وَٱلضُّحَىٰ ١
कस़म है धूप चढ़ने के समय की!
अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلضُّحَىٰ ١
कस़म है धूप चढ़ने के समय की!
وَٱلَّيۡلِ إِذَا سَجَىٰ ٢
और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ٣
(ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।
وَلَلۡأٓخِرَةُ خَيۡرٞ لَّكَ مِنَ ٱلۡأُولَىٰ ٤
और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।
وَلَسَوۡفَ يُعۡطِيكَ رَبُّكَ فَتَرۡضَىٰٓ ٥
और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।
أَلَمۡ يَجِدۡكَ يَتِيمٗا فَـَٔاوَىٰ ٦
क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?
وَوَجَدَكَ ضَآلّٗا فَهَدَىٰ ٧
और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।
وَوَجَدَكَ عَآئِلٗا فَأَغۡنَىٰ ٨
और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।
فَأَمَّا ٱلۡيَتِيمَ فَلَا تَقۡهَرۡ ٩
अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।1
وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنۡهَرۡ ١٠
और माँगने वाले को न झिड़कें।
وَأَمَّا بِنِعۡمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثۡ ١١
और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।2
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सूरह Ad-Duha में 11 आयतें हैं। यह क़ुरआन की सूरह नंबर 93 है।
सूरह Ad-Duha एक मक्की सूरह है।
सूरह Ad-Duha पारा 30 में है।
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