إِنَّ فِي خَلۡقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَٱخۡتِلَٰفِ ٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ لَأٓيَٰتٖ لِّأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ ١٩٠
निःसंदेह आसमानों और ज़मीन की रचना तथा रात और दिन के आने-जाने में, बुद्धिमानों के लिए निशानियाँ हैं।115
फ़ुटनोट
115 अर्थात अल्लाह के राज्य, स्वामित्व तथा एकमात्र पूज्य होने की।
तफ़सीर
निःसंदेह आकाशों तथा धरती को बिना किसी पूर्व नमूने के अनस्तित्व से अस्तित्व में लाने में तथा रात और दिन के एक दूसरे के पीछे आने-जाने और उन दोनों के लंबे और छोटे होने के एतिबार से एक दूसरे से भिन्न होने में; शुद्ध बुद्धि वालों के लिए स्पष्ट निशानियाँ हैं, जो उन्हें ब्रह्मांड के निर्माता का संकेत देती हैं, जो अकेले इबादत का अधिकार रखता है।
ٱلَّذِينَ يَذۡكُرُونَ ٱللَّهَ قِيَٰمٗا وَقُعُودٗا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمۡ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلۡقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ رَبَّنَا مَا خَلَقۡتَ هَٰذَا بَٰطِلٗا سُبۡحَٰنَكَ فَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ ١٩١
जो खड़े और बैठे और अपनी करवटों पर लेटे हुए अल्लाह को याद करते हैं तथा आसमानों और ज़मीन की रचना में सोच-विचार करते हैं। (वे कहते हैं :) ऐ हमारे पालनहार! तूने यह सब कुछ बेकार116 नहीं रचा है। अतः हमें आग के अज़ाब से बचा ले।
फ़ुटनोट
116 अर्थात यह विचित्र रचना तथा व्यवस्था अकारण नहीं, तथा आवश्यक है कि इस जीवन के पश्चात भी कोई जीवन हो जिसमें इस जीवन के कर्मों के परिणाम सामने आएँ।
तफ़सीर
ये वही लोग हैं जो खड़े, बैठे और लेटे, हर स्थिति में अल्लाह को याद करते हैं तथा आकाश और धरती की रचना में चिंतन करते हैं और कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! तूने इतनी बड़ी सृष्टि को व्यर्थ नहीं बनाया है। तू बिना उद्देश्य कार्य करने से पवित्र है। अतः तू हमें नेकियों की तौफ़ीक़ देकर और बुराइयों से सुरक्षितकर आग के अज़ाब से बचा ले।
رَبَّنَآ إِنَّكَ مَن تُدۡخِلِ ٱلنَّارَ فَقَدۡ أَخۡزَيۡتَهُۥۖ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنۡ أَنصَارٖ ١٩٢
ऐ हमारे पालनहार! तूने जिसे नरक में डाल दिया, तो वास्तव में तूने उसे अपमानित कर दिया। और ज़ालिमों का कोई सहायक नहीं।
तफ़सीर
(ऐ हमारे पालनहार) तूने अपनी सृष्टि में से जिसे जहन्नम में डाल दिया, तो वास्तव में उसे तूने अपमानित किया। और क़यामत के दिन अत्याचारियों का कोई सहायक न होगा, जो उनसे अल्लाह के अज़ाब और उसकी सज़ा को टाल सके।
رَّبَّنَآ إِنَّنَا سَمِعۡنَا مُنَادِيٗا يُنَادِي لِلۡإِيمَٰنِ أَنۡ ءَامِنُواْ بِرَبِّكُمۡ فَـَٔامَنَّاۚ رَبَّنَا فَٱغۡفِرۡ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرۡ عَنَّا سَيِّـَٔاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ ٱلۡأَبۡرَارِ ١٩٣
ऐ हमारे पालनहार! हमने एक पुकारने वाले117 को ईमान की ओर बुलाते हुए सुना कि अपने पालनहार पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे पालनहार! तो अब तू हमारे पापों को क्षमा कर दे तथा हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें सदाचारियों के साथ मृत्यु दे।
फ़ुटनोट
117 अर्थात अंतिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को।
तफ़सीर
ऐ हमारे पालनहार! हमने एक ईमान की ओर बुलाने वाले को सुना – और वह तेरे पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं - जो यह कहकर बुला रहे थे : (लोगो,) तुम अपने पालनहार अल्लाह पर ईमान लाओ, जो कि एकमात्र पूज्य है। तो हम उसपर ईमान ले आए जिसकी ओर वह बुला रहे थे और उनकी शरीयत का पालन किया। अतः तू हमारे पापों को छिपाए रख और हमें बेनकाब न कर, तथा हमारी बुराइयों को क्षमा कर दे और उनपर हमारी पकड़ न कर, और हमें अच्छे कार्यों के करने और बुराइयों को छोड़ने की तौफीक़ देकर हमें सदाचारी लोगों के साथ मृत्यु दे।
