وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيۡتُونِ ١
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيۡتُونِ ١
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
وَطُورِ سِينِينَ ٢
एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!
وَهَٰذَا ٱلۡبَلَدِ ٱلۡأَمِينِ ٣
और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!
لَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ فِيٓ أَحۡسَنِ تَقۡوِيمٖ ٤
निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।
ثُمَّ رَدَدۡنَٰهُ أَسۡفَلَ سَٰفِلِينَ ٥
फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَلَهُمۡ أَجۡرٌ غَيۡرُ مَمۡنُونٖ ٦
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعۡدُ بِٱلدِّينِ ٧
फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?
أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَحۡكَمِ ٱلۡحَٰكِمِينَ ٨
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?
सूरह At-Tin में 8 आयतें हैं। यह क़ुरआन की सूरह नंबर 95 है।
सूरह At-Tin एक मक्की सूरह है।
सूरह At-Tin पारा 30 में है।
हां। इस पेज के ऊपर चलाएं दबाएं, या किसी भी आयत से शुरू करें। Qabas ऐप में आप इसे ऑफ़लाइन सुनने के लिए डाउनलोड भी कर सकते हैं।