنَةِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلۡمَيۡمَنَةِ ٨

तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!2

وَأَصۡحَٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ ٩

और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!

وَٱلسَّٰبِقُونَ ٱلسَّٰبِقُونَ ١٠

और जो पहल करने वाले हैं, वही आगे बढ़ने वाले हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلۡمُقَرَّبُونَ ١١

यही लोग निकट किए हुए हैं।3

فِي جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ ١٢

नेमत के बाग़ों में।

ثُلَّةٞ مِّنَ ٱلۡأَوَّلِينَ ١٣

पहले लोगों में से एक बहुत बड़ा समूह।

وَقَلِيلٞ مِّنَ ٱلۡأٓخِرِينَ ١٤

तथा थोड़े-से पिछले लोगों में से होंगे।

عَلَىٰ سُرُرٖ مَّوۡضُونَةٖ ١٥

सोने के तारों से बुने हुए तख़्तों पर।

مُّتَّكِـِٔينَ عَلَيۡهَا مُتَقَٰبِلِينَ ١٦

उनपर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे।

يَطُوفُ عَلَيۡهِمۡ وِلۡدَٰنٞ مُّخَلَّدُونَ ١٧

उनके आस-पास (सेवा के लिए) ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा (बालक) ही रहेंगे।

بِأَكۡوَابٖ وَأَبَارِيقَ وَكَأۡسٖ مِّن مَّعِينٖ ١٨

ऐसे प्याले َऔर सुराहियाँ और छलकते जाम लेकर जो बहती शराब की होंगे।

لَّا يُصَدَّعُونَ عَنۡهَا وَلَا يُنزِفُونَ ١٩

वे न उससे सिरदर्द से पीड़ित होंगे और न ही उनकी बुद्धि प्रभावित होगी।

وَفَٰكِهَةٖ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ ٢٠

तथा ऐसे फल लेकर जिन्हें वे पसंद करते हैं।

وَلَحۡمِ طَيۡرٖ مِّمَّا يَشۡتَهُونَ ٢١

तथा पक्षियों का मांस लेकर जिसकी वे इच्छा रखते हैं।

وَحُورٌ عِينٞ ٢٢

और बड़ी-बड़ी नैनों वाली गोरियाँ होंगी।

كَأَمۡثَٰلِ ٱللُّؤۡلُوِٕ ٱلۡمَكۡنُونِ ٢٣

छिपाकर रखे हुए मोतियों के समान।

جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٢٤

उसके बदले में जो वे (संसार में) किया करते थे।

لَا يَسۡمَعُونَ فِيهَا لَغۡوٗا وَلَا تَأۡثِيمًا ٢٥

वे उस में न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न पाप की बात।

إِلَّا قِيلٗا سَلَٰمٗا سَلَٰمٗا ٢٦

केवल सलाम ही सलाम की आवाज़ होगी।

وَأَصۡحَٰبُ ٱلۡيَمِينِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلۡيَمِينِ ٢٧

और दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!

