فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ٣٠
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
तफ़सीर
तो (ऐ मक्का वालो!) ग़ौर करो कि उनके लिए मेरी यातना कैसी थी?! और मेरा उनकी यातना से अन्य लोगों को सावधान करना कैसा था?!
فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ٣٠
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
तो (ऐ मक्का वालो!) ग़ौर करो कि उनके लिए मेरी यातना कैसी थी?! और मेरा उनकी यातना से अन्य लोगों को सावधान करना कैसा था?!