सूरह कहफ़ की आख़िरी दस आयतें

अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari

ٱلَّذِينَ كَانَتۡ أَعۡيُنُهُمۡ فِي غِطَآءٍ عَن ذِكۡرِي وَكَانُواْ لَا يَسۡتَطِيعُونَ سَمۡعًا ١٠١

जिनकी आँखें मेरी याद से पर्दे में थीं और वे सुन ही नहीं सकते थे।

तफ़सीर

हम उसे उन काफ़िरों के लिए प्रकट करेंगे, जो संसार में अल्लाह के स्मरण से अंधे थे, क्योंकि उनकी आँखों पर अल्लाह की याद से रोकने वाला पर्दा पड़ा था और वे अल्लाह की आयतों को इस तरह सुनने में सक्षम नहीं थे कि उन्हें स्वीकार कर लें।

أَفَحَسِبَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَن يَتَّخِذُواْ عِبَادِي مِن دُونِيٓ أَوۡلِيَآءَۚ إِنَّآ أَعۡتَدۡنَا جَهَنَّمَ لِلۡكَٰفِرِينَ نُزُلٗا ١٠٢

तो क्या जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्होंने यह सोचा है कि वे मुझे छोड़कर मेरे बंदों को सहायक बना लेंगे? निःसंदेह हमने जहन्नम को काफिरों के लिए आतिथ्य के रूप में तैयार कर रखा है।

तफ़सीर

क्या अल्लाह पर विश्वास न रखने वालों ने समझ रखा है कि वे मुझे छोड़कर मेरे बंदों; फ़रिश्तों, रसूलों और शैतानों को पूज्य बना लेंगे?! निःसंदेह हमने जहन्नम को विश्वास न रखने वालों के लिए ठिकाने के रूप में तैयार कर रखा है।

قُلۡ هَلۡ نُنَبِّئُكُم بِٱلۡأَخۡسَرِينَ أَعۡمَٰلًا ١٠٣

आप कह दें : क्या हम तुम्हें उन लोगों के बारे में बताएँ जो कर्मों में सबसे अधिक घाटा वाले हैं?

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : क्या हम (ऐ लोगो!) तुम्हें उन लोगों के बारे में बताएँ जो अपने कर्म की दृष्टि से सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैंॽ

ٱلَّذِينَ ضَلَّ سَعۡيُهُمۡ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَهُمۡ يَحۡسَبُونَ أَنَّهُمۡ يُحۡسِنُونَ صُنۡعًا ١٠٤

वे लोग जिनका प्रयास संसार के जीवन में व्यर्थ हो गया है और वे सोचते हैं कि निःसंदेह वे एक अच्छा काम कर रहे हैं।

तफ़सीर

वे लोग जो क़ियामत के दिन यह देखेंगे कि वे दुनिया में जो प्रयास कर रहे थे, वह बेकार हो गया। जबकि वे समझते हैं कि वे अच्छी कोशिश कर रहे हैं और वे अपने कर्मों से लाभान्वित होंगे, हालाँकि वास्तविकता इसके विपरीत है।

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ وَلِقَآئِهِۦ فَحَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ فَلَا نُقِيمُ لَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَزۡنٗا ١٠٥

यही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की आयतों और उससे मिलन का इनकार किया। तो उनके कर्म बेकार हो गए, अतः हम क़ियामत के दिन उनके लिए कोई वज़न नहीं रखेंगे।35

फ़ुटनोट

35 अर्थात उनका हमारे यहाँ कोई भार न होगा। ह़दीस में आया है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : क़ियामत के दिन एक भारी भरकम व्यक्ति आएगा। मगर अल्लाह के सदन में उसका भार मच्छर के पंख के बराबर भी नहीं होगा। फिर आपने इसी आयत को पढ़ा। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4729)

तफ़सीर

यही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की उन आयतों का इनकार किया, जो उसके एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं और उससे मिलने का इनकार किया। अतः उनके इस इनकार के कारण उनके सारे कर्म बेकार हो गए। इसलिए, क़ियामत के दिन अल्लाह के निकट उनका कोई मान नहीं होगा।