فِي سِدۡرٖ مَّخۡضُودٖ ٢٨

वे बिना कँटीले बेरियों में होंगे।

وَطَلۡحٖ مَّنضُودٖ ٢٩

तथा परत-दर-परत लगे हुए केलों में।

وَظِلّٖ مَّمۡدُودٖ ٣٠

और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई है।4

وَمَآءٖ مَّسۡكُوبٖ ٣١

और प्रवाहित जल में।

وَفَٰكِهَةٖ كَثِيرَةٖ ٣٢

तथा बहुत अधिक फलों में।

لَّا مَقۡطُوعَةٖ وَلَا مَمۡنُوعَةٖ ٣٣

जो न कभी समाप्त होंगे और न उनसे कोई रोक-टोक होगी।

وَفُرُشٖ مَّرۡفُوعَةٍ ٣٤

और ऊँचे बिस्तरों पर होंगे।

إِنَّآ أَنشَأۡنَٰهُنَّ إِنشَآءٗ ٣٥

निःसंदेह हमने उनको एक विशेष रूप से पैदा किया है।

فَجَعَلۡنَٰهُنَّ أَبۡكَارًا ٣٦

तो हमने उन्हें कुँवारियाँ बनाया है।

عُرُبًا أَتۡرَابٗا ٣٧

जो पतियों को प्रिय और समान आयु वाली हैं।

لِّأَصۡحَٰبِ ٱلۡيَمِينِ ٣٨

दाहिने हाथ वालों के लिए।

ثُلَّةٞ مِّنَ ٱلۡأَوَّلِينَ ٣٩

एक बड़ा समूह पहले लोगों में से हैं।

وَثُلَّةٞ مِّنَ ٱلۡأٓخِرِينَ ٤٠

तथा एक बड़ा समूह पिछले लोगों में से हैं।

وَأَصۡحَٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلشِّمَالِ ٤١

और बाएँ हाथ वाले, क्या ही बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!

فِي سَمُومٖ وَحَمِيمٖ ٤٢

(वे) गर्म हवा तथा खौलते जल में होंगे।

وَظِلّٖ مِّن يَحۡمُومٖ ٤٣

और काले धुएँ के साये में होंगे।

لَّا بَارِدٖ وَلَا كَرِيمٍ ٤٤

जो न शीतल होगा और न देखने में अच्छी ही लगेगा।

إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَبۡلَ ذَٰلِكَ مُتۡرَفِينَ ٤٥

निश्चय वे इससे पहले (दुनिया की) सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे।

وَكَانُواْ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلۡحِنثِ ٱلۡعَظِيمِ ٤٦

तथा वे बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे।

وَكَانُواْ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ ٤٧

और वे कहा करते थे कि क्या जब हम मर जाएँगे और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?

أَوَءَابَآؤُنَا ٱلۡأَوَّلُونَ ٤٨

और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी?

قُلۡ إِنَّ ٱلۡأَوَّلِينَ وَٱلۡأٓخِرِينَ ٤٩

आप कह दें : निःसंदेह अगले तथा पिछले (सभी) लोग।

لَمَجۡمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَٰتِ يَوۡمٖ مَّعۡلُومٖ ٥٠

एक ज्ञात दिन के निश्चित समय पर अवश्य एकत्र किए जाने वाले हैं।

ثُمَّ إِنَّكُمۡ أَيُّهَا ٱلضَّآلُّونَ ٱلۡمُكَذِّبُونَ ٥١

फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!

لَأٓكِلُونَ مِن شَجَرٖ مِّن زَقُّومٖ ٥٢

निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।5

فَمَالِـُٔونَ مِنۡهَا ٱلۡبُطُونَ ٥٣

फिर उससे अपने पेट भरने वाले हो।

فَشَٰرِبُونَ عَلَيۡهِ مِنَ ٱلۡحَمِيمِ ٥٤

फिर उसपर खौलते पानी से पीने वाले हो।

فَشَٰرِبُونَ شُرۡبَ ٱلۡهِيمِ ٥٥

फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट6 के समान।

هَٰذَا نُزُلُهُمۡ يَوۡمَ ٱلدِّينِ ٥٦

यह बदले के दिन उनकी मेहमाननवाज़ी है।

نَحۡنُ خَلَقۡنَٰكُمۡ فَلَوۡلَا تُصَدِّقُونَ ٥٧

हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?

أَفَرَءَيۡتُم مَّا تُمۡنُونَ ٥٨

तो क्या तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम टपकाते हो?

ءَأَنتُمۡ تَخۡلُقُونَهُۥٓ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡخَٰلِقُونَ ٥٩

क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?

