وَٱلَّيۡلِ إِذَا عَسۡعَسَ ١٧
और रात की (क़सम), जब वह आती और जाती है।
तफ़सीर
रात की शुरुआत की क़सम खाई, जब वह आने लगे, और उसके अंतिम भाग की क़सम खाई, जब वह जाने लगे।
وَٱلَّيۡلِ إِذَا عَسۡعَسَ ١٧
और रात की (क़सम), जब वह आती और जाती है।
रात की शुरुआत की क़सम खाई, जब वह आने लगे, और उसके अंतिम भाग की क़सम खाई, जब वह जाने लगे।