सूरह Ad-Duha, आयत 2

93:2

وَٱلَّيۡلِ إِذَا سَجَىٰ ٢

और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।

तफ़सीर

और रात की क़सम खाई है, जब वह अंधेरी हो जाए और लोग उसमें काम-काज (गति) से रुक जाएँ।