وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَقَفَّيۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِۦ بِٱلرُّسُلِۖ وَءَاتَيۡنَا عِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ٱلۡبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدۡنَٰهُ بِرُوحِ ٱلۡقُدُسِۗ أَفَكُلَّمَا جَآءَكُمۡ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهۡوَىٰٓ أَنفُسُكُمُ ٱسۡتَكۡبَرۡتُمۡ فَفَرِيقٗا كَذَّبۡتُمۡ وَفَرِيقٗا تَقۡتُلُونَ ٨٧
तथा निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की और उसके बाद लगातार रसूल भेजे, और हमने मरयम के पुत्र ईसा को खुली निशानियाँ दीं और रूह़ुल-क़ुदुस40 (पवित्र-आत्मा) द्वारा उन्हें शक्ति प्रदान की। फिर क्या जब कभी कोई रसूल तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आया जिसे तुम्हारे दिल न चाहते थे, तो तुमने अभिमान किया, चुनाँचे एक समूह को झुठला दिया और एक समूह की हत्या करते रहे।
फ़ुटनोट
40 रूह़ुल क़ुदुस से अभिप्रेत फ़रिश्ता जिब्रील अलैहिस्सलाम हैं।
तफ़सीर
हमने मूसा को तौरात प्रदान किया तथा उनके बाद उनके पीछे ही बहुत से रसूल भेजे, और ईसा बिन मरयम को उनकी सच्चाई को दर्शाने वाली स्पष्ट निशानियाँ प्रदान कीं; जैसे मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करना, अंधे पैदा हुए लोगों को ठीक करना और कोढ़ी को चंगा करना। तथा हमने उन्हें जिबरील नामी फ़रिश्ते द्वारा शक्ति प्रदान की। फिर क्या जब भी - ऐ बनी इसराईल! - अल्लाह की ओर से कोई रसूल तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आया, जो तुम्हारी इच्छाओं के अनुकूल नहीं थी, तो तुमने सत्य को स्वीकार करने से अभिमान किया और अल्लाह के रसूलों पर बड़ा बनने लगे; चुनाँचे उनमें से एक समूह को तुम झुठलाते रहे और एक समूह की हत्या करते रहे?।