وَقَٰتِلُوهُمۡ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتۡنَةٞ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ لِلَّهِۖ فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَلَا عُدۡوَٰنَ إِلَّا عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ ١٩٣
तथा उनसे युद्ध करो, यहाँ तक कि कोई फ़ितना शेष न रहे और धर्म अल्लाह के लिए हो जाए। फिर यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो अत्याचारियों के सिवा किसी पर कोई ज़्यादती (जायज़) नहीं।
तफ़सीर
काफ़िरों से युद्ध करो, यहाँ तक कि वे शिर्क, लोगों को अल्लाह के मार्ग से रोकने और कुफ़्र से बाज़ आ जाएँ, तथा प्रभावी धर्म अल्लाह का धर्म हो जाए। यदि वे अपने कुफ़्र तथा अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ, तो उनसे लड़ाई करना छोड़ दो। क्योंकि कुफ़्र और अल्लाह के मार्ग से रोकने के द्वारा अत्याचार करने वालों के सिवा किसी पर कोई अत्याचार उचित नहीं है।