नमाज़ कैसे पढ़ें

पाठ 2 / 3

मैं नमाज़ कैसे पढ़ूँ?

क़ुरआन से

قَدۡ نَرَىٰ تَقَلُّبَ وَجۡهِكَ فِي ٱلسَّمَآءِۖ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبۡلَةٗ تَرۡضَىٰهَاۚ فَوَلِّ وَجۡهَكَ شَطۡرَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۚ وَحَيۡثُ مَا كُنتُمۡ فَوَلُّواْ وُجُوهَكُمۡ شَطۡرَهُۥۗ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ لَيَعۡلَمُونَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّهِمۡۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ ﴿١٤٤﴾

निश्चय (ऐ नबी!) हम आपके चेहरे का बार-बार आकाश की ओर उठना देख रहे हैं। तो निश्चय हम आपको उस क़िबले की ओर अवश्य फेर देंगे, जिसे आप पसंद करते हैं। तो (अब) अपना चेहरा मस्जिदे ह़राम की ओर फेर लें, तथा तुम जहाँ भी हो, तो अपने चेहरे उसी की ओर फेर लो। निःसंदेह वे लोग जिन्हें किताब दी गई है निश्चय जानते हैं कि निःसंदेह उनके पालनहार की ओर से यही सत्य है और अल्लाह उससे हरगिज़ ग़ाफ़िल नहीं जो वे कर रहे हैं।

Al-Baqarah 2:144क़ुरआन में पढ़ें

حَٰفِظُواْ عَلَى ٱلصَّلَوَٰتِ وَٱلصَّلَوٰةِ ٱلۡوُسۡطَىٰ وَقُومُواْ لِلَّهِ قَٰنِتِينَ ﴿٢٣٨﴾

सब नमाज़ों का और (विशेषकर) बीच की नमाज़ (अस्र) का ध्यान रखो तथा अल्लाह के लिए आज्ञाकारी होकर (विनयपूर्वक) खड़े रहो।

Al-Baqarah 2:238क़ुरआन में पढ़ें

सुन्नत से

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मस्जिद में दाखिल हुए। इसी बीच एक आदमी ने मस्जिद में प्रवेश किया, नमाज़ पढ़ी और नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर सलाम किया, तो आपने उसके सलाम का जवाब दिया और फ़रमाया : "वापस जाकर फिर से नमाज़ पढ़ो, क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं।" चुनांचे वह वापस गया, पहले ही की तरह दोबारा नमाज़ पढ़ी और नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर सलाम किया। दोबारा आपने कहा : "वापस जाकर फिर से नमाज़ पढ़ो, क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं।" (ऐसा तीन बार हुआ।) अंततः उसने कहा : उस अल्लाह की क़सम जिसने आपको सत्य के साथ भेजा है, मुझे इससे अच्छी नमाज़ नहीं आती! अतः मुझे सिखा दीजिए। इसपर आपने कहा : "जब तुम नमाज़ के लिए खड़े हो, तो 'अल्लाहु अकबर' कहो। फिर जितना हो सके, कुरआन पढ़ो। फिर इतमीनान के साथ रुकू करो। फिर उठो और संतुलित होकर खड़े हो जाओ। फिर इतमीनान के साथ सजदा करो। फिर उठो और इतमीनान से बैठो। और ऐसा अपनी पूरी नमाज़ में करो।"

इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है स़ह़ीह़ HadeethEnc.com
व्याख्या

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मस्जिद में दाख़िल हुए। आपके बाद एक व्यक्ति दाख़िल हुआ और जल्दी-जल्दी दो रकात नमाज़ पढ़ ली। न कियाम इत्मीनान से किया, न रुकू और न सजदा। अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उसे नमाज़ पढ़ते हुए देख रहे थे। आप उस समय मस्जिद के एक किनारे में बैठे हुए थे। वह व्यक्ति आपके पास आया और सलाम किया, तो आपने सलाम का जवाब देने के बाद फ़रमाया : वापस जाओ और दोबारा नमाज़ पढ़ो, क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं है। वह वापस गया, पहले ही की तरह दोबारा जल्दी-जल्दी नमाज़ पढ़ी, वापस आया और आपको सलाम किया, तो आपने कहा : तुम वापस जाओ और दोबारा नमाज़ पढ़ो। क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं है। आपने ऐसा तीन बार किया। तब उस व्यक्ति ने कहा : उस अल्लाह की क़सम जिसने आपको सत्य के साथ भेजा है, मुझे इससे बेहतर नमाज़ पढ़ना नहीं आता। अतः आप मुझे नमाज़ सिखा दें। तब आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उससे कहा : जब नमाज़ के लिए खड़े हो जाओ, तो तकबीर-ए-तहरीमा कहो, फिर फ़ातिहा और जो अल्लाह चाहे पढ़ो, फिर इस तरह इत्मीनान से रुकू करो कि दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों पर रख लो, अपनी पीठ फैला लो और इत्मीनान से रुकू करो, फिर उठ जाओ और अपनी पीठ इस तरह सीधी कर लो कि सारी हड्डियाँ अपने-अपने जोड़ों तक पहुँच जाएँ और सीधे खड़े हो जाओ, फिर इत्मीनान से सजदा करो और पेशानी तथा नाक एवं दोनों हाथों, घुटनों और पैरों की उंगलियों के किनारों को ज़मीन पर रखो, फिर उठो और इत्मीनान से दोनों सजदों के बीच बैठो और उसके बाद ऐसा ही अपनी नमाज़ की हर रकात में करो।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "बंदा अपने रब से सबसे अधिक निकट उस समय होता है, जब वह सजदे में होता है। अतः तुम उसमें ख़ूब दुआएँ किया करो।"

इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है स़ह़ीह़ HadeethEnc.com
व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि बंदा अपने रब से सबसे ज़्यादा निकट उस समय होता है, जब वह सजदे में होता है। इसका कारण यह है कि सजदे की हालत में बंदा अपने शरीर के सबसे उत्कृष्ट अंग को अल्लाह के लिए विनम्रता धारण करके ज़मीन पर रख देता है।

आपने सजदे की हालत में अधिक से अधिक दुआ करने का आदेश दिया है, ताकि अल्लाह के लिए धारण की जाने वाली इस विनम्रता और विनयशीलता में कार्य के साथ-साथ कथन भी शामिल हो जाए।

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