सूरह Al-Imran, आयत 165

3:165

أَوَلَمَّآ أَصَٰبَتۡكُم مُّصِيبَةٞ قَدۡ أَصَبۡتُم مِّثۡلَيۡهَا قُلۡتُمۡ أَنَّىٰ هَٰذَاۖ قُلۡ هُوَ مِنۡ عِندِ أَنفُسِكُمۡۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ١٦٥

क्या जब तुम्हें एक ऐसी विपत्ति90 पहुँची, जिसकी दोगुनी विपत्ति तुम (काफ़िरों को) पहुँचा91 चुके थे, तो तुम कहने लगे कि : यह कहाँ से आ गई? (ऐ नबी!) कह दीजिए : यह तुम्हारे ही पास से92 आई है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

फ़ुटनोट

90 अर्थात उह़ुद के दिन।

91 अर्थात बद्र के दिन।

92 अर्थात तुम्हारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उस आदेश का विरोध करने के कारण आई, जो धनुर्धरों को दिया गया था।

तफ़सीर

क्या (ऐ ईमान वालो) जब तुम्हें उहुद के दिन पराजित होने के समय एक विपत्ति का सामना करना पड़ा और तुममें से कुछ लोग शहीद हो गए, जबकि तुमने बद्र के युद्ध में अपने शत्रुओं के इसके दोगुना लोगों को क़त्ल किया था और बंदी बनाया था, तो तुम कहने लगे : हमें यह विपत्ति कहाँ से पहुँच गई, जबकि हम ईमान वाले हैं और अल्लाह के नबी हमारे बीच उपस्थित हैं? (ऐ नबी) आप कह दीजिए : यह विपत्ति जो तुम्हें पहुँची है, वह तुम्हारे ही कारण से आई है जब तुमने आपस में विवाद किया और रसूल की अवज्ञा की। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर शक्तिमान है। अतः वह जिसकी चाहे सहायता करे और जिसे चाहे असहाय छोड़ दे।