ٱلشَّهۡرُ ٱلۡحَرَامُ بِٱلشَّهۡرِ ٱلۡحَرَامِ وَٱلۡحُرُمَٰتُ قِصَاصٞۚ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَٱعۡتَدُواْ عَلَيۡهِ بِمِثۡلِ مَا ٱعۡتَدَىٰ عَلَيۡكُمۡۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ ١٩٤
हुरमत वाला113 महीना, हुरमत वाले महीने के बदले है और सब हुरमतों में क़िसास (बराबरी का बदला) है। अतः जो तुमपर ज़्यादती करे, तो तुम उसपर उसी के समान ज़्यादती करो, जैसी उसने तुमपर ज़्यादती की है तथा अल्लाह से डरो और जान लो कि अल्लाह डरने वालों के साथ है।
फ़ुटनोट
113 हुरमत वाले महीनों से अभिप्रेत चार अरबी महीने : ज़ुल-क़ादह, ज़ुल-हिज्जह, मुह़र्रम तथा रजब हैं। इबराहीम अलैहिस्सलाम के युग से इन मासों का आदर सम्मान होता आ रहा है। आयत का अर्थ यह है कि कोई हुरमत वाले स्थान अथवा युग में अतिक्रमण करे, तो उसे बराबरी का बदला दिया जाए।
तफ़सीर
वर्ष 7 हिजरी का हुरमत वाला महीना, जिसमें अल्लाह ने तुम्हें हरम में प्रवेश करने और उम्रा अदा करने में सक्षम किया, उस हुरमत वाले महीने के बदले है, जिसमें मुश्रिकों ने तुम्हें वर्ष 6 हिजरी में ह़रम में प्रवेश कने से रोक दिया था। सभी हुरमत वाली चीज़ों - जैसे हुरमत वाले नगर की हुरमत, हुरमत वाले महीने की हुरमत और एह़राम की हुरमत - में ज़्यादती करने वालों पर क़िसास का नियम लागू होगा। अतः जिसने भी इनमें तुमपर ज़्यादती की है, उसके साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा उसने किया है, और समानता की सीमा से आगे न बढ़ो। निश्चय अल्लाह अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने वालों से प्रेम नहीं करता। तथा अल्लाह ने तुम्हें जो कुछ करने की अनुमति दी है, उससे आगे न बढ़ो, और जान लो कि अल्लाह सामर्थ्य एवं समर्थन के द्वारा उन लोगों के साथ है, जो उससे डरने वाले हैं।