ٱلَّذِينَ يَتَّبِعُونَ ٱلرَّسُولَ ٱلنَّبِيَّ ٱلۡأُمِّيَّ ٱلَّذِي يَجِدُونَهُۥ مَكۡتُوبًا عِندَهُمۡ فِي ٱلتَّوۡرَىٰةِ وَٱلۡإِنجِيلِ يَأۡمُرُهُم بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَنۡهَىٰهُمۡ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ ٱلطَّيِّبَٰتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيۡهِمُ ٱلۡخَبَٰٓئِثَ وَيَضَعُ عَنۡهُمۡ إِصۡرَهُمۡ وَٱلۡأَغۡلَٰلَ ٱلَّتِي كَانَتۡ عَلَيۡهِمۡۚ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِهِۦ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَٱتَّبَعُواْ ٱلنُّورَ ٱلَّذِيٓ أُنزِلَ مَعَهُۥٓ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ١٥٧
जो लोग उस रसूल का अनुसरण करते हैं, जो उम्मी नबी56 है, जिसे वे अपने पास तौरात तथा इंजील में लिखा हुआ पाते हैं, जो उन्हें नेकी का आदेश देता है और बुराई से रोकता है, तथा उनके लिए पाकीज़ा चीज़ों को हलाल (वैध) करता और उनपर अपवित्र चीज़ों को हराम (अवैध) ठहराता है और उनसे उनका बोझ और वह तौक़ उतारता है, जो उनपर पड़े हुए थे। अतः जो लोग उसपर ईमान लाए, उसका समर्थन किया, उसकी सहायता की और उस प्रकाश (क़ुरआन) का अनुसरण किया, जो उसके साथ उतारा गया, वही लोग सफलता प्राप्त करने वाले हैं।
फ़ुटनोट
56 अर्थात बनी इसराईल से नहीं। इससे अभिप्राय अंतिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, जिनके आगमन की भविष्यवाणी तौरात, इंजील तथा दूसरे धर्म शास्त्रों में पाई जाती है। यहाँ पर आपकी तीन विशेषताओं की चर्चा की गयी है : 1. आप सदाचार का आदेश देते तथा दुराचार से रोकते हैं। 2. स्वच्छ चीज़ों के प्रयोग को उचित तथा मलिन चीज़ों के प्रयोग को अनुचित ठहराते हैं। 3. अह्ले किताब जिन कड़े धार्मिक नियमों के बोझ तले दबे हुए थे, उन्हें उनसे मुक्त करते हैं। और रसूल इस्लामी धर्म विधान प्रस्तुत करते हैं, और उनके आगमन के पश्चात् लोक-परलोक की सफलता आप ही के धर्म विधान के अनुसरण में सीमित है।
तफ़सीर
जो लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण करते हैं, जो कि उम्मी नबी हैं, पढ़ना एवं लिखना नही जानते, बल्कि उनपर उनके पालनहार की ओर से वह़्य की जाती है, और वह वही हैं जिनके नाम, विवरण और नुबुव्वत का उल्लेख वे मूसा अलैहिस्सलाम पर उतरने वाली तौरात तथा ईसा अलैहिस्सलाम पर उतरने वाली इंजील में पाते हैं; जो उन्हें उन बातों का आदेश देते हैं जिनका अच्छा और भला होना सर्वज्ञात है, और उन्हें उन बातों से रोकते हैं, जिनके बुरे होने की पुष्टि शुद्ध बुद्धि और सही प्रकृति भी करती है, और उनके लिए खाने-पीने और औरतों से संबंधित उन आनंददायक चीजों को वैध ठहराते हैं, जिनमें कोई नुक़सान नहीं है और उनपर उनमें से उन चीज़ों को निषिद्ध ठहराते हैं, जो गंदी और अपवित्र हैं, और उनसे उन कष्टदायक आदेशों का बोझ हटाते हैं, जो उनपर डाले जाते थे, जैसे हत्यारे की हत्या कर देना, हत्या चाहे जान-बूझकर हो या ग़लती से। अतः जो बनी इसराईल तथा अन्य लोग उनपर ईमान लाए, उनका आदर एवं सम्मान किया, और उनसे दुश्मनी रखने वाले काफ़िरों के विरुद्ध उनकी मदद की, और उस क़ुरआन का अनुसरण किया, जो उनपर मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में उतारा गया है; तो वही लोग सफल होने वाले हैं, जो अपनी अपेक्षित चीज़ों को प्राप्त करेंगे और अपने भय की चीज़ों से मुक्ति पाएँगे।