نَحۡنُ قَدَّرۡنَا بَيۡنَكُمُ ٱلۡمَوۡتَ وَمَا نَحۡنُ بِمَسۡبُوقِينَ ٦٠

हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।

عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمۡثَٰلَكُمۡ وَنُنشِئَكُمۡ فِي مَا لَا تَعۡلَمُونَ ٦١

कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।

وَلَقَدۡ عَلِمۡتُمُ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأُولَىٰ فَلَوۡلَا تَذَكَّرُونَ ٦٢

तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?

أَفَرَءَيۡتُم مَّا تَحۡرُثُونَ ٦٣

फिर क्या तुमने उसपर विचार किया जो कुछ तुम बोते हो?

ءَأَنتُمۡ تَزۡرَعُونَهُۥٓ أَمۡ نَحۡنُ ٱلزَّٰرِعُونَ ٦٤

क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?

لَوۡ نَشَآءُ لَجَعَلۡنَٰهُ حُطَٰمٗا فَظَلۡتُمۡ تَفَكَّهُونَ ٦٥

यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।

إِنَّا لَمُغۡرَمُونَ ٦٦

कि निःसंदेह हमपर दाँड डाल दिया गया।

بَلۡ نَحۡنُ مَحۡرُومُونَ ٦٧

बल्कि हम वंचित हो गए हैं।

أَفَرَءَيۡتُمُ ٱلۡمَآءَ ٱلَّذِي تَشۡرَبُونَ ٦٨

फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?

ءَأَنتُمۡ أَنزَلۡتُمُوهُ مِنَ ٱلۡمُزۡنِ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡمُنزِلُونَ ٦٩

क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?

لَوۡ نَشَآءُ جَعَلۡنَٰهُ أُجَاجٗا فَلَوۡلَا تَشۡكُرُونَ ٧٠

यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?

أَفَرَءَيۡتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِي تُورُونَ ٧١

फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?

ءَأَنتُمۡ أَنشَأۡتُمۡ شَجَرَتَهَآ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡمُنشِـُٔونَ ٧٢

क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?

نَحۡنُ جَعَلۡنَٰهَا تَذۡكِرَةٗ وَمَتَٰعٗا لِّلۡمُقۡوِينَ ٧٣

हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।

فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِيمِ ٧٤

अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।

۞ فَلَآ أُقۡسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ ٧٥

अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!

وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٞ لَّوۡ تَعۡلَمُونَ عَظِيمٌ ٧٦

और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।

إِنَّهُۥ لَقُرۡءَانٞ كَرِيمٞ ٧٧

निःसंदेह, यह निश्चित रूप से एक प्रतिष्ठित क़ुरआन है।

فِي كِتَٰبٖ مَّكۡنُونٖ ٧٨

एक छिपाकर रखी हुई7 किताब में (अंकित) है।

لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلۡمُطَهَّرُونَ ٧٩

इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।8

تَنزِيلٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٨٠

यह सारे संसार के पालनहार की ओर से उतारा गया है।

أَفَبِهَٰذَا ٱلۡحَدِيثِ أَنتُم مُّدۡهِنُونَ ٨١

फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?

وَتَجۡعَلُونَ رِزۡقَكُمۡ أَنَّكُمۡ تُكَذِّبُونَ ٨٢

तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?

فَلَوۡلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلۡحُلۡقُومَ ٨٣

फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।

وَأَنتُمۡ حِينَئِذٖ تَنظُرُونَ ٨٤

और तुम उस समय देख रहे होते हो।

وَنَحۡنُ أَقۡرَبُ إِلَيۡهِ مِنكُمۡ وَلَٰكِن لَّا تُبۡصِرُونَ ٨٥

तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।

فَلَوۡلَآ إِن كُنتُمۡ غَيۡرَ مَدِينِينَ ٨٦

तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।

تَرۡجِعُونَهَآ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٨٧

तुम उसे वापस ले आते, यदि तुम सच्चे हो?

فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلۡمُقَرَّبِينَ ٨٨

फिर यदि वह निकटवर्तियों में से है।

فَرَوۡحٞ وَرَيۡحَانٞ وَجَنَّتُ نَعِيمٖ ٨٩

तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।

وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلۡيَمِينِ ٩٠

और यदि वह दाहिने हाथ वालों में से है।

فَسَلَٰمٞ لَّكَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلۡيَمِينِ ٩١

तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।

وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلۡمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ ٩٢

और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,

فَنُزُلٞ مِّنۡ حَمِيمٖ ٩٣

तो उसके लिए खौलते हुए पानी का अतिथि सत्कार है।

وَتَصۡلِيَةُ جَحِيمٍ ٩٤

तथा जहन्नम की आग में जलना है।

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلۡيَقِينِ ٩٥

निःसंदेह यक़ीनन यही है वह सत्य जो निश्चित है।

فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِيمِ ٩٦

अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की महिमा करें।

सूरह Al-Hadid

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ١

अल्लाह की पवित्रता का गान किया हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।

لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ ٢

उसी के लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है। वह जीवन प्रदान करता और मौत देता है। तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

هُوَ ٱلۡأَوَّلُ وَٱلۡأٓخِرُ وَٱلظَّٰهِرُ وَٱلۡبَاطِنُۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ ٣

वही सबसे पहले है और सबसे आख़िर है और ज़ाहिर (दृश्यमान) है और पोशीदा (अदृश्य) है और वह हर चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।

هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ يَعۡلَمُ مَا يَلِجُ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا يَخۡرُجُ مِنۡهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا يَعۡرُجُ فِيهَاۖ وَهُوَ مَعَكُمۡ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ ٤

उसी ने आकाशों तथा धरती को छह दिनों में पैदा किया, फिर वह अर्श पर बुलंद हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है और वह तुम्हारे साथ1 है, तुम जहाँ कहीं भी हो। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है।

لَّهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ ٥

आकाशों और धरती का राज्य उसी का है और सारे मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं।

يُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِي ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِي ٱلَّيۡلِۚ وَهُوَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٦

वह रात्रि को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात्रि में दाखिल करता है तथा वह सीनों की बातों को ख़ूब जानने वाला है।

ءَامِنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَأَنفِقُواْ مِمَّا جَعَلَكُم مُّسۡتَخۡلَفِينَ فِيهِۖ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡ وَأَنفَقُواْ لَهُمۡ أَجۡرٞ كَبِيرٞ ٧

अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसमें से खर्च करो जिसमें उसने तुम्हें उत्तराधिकारी बनाया है। फिर तुममें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने ख़र्च किए, उनके लिए बहुत बड़ा प्रतिफल है।

وَمَا لَكُمۡ لَا تُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلرَّسُولُ يَدۡعُوكُمۡ لِتُؤۡمِنُواْ بِرَبِّكُمۡ وَقَدۡ أَخَذَ مِيثَٰقَكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ ٨

और तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह पर ईमान नहीं लाते, जबकि रसूल2 तुम्हें बुला रहा है कि अपने पालनहार पर ईमान लाओ, और निश्चय वह (अल्लाह) तुमसे दृढ़ वचन3 ले चुका है, यदि तुम ईमान वाले हो।

هُوَ ٱلَّذِي يُنَزِّلُ عَلَىٰ عَبۡدِهِۦٓ ءَايَٰتِۭ بَيِّنَٰتٖ لِّيُخۡرِجَكُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ بِكُمۡ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞ ٩

वही है, जो अपने बंदे पर स्पष्ट निशानियाँ उतारता है, ताकि तुम्हें अँधेरों से प्रकाश की ओर निकाले। तथा निःसंदेह अल्लाह तुमपर निश्चय ही बड़ा करुणामय, अत्यंत दयावान् है।

وَمَا لَكُمۡ أَلَّا تُنفِقُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلِلَّهِ مِيرَٰثُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ لَا يَسۡتَوِي مِنكُم مَّنۡ أَنفَقَ مِن قَبۡلِ ٱلۡفَتۡحِ وَقَٰتَلَۚ أُوْلَٰٓئِكَ أَعۡظَمُ دَرَجَةٗ مِّنَ ٱلَّذِينَ أَنفَقُواْ مِنۢ بَعۡدُ وَقَٰتَلُواْۚ وَكُلّٗا وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ ١٠

और तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते, जबकि आसमानों और ज़मीन की मीरास अल्लाह ही के लिए है। तुममें से जिसने (मक्का की) विजय से पहले ख़र्च किया और लड़ाई की वह (बाद में ऐसा करने वालों के) बराबर नहीं है। ये लोग पद में उन लोगों से बड़े हैं, जिन्होंने बाद में4 ख़र्च किया और युद्ध किया। जबकि अल्लाह ने प्रत्येक से अच्छा बदला देने का वादा किया है तथा तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे भली-भाँति सूचित है।

مَّن ذَا ٱلَّذِي يُقۡرِضُ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا فَيُضَٰعِفَهُۥ لَهُۥ وَلَهُۥٓ أَجۡرٞ كَرِيمٞ ١١

कौन है जो अल्लाह को अच्छा क़र्ज़5 दे, फिर वह उसे उसके लिए कई गुना कर दे और उसके लिए अच्छा (सम्मानजनक) बदला है?

يَوۡمَ تَرَى ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِ يَسۡعَىٰ نُورُهُم بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَبِأَيۡمَٰنِهِمۖ بُشۡرَىٰكُمُ ٱلۡيَوۡمَ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ١٢

जिस दिन तुम ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों को देखोगे कि उनका प्रकाश उनके आगे तथा उनके दाहिनी ओर दौड़ रहा होगा।6 आज तुम्हें ऐसे बागों की शुभ-सूचना है, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें तुम हमेशा रहोगे। यही तो बहुत बड़ी सफलता है।

يَوۡمَ يَقُولُ ٱلۡمُنَٰفِقُونَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتُ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱنظُرُونَا نَقۡتَبِسۡ مِن نُّورِكُمۡ قِيلَ ٱرۡجِعُواْ وَرَآءَكُمۡ فَٱلۡتَمِسُواْ نُورٗاۖ فَضُرِبَ بَيۡنَهُم بِسُورٖ لَّهُۥ بَابُۢ بَاطِنُهُۥ فِيهِ ٱلرَّحۡمَةُ وَظَٰهِرُهُۥ مِن قِبَلِهِ ٱلۡعَذَابُ ١٣

जिस दिन मुनाफ़िक़ पुरुष तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियाँ ईमान वालों से कहेंगे कि हमारी प्रतीक्षा करो कि हम तुम्हारे प्रकाश में से कुछ प्रकाश प्राप्त कर लें। कहा जाएगा : अपने पीछे लौट जाओ, फिर कोई प्रकाश तलाश करो।7 फिर उनके बीच एक दीवार बना दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतरी भाग में दया होगी तथा उसके बाहरी भाग की ओर यातना होगी।

يُنَادُونَهُمۡ أَلَمۡ نَكُن مَّعَكُمۡۖ قَالُواْ بَلَىٰ وَلَٰكِنَّكُمۡ فَتَنتُمۡ أَنفُسَكُمۡ وَتَرَبَّصۡتُمۡ وَٱرۡتَبۡتُمۡ وَغَرَّتۡكُمُ ٱلۡأَمَانِيُّ حَتَّىٰ جَآءَ أَمۡرُ ٱللَّهِ وَغَرَّكُم بِٱللَّهِ ٱلۡغَرُورُ ١٤

वे उन्हें पुकारकर कहेंगे : क्या हम तुम्हारे साथ नहीं थे? वे कहेंगे : क्यों नहीं, परंतु तुमने अपने आपको फ़ितने (परीक्षा) में डाला, और तुम प्रतीक्षा8 करते रहे तथा तुमने संदेह किया और (झूठी) इच्छाओं ने तुम्हें धोखा दिया, यहाँ तक कि अल्लाह का आदेश आ गया, और इस धोखेबाज़ ने तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा दिया।

