وَكَذَٰلِكَ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ رُوحٗا مِّنۡ أَمۡرِنَاۚ مَا كُنتَ تَدۡرِي مَا ٱلۡكِتَٰبُ وَلَا ٱلۡإِيمَٰنُ وَلَٰكِن جَعَلۡنَٰهُ نُورٗا نَّهۡدِي بِهِۦ مَن نَّشَآءُ مِنۡ عِبَادِنَاۚ وَإِنَّكَ لَتَهۡدِيٓ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٥٢
और इसी प्रकार हमने आपकी ओर अपने आदेश से एक रूह़ (क़ुरआन) की वह़्य की। आप नहीं जानते थे कि पुस्तक क्या है और न यह कि ईमान35 क्या है। परंतु हमने उसे एक ऐसा प्रकाश बनाया दिया है, जिसके द्वारा हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, मार्ग दिखाते हैं। और निःसंदेह आप सीधी राह36 की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
फ़ुटनोट
35 मक्का वासियों को यह आश्चर्य था कि मनुष्य अल्लाह का नबी कैसे हो सकता है? इसपर क़ुरआन बता रहा है कि आप नबी होने से पहले न तो किसी आकाशीय पुस्तक से अवगत थे और न कभी ईमान की बात ही आपके विचार में आई। और यह दोनों बातें ऐसी थीं जिनका मक्कावासी भी इनकार नहीं कर सकते थे। और यही आपका अपढ़ होना आपके सत्य नबी होने का प्रमाण है। जिसे क़ुरआन की अनेक आयतों में वर्णन किया गया है।
36 सीधी राह से अभिप्राय सत्धर्म इस्लाम है।
तफ़सीर
जिस तरह हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले के नबियों की ओर वह़्य की थी, उसी तरह हमने आपकी ओर अपने पास से एक क़ुरआन की वह़्य की है। आप उससे पहले नहीं जानते थे कि रसूलों पर उतरने वाली आसमानी किताबें क्या हैं और न आप यह जानते थे कि ईमान क्या है? लेकिन हमने इस क़ुरआन को एक प्रकाश बनाकर उतारा है, जिसके द्वारा हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। निश्चय ही आप लोगों को एक सीधा मार्ग दिखाते हैं जो कि इस्लाम धर्म है।