رَبَّنَا وَءَاتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخۡزِنَا يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۖ إِنَّكَ لَا تُخۡلِفُ ٱلۡمِيعَادَ ١٩٤
ऐ हमारे पालनहार! और हमें वह चीज़ प्रदान कर जिसका तूने अपने रसूलों के द्वारा हमसे वादा किया है तथा क़यामत के दिन हमें अपमानित न कर। वास्तव में तू अपने वादे के विरुद्ध नहीं करता है।
तफ़सीर
ऐ हमारे पालनहार! तूने अपने रसूलों की ज़बानी इस दुनिया में जिस मार्गदर्शन और मदद व विजय का हम से वादा किया था, वह हमें प्रदान कर और क़यामत के दिन जहन्नम में डालकर हमें अपमानित न कर। ऐ हमारे पालनहार! वास्तव में तू बड़ा उदार है, अपना वचन नहीं तोड़ता।
فَٱسۡتَجَابَ لَهُمۡ رَبُّهُمۡ أَنِّي لَآ أُضِيعُ عَمَلَ عَٰمِلٖ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰۖ بَعۡضُكُم مِّنۢ بَعۡضٖۖ فَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ وَأُخۡرِجُواْ مِن دِيَٰرِهِمۡ وَأُوذُواْ فِي سَبِيلِي وَقَٰتَلُواْ وَقُتِلُواْ لَأُكَفِّرَنَّ عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَأُدۡخِلَنَّهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ ثَوَابٗا مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِۚ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسۡنُ ٱلثَّوَابِ ١٩٥
तो उनके पालनहार ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली (और फरमाया) कि मैं किसी नेकी करने वाले की नेकी को नष्ट नहीं करता118, चाहे वह नर हो या नारी। तुम सब आपस में एक-दूसरे से हो। अतः जिन लोगों ने हिजरत की और अपने घरों से निकाले गए और मेरे मार्ग में सताए गए और उन्होंने जिहाद किया और शहीद किए गए, मैं अवश्य उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर दूँगा और अवश्य ही उन्हें ऐसे बागों में दाख़िल करूँगा, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं। यह अल्लाह के पास से उनका बदला होगा और अल्लाह ही के पास सबसे अच्छा बदला है।
फ़ुटनोट
118 अर्थात अल्लाह का यह नियम है कि वह सत्कर्म अकारथ नहीं करता, उसका प्रतिफल अवश्य देता है।
तफ़सीर
उनके पालनहार ने उनकी प्रार्थना का उत्तर दिया : मैं तुम्हारे कर्मों का बदला बर्बाद नहीं करता, चाहे वह कम हो या ज़्यादा और कार्य करने वाला पुरुष हो या महिला। क्योंकि इस धर्म में तुम सब लोगों का हुक्म एक है। न तो किसी पुरुष की नेकी में वृद्धि की जाएगी और न तो किसी महिला की नेकी में कमी की जाएगी। अतः जिन लोगों ने अल्लाह के रास्ते में हिजरत की, और काफ़िरों ने उन्हें उनके घरों से निकाल दिया, और उन्हें अपने पालनहार के आज्ञापालन के कारण कष्ट दिया गया, और उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ाई की और अल्लाह के शब्द (वचन) को सर्वोच्च करने के लिए शहीद कर दिए गए, तो मैं क़यामत के दिन अवश्य उनकी बुराइयों को क्षमा कर दूँगा और उन्हें नज़रंदाज़ कर दूँगा, और उन्हें अवश्य ऐसी जन्नतों में दाख़िल करूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। यह अल्लाह की ओर से बदला होगा। और अल्लाह के पास ऐसा उत्तम बदला है जिसका कोई उदाहरण नहीं।
لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فِي ٱلۡبِلَٰدِ ١٩٦
(ऐ नबी!) नगरों में काफ़िरों का (सुविधा के साथ) चलना-फिरना आपको धोखे में न डाले।
तफ़सीर
(ऐ नबी) शहर में काफिरों का चलना-फिरना और उसमें उनका आधिपत्य, तथा उनके व्यापार और आजीविका का विस्तार आपको धोखे में न डाल दे कि उनकी स्थिति को देखकर आप शोक और चिंता से ग्रस्त हो जाएँ।
مَتَٰعٞ قَلِيلٞ ثُمَّ مَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمِهَادُ ١٩٧
यह थोड़ी-सी सुख-सामग्री119 है, फिर उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा ठिकाना है!
