قَدۡ نَرَىٰ تَقَلُّبَ وَجۡهِكَ فِي ٱلسَّمَآءِۖ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبۡلَةٗ تَرۡضَىٰهَاۚ فَوَلِّ وَجۡهَكَ شَطۡرَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۚ وَحَيۡثُ مَا كُنتُمۡ فَوَلُّواْ وُجُوهَكُمۡ شَطۡرَهُۥۗ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ لَيَعۡلَمُونَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّهِمۡۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ ١٤٤
निश्चय (ऐ नबी!) हम आपके चेहरे का बार-बार आकाश की ओर उठना देख रहे हैं। तो निश्चय हम आपको उस क़िबले की ओर अवश्य फेर देंगे, जिसे आप पसंद करते हैं। तो (अब) अपना चेहरा मस्जिदे ह़राम की ओर फेर लें,74 तथा तुम जहाँ भी हो, तो अपने चेहरे उसी की ओर फेर लो। निःसंदेह वे लोग जिन्हें किताब दी गई है निश्चय जानते हैं कि निःसंदेह उनके पालनहार की ओर से यही सत्य है75 और अल्लाह उससे हरगिज़ ग़ाफ़िल नहीं जो वे कर रहे हैं।
फ़ुटनोट
74 नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मक्का से मदीना प्रस्थान करने के पश्चात्, बैतुल मक़्दिस की ओर मुख करके नमाज़ पढ़ते रहे। फिर आपको काबा की ओर मुख करके नमाज़ पढ़ने का आदेश दिया गया।
75 क्योंकि अंतिम नबी के गुणों में उनकी पुस्तकों में बताया गया है कि वह क़िबला बदल देंगे।
तफ़सीर
हमने - ऐ नबी! - आपके चेहरे और निगाह को बार-बार आसमान की ओर उठते हुए देखा है, इस प्रत्याशा में कि आपको अपने मनपसंद क़िबले की ओर मुख करके नमाज़ पढ़ने की अनुमति प्राप्त हो जाए। अतः निश्चय हम वर्तमान क़िबला बैतुल-मक़दिस के बदले, आपको उस क़िबले की ओर फेर देंगे, जिसे आप पसंद करते हैं (और वह अल्लाह का पवित्र घर काबा है)। सो (अब) आप अपना चेहरा मक्का मुकर्रमा में स्थित अल्लाह के पवित्र घर की ओर फेर लें। तथा - ऐ ईमान वालो! - तुम जहाँ भी हो, नमाज़ पढ़ते समय उसी की ओर मुख कर लो। निश्चय यहूदी तथा ईसाई इस बात से अवगत हैं कि क़िबले का बदलना उनके पालनहार और उनके मामलों के प्रभंधक की ओर से अवतिरत सत्य है; क्योंकि यह उनकी पुस्तक में प्रमाणित है। तथा अल्लाह उस बात से अनजान नहीं है जो ये सत्य से मुँह मोड़ने वाले करते हैं। बल्कि, वह महिमावान् उसे जानता है और उन्हें उसका बदला देगा।