सूरह An-Nisa, आयत 76

4:76

ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ يُقَٰتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يُقَٰتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱلطَّٰغُوتِ فَقَٰتِلُوٓاْ أَوۡلِيَآءَ ٱلشَّيۡطَٰنِۖ إِنَّ كَيۡدَ ٱلشَّيۡطَٰنِ كَانَ ضَعِيفًا ٧٦

जो लोग ईमान लाए, वे अल्लाह के मार्ग में युद्ध करते हैं और जो काफ़िर हैं, वे ताग़ूत (शैतान) के मार्ग में युद्ध करते हैं। अतः तुम शैतान के मित्रों से युद्ध करो। निःसंदेह शैतान की चाल कमज़ोर होती है।

तफ़सीर

सच्चे मोमिन, अल्लाह के रास्ते में उसके धर्म को सर्वोच्च करने के लिए लड़ते हैं, जबकि काफिर अपने असत्य पूज्यों (देवताओं) की खातिर लड़ते हैं। अतः तुम शैतान के सहायकों से युद्ध करो, क्योंकि यदि तुम उनसे युद्ध करोगे, तो उनपर विजय प्राप्त कर लोगे। क्योंकि शैतान की चाल कमज़ोर होती है। वह सर्वशक्तिमान अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को नुक़सान नहीं पहुँचा सकता।