فَٱلۡيَوۡمَ لَا يُؤۡخَذُ مِنكُمۡ فِدۡيَةٞ وَلَا مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۚ مَأۡوَىٰكُمُ ٱلنَّارُۖ هِيَ مَوۡلَىٰكُمۡۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ ١٥

तो आज न तुमसे कोई छुड़ौती ली जाएगी और न उन लोगों से जिन्होंने कुफ़्र किया। तुम्हारा ठिकाना जहन्नम है। वही तुम्हारी दोस्त है और वह बुरा ठिकाना है।

۞ أَلَمۡ يَأۡنِ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَن تَخۡشَعَ قُلُوبُهُمۡ لِذِكۡرِ ٱللَّهِ وَمَا نَزَلَ مِنَ ٱلۡحَقِّ وَلَا يَكُونُواْ كَٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلُ فَطَالَ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَمَدُ فَقَسَتۡ قُلُوبُهُمۡۖ وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ ١٦

क्या उन लोगों के लिए जो ईमान लाए, वह समय नहीं आया कि उनके दिल अल्लाह की याद के लिए और उस सत्य के लिए झुक जाएँ जो उतरा है, और वे उन लोगों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें इससे पहले पुस्तक प्रदान की गई थी, फिर उनपर लंबा समय गुज़र गया, तो उनके दिल कठोर हो गए9 और उनमें बहुत-से लोग अवज्ञाकारी हैं?

ٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يُحۡيِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ قَدۡ بَيَّنَّا لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ ١٧

जान लो कि निःसंदेह अल्लाह धरती को उसके मरने के पश्चात जीवित करता है। निःसंदेह हमने तुम्हारे लिए निशानियाँ खोलकर बयान कर दी हैं, ताकि तुम समझो।

إِنَّ ٱلۡمُصَّدِّقِينَ وَٱلۡمُصَّدِّقَٰتِ وَأَقۡرَضُواْ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا يُضَٰعَفُ لَهُمۡ وَلَهُمۡ أَجۡرٞ كَرِيمٞ ١٨

निःसंदेह दान करने वाले पुरुष तथा दान करने वाली स्त्रियाँ और जिन्होंने अल्लाह को अच्छा ऋण10 दिया, उन्हें कई गुना दिया जाएगा और उनके लिए सम्मानित प्रतिफल है।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦٓ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلصِّدِّيقُونَۖ وَٱلشُّهَدَآءُ عِندَ رَبِّهِمۡ لَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ وَنُورُهُمۡۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ ١٩

तथा जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों11 पर ईमान लाए, वही अपने रब के निकट सिद्दीक़ तथा शहीद12 (गवाही देने वाले) हैं, उन्हीं के लिए उनका प्रतिफल तथा उनका प्रकाश है। और वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वे भड़कती आग में रहने वाले हैं।

ٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا لَعِبٞ وَلَهۡوٞ وَزِينَةٞ وَتَفَاخُرُۢ بَيۡنَكُمۡ وَتَكَاثُرٞ فِي ٱلۡأَمۡوَٰلِ وَٱلۡأَوۡلَٰدِۖ كَمَثَلِ غَيۡثٍ أَعۡجَبَ ٱلۡكُفَّارَ نَبَاتُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَىٰهُ مُصۡفَرّٗا ثُمَّ يَكُونُ حُطَٰمٗاۖ وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِ عَذَابٞ شَدِيدٞ وَمَغۡفِرَةٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرِضۡوَٰنٞۚ وَمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَآ إِلَّا مَتَٰعُ ٱلۡغُرُورِ ٢٠

