وَلَمَّا بَرَزُواْ لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦ قَالُواْ رَبَّنَآ أَفۡرِغۡ عَلَيۡنَا صَبۡرٗا وَثَبِّتۡ أَقۡدَامَنَا وَٱنصُرۡنَا عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٢٥٠
और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के सामने हुए, तो दुआ की : ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उँडेल दे तथा हमारे पैरों को जमा दे और इन काफ़िरों के विरुद्ध हमारी सहायता कर।
तफ़सीर
जब वे जालूत और उसकी सेना का सामना करने के लिए निकले, तो उन्होंने अल्लाह की ओर मुतवज्जेह होकर दुआ करते हुए कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमारे दिलों पर सब्र उँडेल दे, और हमारे पाँवों को जमा दे ताकि हम भागें नहीं और न अपने दुश्मन के सामने पराजित हों, तथा अपनी शक्ति और समर्थन के साथ काफ़िर क़ौम पर हमारी मदद कर।