فَلَوۡلَآ إِن كُنتُمۡ غَيۡرَ مَدِينِينَ ٨٦
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
तफ़सीर
फिर क्यों नहीं (यदि तुम, अपने दावे के अनुसार, अपने कर्मों का बदला दिए जाने के लिए उठाए जाने वाले नहीं हो)
فَلَوۡلَآ إِن كُنتُمۡ غَيۡرَ مَدِينِينَ ٨٦
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
फिर क्यों नहीं (यदि तुम, अपने दावे के अनुसार, अपने कर्मों का बदला दिए जाने के लिए उठाए जाने वाले नहीं हो)