सूरह Ash-Shura, आयत 20

42:20

مَن كَانَ يُرِيدُ حَرۡثَ ٱلۡأٓخِرَةِ نَزِدۡ لَهُۥ فِي حَرۡثِهِۦۖ وَمَن كَانَ يُرِيدُ حَرۡثَ ٱلدُّنۡيَا نُؤۡتِهِۦ مِنۡهَا وَمَا لَهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ مِن نَّصِيبٍ ٢٠

जो कोई आख़िरत की खेती19 चाहता है, हम उसके लिए उसकी खेती में बढ़ोतरी कर देंगे, और जो कोई दुनिया की खेती चाहता है, हम उसे उसमें से कुछ दे देंगे, और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा।

फ़ुटनोट

19 अर्थात जो अपने सांसारिक सत्कर्म का प्रतिफल परलोक में चाहता है, तो उसे उसका प्रतिफल दस गुना से सात सौ गुना तक मिलेगा। और जो सांसारिक फल का अभिलाषी है, तो जो उसके भाग्य में है उसे उतना ही मिलेगा और परलोक में कुछ नहीं मिलेगा। (इब्ने कसीर)

तफ़सीर

जो कोई आख़िरत का प्रतिफल चाहता है और उसके लिए उसका कार्य करता है, हम उसके लिए उसके प्रतिफल को कई गुना बढ़ा देते हैं, क्योंकि नेकी का बदला दस गुना से सात सौ गुना तक, बल्कि उससे भी अधिक गुना तक मिलता है। तथा जो केवल दुनिया चाहता है, हम उसे दुनिया में उसका नियत भाग प्रदान कर देते हैं और उसके दुनिया को (आख़िरत पर) तरजीह देने के कारण उसके लिए आख़िरत में कोई भाग नहीं है।