فَأَمَّا ٱلۡيَتِيمَ فَلَا تَقۡهَرۡ ٩
अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।1
फ़ुटनोट
1 (1-9) इन आयतों में अल्लाह ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से फरमाया है कि तुम्हें यह चिंता कैसे हो गई है कि हम अप्रसन्न हो गए? हमने तो तुम्हारे जन्म के दिन से निरंतर तुमपर उपकार किए हैं। तुम अनाथ थे, तो तुम्हारे पालन और रक्षा की व्यवस्था की। राह से अंजान थे, तो राह दिखाई। निर्धन थे, तो धनी बना दिया। ये बातें बता रही हैं कि तुम आरंभ ही से हमारे प्रियवर हो और तुमपर हमारा उपकार निरंतर रहा है।
तफ़सीर
अतः आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार और उसका अपमान न करें जिसने बचपन में अपने पिता को खो दिया है।