जान लो कि वास्तव में संसार का जीवन केवल एक खेल है और मनोरंजन है और शोभा13 है, तथा तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना है और धन एवं संतान में एक-दूसरे से बढ़ जाने की कोशिश करना है। उस वर्षा के समान जिससे उगने वाली खेती ने किसानों को प्रसन्न कर दिया, फिर वह पक जाती है, फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली हो गई, फिर वह चूरा हो जाती है। और आख़िरत में कड़ी यातना है और अल्लाह की ओर से बड़ी क्षमा और प्रसन्नता है, और संसार का जीवन धोखे के सामान के सिवा और कुछ नहीं।

سَابِقُوٓاْ إِلَىٰ مَغۡفِرَةٖ مِّن رَّبِّكُمۡ وَجَنَّةٍ عَرۡضُهَا كَعَرۡضِ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ أُعِدَّتۡ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦۚ ذَٰلِكَ فَضۡلُ ٱللَّهِ يُؤۡتِيهِ مَن يَشَآءُۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ ٢١

अपने पालनहार की क्षमा तथा उस जन्नत की ओर एक-दूसरे से आगे बढ़ो, जिसका विस्तार आकाश तथा धरती के विस्तार के समान है, वह उन लोगों के लिए तैयार की गई है, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यह अल्लाह का अनुग्रह है। वह इसे उसको देता है जिसे चाहता है और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।

مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِيٓ أَنفُسِكُمۡ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مِّن قَبۡلِ أَن نَّبۡرَأَهَآۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٞ ٢٢

धरती में तथा तुम्हारे प्राणों पर जो भी विपदा आती है, वह एक किताब में अंकित है, इससे पहले कि हम उसे पैदा करें।14 निश्चय यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है।

لِّكَيۡلَا تَأۡسَوۡاْ عَلَىٰ مَا فَاتَكُمۡ وَلَا تَفۡرَحُواْ بِمَآ ءَاتَىٰكُمۡۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخۡتَالٖ فَخُورٍ ٢٣

ताकि तुम उसपर शोक न करो, जो तुमसे छूट जाए और उसपर फूल न जाओ, जो वह तुम्हें प्रदान करे। और अल्लाह किसी अहंकार करने वाले, बहुत गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।

ٱلَّذِينَ يَبۡخَلُونَ وَيَأۡمُرُونَ ٱلنَّاسَ بِٱلۡبُخۡلِۗ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ ٢٤

वे लोग जो कंजूसी करते हैं और लोगों को कंजूसी करने का आदेश देते हैं। तथा जो मुँह फेर ले, तो निश्चय अल्लाह ही है जो बड़ा बेनियाज़, बहुत प्रशंसनीय है।

لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسُلَنَا بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَأَنزَلۡنَا مَعَهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡمِيزَانَ لِيَقُومَ ٱلنَّاسُ بِٱلۡقِسۡطِۖ وَأَنزَلۡنَا ٱلۡحَدِيدَ فِيهِ بَأۡسٞ شَدِيدٞ وَمَنَٰفِعُ لِلنَّاسِ وَلِيَعۡلَمَ ٱللَّهُ مَن يَنصُرُهُۥ وَرُسُلَهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ إِنَّ ٱللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٞ ٢٥

निःसंदेह हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा तथा उनके साथ पुस्तक और तराज़ू उतारा, ताकि लोग न्याय पर क़ायम रहें। तथा हमने लोहा उतारा, जिसमें बहुत शक्ति15 है और लोगों के लिए बहुत-से लाभ हैं, और ताकि अल्लाह जान ले कि कौन उसकी तथा उसके रसूलों की बिना देखे सहायता करता है। निश्चय ही अल्लाह अति शक्तिशाली, सब पर प्रभुत्वशाली है।

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحٗا وَإِبۡرَٰهِيمَ وَجَعَلۡنَا فِي ذُرِّيَّتِهِمَا ٱلنُّبُوَّةَ وَٱلۡكِتَٰبَۖ فَمِنۡهُم مُّهۡتَدٖۖ وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ ٢٦

