पाठ 1 / 4
इस्लाम अच्छे अख़लाक़ के बारे में क्या सिखाता है?
क़ुरआन से
وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٖ ﴿٤﴾
तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
۞ إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَٱلۡإِحۡسَٰنِ وَإِيتَآيِٕ ذِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَيَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡبَغۡيِۚ يَعِظُكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ ﴿٩٠﴾
निःसंदेह अल्लाह न्याय और उपकार और निकटवर्तियों को देने का आदेश देता है और अश्लीलता और बुराई और सरकशी से रोकता है। वह तुम्हें नसीहत करता है, ताकि तुम नसीहत हासिल करो।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّا خَلَقۡنَٰكُم مِّن ذَكَرٖ وَأُنثَىٰ وَجَعَلۡنَٰكُمۡ شُعُوبٗا وَقَبَآئِلَ لِتَعَارَفُوٓاْۚ إِنَّ أَكۡرَمَكُمۡ عِندَ ٱللَّهِ أَتۡقَىٰكُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٞ ﴿١٣﴾
ऐ मनुष्यो! हमने तुम्हें एक नर और एक मादा से पैदा किया तथा हमने तुम्हें जातियों और क़बीलों में कर दिए, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। निःसंदेह अल्लाह के निकट तुममें सबसे अधिक सम्मान वाला वह है, जो तुममें सबसे अधिक तक़्वा वाला है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूरी ख़बर रखने वाला है।
सुन्नत से
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो।"
व्याख्या
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि सबसे संपूर्ण आचरण वाला व्यक्ति वह है, जिसका आचरण सबसे अच्छा हो। आचरण अच्छा होने का मतलब यह है कि हँसकर मिला जाए, लोगों का भला किया जाए, अच्छे ढंग से बात की जाए और किसी को कष्ट देने से बचा जाए।
जबकि सबसे उत्तम ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो अपने घर की औरतों, मसलन, पत्नी, बेटियों, बहनों और अन्य रिश्तेदार महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार करता हो। क्योंकि यह औरतें अच्छे आचरण की सबसे अधिक हक़दार हैं।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सेवक अबू हमज़ा अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, जब तक कि अपने भाई के लिए वही पसंद न करे, जो अपने लिए पसंद करता है।''
व्याख्या
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि किसी व्यक्ति को संपूर्ण ईमान की दौलत उस समय तक नसीब नहीं हो सकती, जब तक अपने भाई के लिए दीन एवं दुनिया की वही चीज़ें पसंद न करे, जो अपने लिए पसंद करता हो और उसके लिए उन्हीं चीज़ों को नापसंद न करे, जिन्हें अपने लिए नापसंद करता हो। अगर अपने भाई के अंदर दीन की कोई कमी देखे, तो उसे दूर करने का प्रयास करे और कोई अच्छाई देखे, तो उसे और बढ़ावा दे और उसमें मदद करे। दीन एवं दुनिया से संबंधित सभी बातों में उसका शुभचिंतन करे।