يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱصۡبِرُواْ وَصَابِرُواْ وَرَابِطُواْ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ ٢٠٠
ऐ ईमान वालो! तुम धैर्य से काम लो121 और (अपने दुश्मन की तुलना में) अधिक धैर्य दिखाओ, तथा जिहाद के लिए तैयार रहो और अल्लाह से डरते रहो, ताकि तुम सफल हो सको।
फ़ुटनोट
121 अर्थात अल्लाह और उसके रसूल की फ़रमाँबरदारी करके और अपनी मनमानी छोड़कर धैर्य करो। और यदि शत्रु से लड़ाई हो जाए तो उसमें सामने आने वाली परेशानियों पर डटे रहना बहुत बड़ा धैर्य है। इसी प्रकार शत्रु के बारे में सदैव चौकन्ना रहना भी बहुत बड़े साहस का काम है। इसीलिए ह़दीस में आया है कि अल्लाह के रास्ते में एक दिन मोर्चे बंद रहना इस दुनिया और इसकी तमाम चीज़ों से उत्तम है। (सह़ीह़ बुख़ारी)
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुम शरीयत के आदेशों की पाबंदी करने पर तथा अपने ऊपर आनेवाली दुनिया की आपदाओं पर धैर्य से काम लो, तथा धैर्य के मामले में काफिरों से आगे रहो, चुनाँचे वे तुमसे अधिक धैर्य रखने वाले न होने पाएँ, और अल्लाह के रास्ते में जिहाद पर डटे रहो, और अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहो, ताकि तुम्हें आग से मुक्ति और जन्नत में प्रवेश के द्वारा अपना उद्देश्य प्राप्त हो जाए।