सूरह Adh-Dhariyat الذاريات

अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلذَّٰرِيَٰتِ ذَرۡوٗا ١

क़सम है उन (हवाओं) की जो (धूल आदि) उड़ाने वाली हैं!

فَٱلۡحَٰمِلَٰتِ وِقۡرٗا ٢

फिर पानी का बड़ा भारी बोझ उठाने वाले बादलों की!

فَٱلۡجَٰرِيَٰتِ يُسۡرٗا ٣

फिर आसानी से चलने वाली नावों की!

فَٱلۡمُقَسِّمَٰتِ أَمۡرًا ٤

फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٞ ٥

निःसंदेह जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह सत्य है।1

وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٞ ٦

तथा निःसंदेह हिसाब अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلۡحُبُكِ ٧

क़सम है रास्तों वाले आकाश की!

إِنَّكُمۡ لَفِي قَوۡلٖ مُّخۡتَلِفٖ ٨

निःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात2 में पड़े हो।

يُؤۡفَكُ عَنۡهُ مَنۡ أُفِكَ ٩

उससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।

قُتِلَ ٱلۡخَرَّٰصُونَ ١٠

अटकल लगाने वाले मारे गए।

ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي غَمۡرَةٖ سَاهُونَ ١١

जो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।

يَسۡـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوۡمُ ٱلدِّينِ ١٢

वे पूछते3 हैं कि बदले का दिन कब है?

يَوۡمَ هُمۡ عَلَى ٱلنَّارِ يُفۡتَنُونَ ١٣

जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।

ذُوقُواْ فِتۡنَتَكُمۡ هَٰذَا ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تَسۡتَعۡجِلُونَ ١٤

अपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّٰتٖ وَعُيُونٍ ١٥

निःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।

ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَبۡلَ ذَٰلِكَ مُحۡسِنِينَ ١٦

जो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।

كَانُواْ قَلِيلٗا مِّنَ ٱلَّيۡلِ مَا يَهۡجَعُونَ ١٧

वे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।4

وَبِٱلۡأَسۡحَارِ هُمۡ يَسۡتَغۡفِرُونَ ١٨

तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों5 में वे क्षमा याचना करते थे।

وَفِيٓ أَمۡوَٰلِهِمۡ حَقّٞ لِّلسَّآئِلِ وَٱلۡمَحۡرُومِ ١٩

और उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित6 के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।

وَفِي ٱلۡأَرۡضِ ءَايَٰتٞ لِّلۡمُوقِنِينَ ٢٠

तथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।

وَفِيٓ أَنفُسِكُمۡۚ أَفَلَا تُبۡصِرُونَ ٢١

तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?

وَفِي ٱلسَّمَآءِ رِزۡقُكُمۡ وَمَا تُوعَدُونَ ٢٢

और आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी7 है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।

فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِنَّهُۥ لَحَقّٞ مِّثۡلَ مَآ أَنَّكُمۡ تَنطِقُونَ ٢٣

सो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।8

هَلۡ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيۡفِ إِبۡرَٰهِيمَ ٱلۡمُكۡرَمِينَ ٢٤

क्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?

إِذۡ دَخَلُواْ عَلَيۡهِ فَقَالُواْ سَلَٰمٗاۖ قَالَ سَلَٰمٞ قَوۡمٞ مُّنكَرُونَ ٢٥

जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।

فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجۡلٖ سَمِينٖ ٢٦

फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।

فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيۡهِمۡ قَالَ أَلَا تَأۡكُلُونَ ٢٧

फिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?

فَأَوۡجَسَ مِنۡهُمۡ خِيفَةٗۖ قَالُواْ لَا تَخَفۡۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٖ ٢٨

तो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।

فَأَقۡبَلَتِ ٱمۡرَأَتُهُۥ فِي صَرَّةٖ فَصَكَّتۡ وَجۡهَهَا وَقَالَتۡ عَجُوزٌ عَقِيمٞ ٢٩

यह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!

قَالُواْ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡحَكِيمُ ٱلۡعَلِيمُ ٣٠

उन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।

۞ قَالَ فَمَا خَطۡبُكُمۡ أَيُّهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ ٣١

उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?

قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرۡسِلۡنَآ إِلَىٰ قَوۡمٖ مُّجۡرِمِينَ ٣٢

उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।

لِنُرۡسِلَ عَلَيۡهِمۡ حِجَارَةٗ مِّن طِينٖ ٣٣

ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।

مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلۡمُسۡرِفِينَ ٣٤

जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित9 हैं।

فَأَخۡرَجۡنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٣٥

फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।

فَمَا وَجَدۡنَا فِيهَا غَيۡرَ بَيۡتٖ مِّنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ٣٦

तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर10 के सिवा कोई और नहीं पाया।

وَتَرَكۡنَا فِيهَآ ءَايَةٗ لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ ٣٧

तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।

وَفِي مُوسَىٰٓ إِذۡ أَرۡسَلۡنَٰهُ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ ٣٨

तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।

فَتَوَلَّىٰ بِرُكۡنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ أَوۡ مَجۡنُونٞ ٣٩

तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।

فَأَخَذۡنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٞ ٤٠

अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।

وَفِي عَادٍ إِذۡ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلۡعَقِيمَ ٤١

तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ11 हवा भेजी दी।

مَا تَذَرُ مِن شَيۡءٍ أَتَتۡ عَلَيۡهِ إِلَّا جَعَلَتۡهُ كَٱلرَّمِيمِ ٤٢

वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।

وَفِي ثَمُودَ إِذۡ قِيلَ لَهُمۡ تَمَتَّعُواْ حَتَّىٰ حِينٖ ٤٣

तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।

فَعَتَوۡاْ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِمۡ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَهُمۡ يَنظُرُونَ ٤٤

फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।

فَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ مِن قِيَامٖ وَمَا كَانُواْ مُنتَصِرِينَ ٤٥

फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।

وَقَوۡمَ نُوحٖ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ ٤٦

तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।12

وَٱلسَّمَآءَ بَنَيۡنَٰهَا بِأَيۡيْدٖ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ ٤٧

तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।

وَٱلۡأَرۡضَ فَرَشۡنَٰهَا فَنِعۡمَ ٱلۡمَٰهِدُونَ ٤٨

तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।

وَمِن كُلِّ شَيۡءٍ خَلَقۡنَا زَوۡجَيۡنِ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ ٤٩

तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।

فَفِرُّوٓاْ إِلَى ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞ ٥٠

अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।

وَلَا تَجۡعَلُواْ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞ ٥١

और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।

كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُواْ سَاحِرٌ أَوۡ مَجۡنُونٌ ٥٢

इसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।

أَتَوَاصَوۡاْ بِهِۦۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٞ طَاغُونَ ٥٣

क्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत13 की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।

فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٖ ٥٤

अतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।

وَذَكِّرۡ فَإِنَّ ٱلذِّكۡرَىٰ تَنفَعُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٥٥

तथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।

وَمَا خَلَقۡتُ ٱلۡجِنَّ وَٱلۡإِنسَ إِلَّا لِيَعۡبُدُونِ ٥٦

और मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।

مَآ أُرِيدُ مِنۡهُم مِّن رِّزۡقٖ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطۡعِمُونِ ٥٧

मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।

إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلۡقُوَّةِ ٱلۡمَتِينُ ٥٨

निःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।

فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ ذَنُوبٗا مِّثۡلَ ذَنُوبِ أَصۡحَٰبِهِمۡ فَلَا يَسۡتَعۡجِلُونِ ٥٩

अतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।

فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن يَوۡمِهِمُ ٱلَّذِي يُوعَدُونَ ٦٠

अतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन14 से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।

फ़ुटनोट के नंबर आयत के पेज पर ले जाते हैं, जहां अनुवादक के नोट्स दिए गए हैं।

मशहूर आयतें

सवाल-जवाब

सूरह Adh-Dhariyat में कितनी आयतें हैं?

सूरह Adh-Dhariyat में 60 आयतें हैं। यह क़ुरआन की सूरह नंबर 51 है।

सूरह Adh-Dhariyat मक्की है या मदनी?

सूरह Adh-Dhariyat एक मक्की सूरह है।

सूरह Adh-Dhariyat किस पारे में है?

सूरह Adh-Dhariyat पारा 26, 27 में है।

क्या मैं सूरह Adh-Dhariyat सुन सकता हूं?

हां। इस पेज के ऊपर चलाएं दबाएं, या किसी भी आयत से शुरू करें। Qabas ऐप में आप इसे ऑफ़लाइन सुनने के लिए डाउनलोड भी कर सकते हैं।