सूरह Al-A'raf, आयत 158

7:158

قُلۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنِّي رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيۡكُمۡ جَمِيعًا ٱلَّذِي لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ فَـَٔامِنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِ ٱلنَّبِيِّ ٱلۡأُمِّيِّ ٱلَّذِي يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَكَلِمَٰتِهِۦ وَٱتَّبِعُوهُ لَعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ ١٥٨

(ऐ नबी!) आप कह दें कि ऐ मानव जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम सब की ओर उस अल्लाह का रसूल हूँ, जिसके लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। वही जीवन देता और मारता है। अतः तुम अल्लाह पर और उसके रसूल उम्मी नबी पर ईमान लाओ, जो अल्लाह पर और उसकी सभी वाणियों (पुस्तकों) पर ईमान रखता है और उसका अनुसरण करो, ताकि तुम सीधा मार्ग पाओ।57

फ़ुटनोट

57 इस आयत का भावार्थ यह है कि इस्लाम के नबी किसी विशेष जाति तथा देश के नबी नहीं हैं, प्रलय तक के लिए पूरी मानव जाति के नबी हैं। यह सबको एक अल्लाह की वंदना कराने के लिए आए हैं, जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं। आपका चिह्न अल्लाह पर तथा सब प्राचीन पुस्तकों और नबियों पर ईमान है। आपका अनुसरण करने का अर्थ यह है कि अब उसी प्रकार अल्लाह की उपासना करो, जैसे आपने की और बताई है। और आपके लाए हुए धर्म विधान का पालन करो।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ लोगो! मैं तुम सभी की ओर, अरब हों या ग़ैर-अरब, उस अल्लाह का रसूल बनकर आया हूँ, जिसके ही हाथ में आकाशों का राज्य है और उसी के लिए धरती का राज्य है, उस पवित्र अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह मरे हुए लोगों को जीवित करता है, और जीवित लोगों को मौत देता है। इसलिए (ऐ लोगो!) अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाओ, जो ऐसे नबी हैं कि न पढ़ सकते हैं न लिख सकते हैं, बल्कि वह एक वह़्य के साथ आए हैं, जिसे उनका पालनहार उनकी ओर उतारता है, जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, तथा अपने ऊपर उतरने वाली पुस्तक पर ईमान रखते हैं और अपने पहले नबियों पर उतरने वाली पुस्तकों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान रखते हैं, तथा जो कुछ वह अपने पालनहार की ओर से लाए हैं उसमें उनका अनुसरण करो, ताकि तुम वह रास्ता पा सको, जिसमें दुनिया एवं आख़िरत में तुम्हारा हित निहित है।