सूरह Al-Qasas, आयत 55

28:55

وَإِذَا سَمِعُواْ ٱللَّغۡوَ أَعۡرَضُواْ عَنۡهُ وَقَالُواْ لَنَآ أَعۡمَٰلُنَا وَلَكُمۡ أَعۡمَٰلُكُمۡ سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡ لَا نَبۡتَغِي ٱلۡجَٰهِلِينَ ٥٥

और जब वे व्यर्थ बात सुनते हैं, तो उससे किनारा करते हैं, तथा कहते हैं : हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। सलाम है तुमपर, हम जाहिलों को नहीं चाहते।

तफ़सीर

और जब किताब वाले लोगों में से ये ईमान वाले कोई व्यर्थ बात सुनते हैं, तो उसपर ध्यान दिए बिना उससे किनारा कर लेते हैं और अपने साथियों को संबोधित करके कहते हैं : हमारे लिए हमारे कर्मों का प्रतिफल है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल। तुम हमारी ओर से अपशब्द और कष्ट से सुरक्षित हो। हम जाहिलों की संगत नहीं चाहते। क्योंकि इसमें धर्म और दुनिया की हानि और कष्ट है।