सूरह Al-Qasas, आयत 56

28:56

إِنَّكَ لَا تَهۡدِي مَنۡ أَحۡبَبۡتَ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُهۡتَدِينَ ٥٦

निःसंदेह आप उसे हिदायत नहीं दे सकते जिसे आप चाहें,18 परंतु अल्लाह हिदायत देता है जिसे चाहता है और वह हिदायत पाने वालों को अधिक जानने वाला है।

फ़ुटनोट

18 ह़दीस में वर्णित है कि जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के (काफ़िर) चाचा अबू तालिब के निधन का समय हुआ, तो आप उनके पास गए। उस समय उनके पास अबू जह्ल तथा अब्दुल्लाह बिन अबी उमय्या उपस्थित थे। आपने कहा : चाचा! ''ला इलाहा इल्लल्लाह'' कह दें, ताकि मैं क़ियामत के दिन अल्लाह से आपकी क्षमा के लिए सिफ़ारिश कर सकूँ। परंतु दोनों के कहने पर उन्होंने अस्वीकार कर दिया और उनका अंत कुफ़्र पर हुआ। इसी विषय में यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्या : 4772)

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप जिसे चाहें, जैसे अबू तालिब आदि, उसे ईमान का सामर्थ्य प्रदान करके मार्गदर्शन पर नहीं ला सकते। लेकिन केवल अल्लाह ही है, जो जिसे चाहता है मार्गदर्शन का सामर्थ्य प्रदान करता है। तथा वह उसे सबसे अधिक जानने वाला है, जो उसके पूर्व ज्ञान के अनुसार सीधे रास्ते पर चलने वालों में से है।