सूरह Al-Imran, आयत 166

3:166

وَمَآ أَصَٰبَكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡتَقَى ٱلۡجَمۡعَانِ فَبِإِذۡنِ ٱللَّهِ وَلِيَعۡلَمَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ١٦٦

और दोनों गिरोहों के मुठभेड़ के दिन जो विपत्ति तुम्हें पहुँची है, वह अल्लाह के आदेश से पहुँची है। और ताकि वह (अल्लाह) ईमान वालों को (अच्छी तरह) जान ले।

तफ़सीर

और उहुद के दिन तुम्हारे गिरोह और मुश्रिकों के गिरोह के बीच मुठभेड़ के समय तुम्हें जिस पराजय का सामना करना पड़ा, और तुममें से कुछ लोग घायल और कुछ लोग शहीद कर दिए गए, यह सब अल्लाह की अनुमति और उसके फ़ैसले (क़ज़ा व क़दर) के अनुसार था; जिसमें एक बड़ी हिकमत यह निहित थी कि सच्चे ईमान वाले प्रत्यक्ष हो जाएँ।