और निःसंदेह हमने नूह़ और इबराहीम को (रसूल बनाकर) भेजा, और उन दोनों की संतान में नुबुव्वत तथा पुस्तक रख दी। फिर उनमें से कुछ सीधे मार्ग पर चलने वाले हैं और उनमें से बहुत-से लोग अवज्ञाकारी हैं।

ثُمَّ قَفَّيۡنَا عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِم بِرُسُلِنَا وَقَفَّيۡنَا بِعِيسَى ٱبۡنِ مَرۡيَمَ وَءَاتَيۡنَٰهُ ٱلۡإِنجِيلَۖ وَجَعَلۡنَا فِي قُلُوبِ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ رَأۡفَةٗ وَرَحۡمَةٗۚ وَرَهۡبَانِيَّةً ٱبۡتَدَعُوهَا مَا كَتَبۡنَٰهَا عَلَيۡهِمۡ إِلَّا ٱبۡتِغَآءَ رِضۡوَٰنِ ٱللَّهِ فَمَا رَعَوۡهَا حَقَّ رِعَايَتِهَاۖ فَـَٔاتَيۡنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنۡهُمۡ أَجۡرَهُمۡۖ وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ ٢٧

फिर हमने उनके पद्चिह्नों पर निरंतर अपने रसूल भेजे। और उनके पीछे मरयम के पुत्र ईसा को भेजा, और उसे इंजील प्रदान किया, और हमने उन लोगों के दिलों में जिन्होंने उसका अनुसरण किया नर्मी और मेहरबानी रख दी। रहा संन्यास, तो उन्होंने खुद इसका आविष्कार किया, हमने उसे उनके ऊपर अनिवार्य नहीं किया16 था, परंतु अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए (उन्होंने ऐसा किया)। फिर उन्होंने उसका पूर्ण रूप से पालन नहीं किया। फिर हमने उनमें से जो लोग ईमान लाए उन्हें उनका बदला प्रदान कर दिया और उनमें से बहुत-से लोग अवज्ञाकारी हैं।

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَءَامِنُواْ بِرَسُولِهِۦ يُؤۡتِكُمۡ كِفۡلَيۡنِ مِن رَّحۡمَتِهِۦ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ نُورٗا تَمۡشُونَ بِهِۦ وَيَغۡفِرۡ لَكُمۡۚ وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٢٨

ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ, वह तुम्हें अपनी दया का दोहरा हिस्सा17 प्रदान करेगा। और तुम्हें ऐसा प्रकाश देगा, जिसमें तुम चलोगे। तथा तुम्हें क्षमा कर देगा। और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

لِّئَلَّا يَعۡلَمَ أَهۡلُ ٱلۡكِتَٰبِ أَلَّا يَقۡدِرُونَ عَلَىٰ شَيۡءٖ مِّن فَضۡلِ ٱللَّهِ وَأَنَّ ٱلۡفَضۡلَ بِيَدِ ٱللَّهِ يُؤۡتِيهِ مَن يَشَآءُۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ ٢٩

ताकि अह्ले किताब18 जान लें कि वे अल्लाह के अनुग्रह में से किसी चीज़ पर अधिकार नहीं रखते और यह कि सारा अनुग्रह अल्लाह के हाथ में है। वह जिसे चाहता है, प्रदान करता है और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।

सवाल-जवाब

पारा 27 कहां से शुरू होकर कहां ख़त्म होता है?

पारा 27 सूरह Adh-Dhariyat 51:31 से शुरू होकर सूरह Al-Hadid 57:29 पर ख़त्म होता है।

पारा 27 में कौन सी सूरतें हैं?

पारा 27 में ये सूरतें हैं: Adh-Dhariyat, At-Tur, An-Najm, Al-Qamar, Ar-Rahman, Al-Waqi'ah, Al-Hadid।

पारा क्या है?

पारा (जुज़) क़ुरआन के 30 बराबर हिस्सों में से एक है। रोज़ एक पारा पढ़ने से एक महीने में क़ुरआन पूरा हो जाता है।