ذَٰلِكَ جَزَآؤُهُمۡ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُواْ وَٱتَّخَذُوٓاْ ءَايَٰتِي وَرُسُلِي هُزُوًا ١٠٦

यह उनका बदला नरक है, इस कारण कि उन्होंने कुफ़्र किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों का मज़ाक उड़ाया।

तफ़सीर

वह बदला जो उनके लिए तैयार किया गया है, जहन्नम है। क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, तथा मेरी उतारी हुई आयतों और मेरे रसूलों का उपहास किया।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ كَانَتۡ لَهُمۡ جَنَّٰتُ ٱلۡفِرۡدَوۡسِ نُزُلًا ١٠٧

निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके आतिथ्य के लिए फ़िरदौस36 के बाग़ होंगे।

फ़ुटनोट

36 फ़िरदौस, स्वर्ग के सर्वोच्च स्थान का नाम है। (सह़ीह़ बुख़ारी : 7423)

तफ़सीर

निश्चय जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उन्हें उनके सम्मान स्वरूप जन्नत का सर्वोच्च स्थान प्राप्त होगा।

خَٰلِدِينَ فِيهَا لَا يَبۡغُونَ عَنۡهَا حِوَلٗا ١٠٨

उनमें हमेशा रहने वाले होंगे, वे उससे स्थान बदलना नहीं चाहेंगे।

तफ़सीर

जिसमें वे सदैव रहेंगे, वहाँ से स्थानांतरित होना नहीं चाहेंगे, क्योंकि उसके बराबर का कोई प्रतिफल नहीं होगा।

قُل لَّوۡ كَانَ ٱلۡبَحۡرُ مِدَادٗا لِّكَلِمَٰتِ رَبِّي لَنَفِدَ ٱلۡبَحۡرُ قَبۡلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَٰتُ رَبِّي وَلَوۡ جِئۡنَا بِمِثۡلِهِۦ مَدَدٗا ١٠٩

(ऐ नबी!) आप कह दें : यदि सागर मेरे पालनहार की बातें लिखने के लिए स्याही बन जाए, तो निश्चय सागर समाप्त हो जाएगा इससे पहले कि मेरे पालनहार की बातें समाप्त हों, यद्यपि हम उसके बराबर और स्याही ले आएँ।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : मेरे पालनहार की बातें बहुत ज़्यादा हैं। अतः यदि उन्हें लिखने के लिए समुद्र स्याही बन जाए, तो पवित्र अल्लाह की बातें समाप्त होने से पहले ही समुद्र का पानी समाप्त हो जाएगा। बल्कि यदि हम और भी समुद्र ले आएँ, तो वे भी समाप्त हो जाएँगे।

قُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُوحَىٰٓ إِلَيَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ فَمَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلۡيَعۡمَلۡ عَمَلٗا صَٰلِحٗا وَلَا يُشۡرِكۡ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦٓ أَحَدَۢا ١١٠

आप कह दे : मैं तो तुम्हारे जैसा ही एक मनुष्य हूँ, मेरी ओर प्रकाशना (वह़्य) की जाती है कि तुम्हारा पूज्य केवल एक ही पूज्य है। अतः जो कोई अपने पालनहार से मिलने की आशा रखता हो, उसके लिए आवश्यक है कि वह अच्छे कर्म करे और अपने पालनहार की इबादत में किसी को साझी न बनाए।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : मैं तो तुम्हारे ही जैसा एक मनुष्य हूँ। मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है कि तुम्हारा वास्तविक पूज्य बस एक ही है, उसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। अतः जो अपने रब से मिलने का भय रखता हो, वह अपने पालनहार के प्रति निष्ठावान होकर उसकी शरीयत के अनुसार कार्य करे और अपने पालनहार की उपासना में किसी को साझी न बनाए।

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सवाल-जवाब

सूरह कहफ़ की आख़िरी दस आयतें क़ुरआन में कहां है?

सूरह कहफ़ की आख़िरी दस आयतें सूरह Al-Kahf, 18:101-110 में है।