फ़ुटनोट
119 अर्थात सामयिक सांसारिक आनंद है।
तफ़सीर
यह दुनिया दरअसल थोड़ी सी सुख-सामग्री है, जिसे स्थायित्व प्राप्त नहीं है। फिर उसके बाद उनका ठिकाना जहाँ वे क़यामत के दिन लौटकर जाएँगे : जहन्नम है। और आग उनके लिए बहुत बुरा ठिकाना है।
لَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ لَهُمۡ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا نُزُلٗا مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِۗ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ خَيۡرٞ لِّلۡأَبۡرَارِ ١٩٨
परन्तु जो लोग अपने पालनहार से डरते रहे, उनके लिए ऐसी जन्नतें हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं। वे उनमें हमेशा रहेंगे। यह अल्लाह के पास से अतिथि सत्कार होगा। तथा जो कुछ अल्लाह के पास है, वह नेक लोगों के लिए सबसे अच्छा है।
तफ़सीर
परन्तु जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहे, उनके लिए ऐसी जन्नतें हैं, जिनके महलों के नीचे से नहरें बह रही हैं, जिनमें वे सदैव रहेंगे। यह अल्लाह के पास से तैयार किया हुआ बदला है। और अल्लाह ने अपने सदाचारी बंदों के लिए जो कुछ तैयार कर रखा है, वह दुनिया की उन सुख-सामग्रियों से उत्तम और श्रेष्ठ है, जिनका काफ़िर लोग आनंद ले रहे हैं।
وَإِنَّ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ لَمَن يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُمۡ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِمۡ خَٰشِعِينَ لِلَّهِ لَا يَشۡتَرُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ ثَمَنٗا قَلِيلًاۚ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ عِندَ رَبِّهِمۡۗ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ ١٩٩
और निःसंदेह किताब वालों (यहूदियों और ईसाइयों) में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, तथा जो कुछ तुम्हारी ओर उतारा गया और जो स्वयं उनकी ओर उतारा गया है, उसपर भी ईमान रखते हैं। वे अल्लाह के सामने विनम्र रहने वाले हैं। और उसकी आयतों को थोड़ी क़ीमत पर बेचते नहीं हैं।120 उनका बदला उनके रब के पास है। निःसंदेह अल्लाह जल्द ही हिसाब लेने वाला है।
फ़ुटनोट
120 अर्थात यह यहूदियों और ईसाइयों का दूसरा समुदाय है, जो अल्लाह पर और उसकी किताबों पर सह़ीह़ प्रकार से ईमान रखता था। और सत्य को स्वीकार करता था। तथा इस्लाम और रसूल तथा मुसलमानों के विरुद्ध साज़िशें नहीं करता था। और चंद टकों के कारण अल्लाह के आदेशों में हेर-फेर नहीं करता था।
तफ़सीर
सभी अह्ले किताब एक समान नहीं हैं। उनमें से एक गिरोह ऐसा भी है, जो अल्लाह पर और तुम्हारी ओर उतारी गई हिदायत एवं सत्य पर ईमान रखते हैं, तथा उस पर भी ईमान रखते हैं जो कुछ उनकी पुस्तकों में उतारा गया है। वे अल्लाह के रसूलों के बीच कोई अंतर नहीं करते हैं। वे अल्लाह के आगे, उसके पास जो कुछ (प्रतिफल) है उसकी इच्छा में, समर्पित और विनम्र रहते हैं। वे अल्लाह की आयतों के बदले इस दुनिया की सामग्री का थोड़ा-सा मूल्य नहीं लेते हैं। इन गुणों से विशिष्ट इन लोगों के लिए उनके पालनहार के पास बहुत बड़ा बदला है। निःसंदेह अल्लाह कर्मों का शीघ्र हिसाब लेने वाला और उनपर शीघ्र बदला देने वाला है।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱصۡبِرُواْ وَصَابِرُواْ وَرَابِطُواْ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ ٢٠٠
ऐ ईमान वालो! तुम धैर्य से काम लो121 और (अपने दुश्मन की तुलना में) अधिक धैर्य दिखाओ, तथा जिहाद के लिए तैयार रहो और अल्लाह से डरते रहो, ताकि तुम सफल हो सको।
फ़ुटनोट
121 अर्थात अल्लाह और उसके रसूल की फ़रमाँबरदारी करके और अपनी मनमानी छोड़कर धैर्य करो। और यदि शत्रु से लड़ाई हो जाए तो उसमें सामने आने वाली परेशानियों पर डटे रहना बहुत बड़ा धैर्य है। इसी प्रकार शत्रु के बारे में सदैव चौकन्ना रहना भी बहुत बड़े साहस का काम है। इसीलिए ह़दीस में आया है कि अल्लाह के रास्ते में एक दिन मोर्चे बंद रहना इस दुनिया और इसकी तमाम चीज़ों से उत्तम है। (सह़ीह़ बुख़ारी)
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुम शरीयत के आदेशों की पाबंदी करने पर तथा अपने ऊपर आनेवाली दुनिया की आपदाओं पर धैर्य से काम लो, तथा धैर्य के मामले में काफिरों से आगे रहो, चुनाँचे वे तुमसे अधिक धैर्य रखने वाले न होने पाएँ, और अल्लाह के रास्ते में जिहाद पर डटे रहो, और अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहो, ताकि तुम्हें आग से मुक्ति और जन्नत में प्रवेश के द्वारा अपना उद्देश्य प्राप्त हो जाए।