रात की नमाज़ (तहज्जुद) की दुआएं

वे दुआएं जो नबी करीम ﷺ रात को नमाज़ के लिए खड़े होकर करते थे।

1 एक बार

اللهم ربَّنا لك الحمدُ، أنت قَيِّمُ السموات والأرض، ولك الحمدُ أنت ربُّ السموات والأرض ومَن فيهنَّ، ولك الحمدُ أنت نورُ السموات والأرض ومن فيهنَّ، أنت الحقُّ، وقولُك الحقُّ، ووعدُك الحقُّ، ولقاؤك الحقُّ، والجنةُ حقٌّ، والنارُ حقٌّ، والساعةُ حقٌّ، اللهم لك أسلمتُ، وبك آمنتُ، وعليك توكَّلتُ، وإليك خاصمتُ، وبك حاكمتُ، فاغفر لي ما قدَّمتُ وما أخَّرتُ، وأسررتُ وأعلنتُ، وما أنت أعلم به مني، لا إلهَ إلا أنت

अनुवाद और हवाला

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब रात को तहज्जुद पढ़ते, तो यह दुआ पढ़ते : «اللهم ربَّنا لك الحمدُ، أنت قَيِّمُ السموات والأرض، ولك الحمدُ أنت ربُّ السموات والأرض ومَن فيهنَّ، ولك الحمدُ أنت نورُ السموات والأرض ومن فيهنَّ، أنت الحقُّ، وقولُك الحقُّ، ووعدُك الحقُّ، ولقاؤك الحقُّ، والجنةُ حقٌّ، والنارُ حقٌّ، والساعةُ حقٌّ، اللهم لك أسلمتُ، وبك آمنتُ، وعليك توكَّلتُ، وإليك خاصمتُ، وبك حاكمتُ، فاغفر لي ما قدَّمتُ وما أخَّرتُ، وأسررتُ وأعلنتُ، وما أنت أعلم به مني، لا إلهَ إلا أنت». (ऐ अल्लाह! ऐ हमारे रब! सारी प्रशंसा तेरी है, तू आकाशों तथा धरती का रखवाला है। सारी प्रशंसा तेरी है, तू आकाशों तथा धरती और उनकी सारी वस्तुओं का रब है। सारी प्रशंसा तेरी है, तू ही आकाशों तथा धरती और उनकी सारी वस्तुओं का नूर है। तू सत्य है। तेरी बात सत्य है। तेरा वचन सत्य है। तुझसे मिलना सत्य है। जन्नत सत्य है। जहन्नम सत्य है। क़यामत सत्य है। ऐ अल्लाह! मैंने अपने आपको तेरे हवाले कर दिया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी मदद से अपने शत्रुओं से झगड़ा किया और निर्णय को तेरे हवाले कर दिया। अतः, मेरे उन सारे गुनाहों को क्षमा कर दे, जो मैंने पहले किए और जो मैं करने वाला हूँ और जो मैंने छिपाकर किए और जो दिखाकर किए और जिन्हें तू मुझसे अधिक जानता है। तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है।)

इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है। दर्जा: सह़ीह़

2 एक बार

اللهمَّ ربَّ جِبرائيل، ومِيكائيل، وإسرافيل، فاطرَ السماوات والأرض، عالمَ الغيب والشهادة، أنت تحكم بين عبادك فيما كانوا فيه يختلفون، اهدني لما اختُلِف فيه من الحق بإذنك، إنَّك تهدي مَن تشاء إلى صراطٍ مستقيمٍ

अनुवाद और हवाला

अबू सलमा बिन अब्दुर रहमान बिन औफ़ कहते हैं कि मैंने उम्मुल मोमिनीन आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से पूछा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब रात में तहज्जुद की नमाज़ के लिए खड़े होते, तो क्या कहकर नमाज़ प्रारंभ करते? आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहा : आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब रात में तहज्जुद की नमाज़ के लिए खड़े होते, तो इस दुआ के साथ अपनी नमाज़ शुरू करते थे : “ऐ अल्लाह, ऐ जिबराईल, मीकाईल तथा इसराफ़ील के रब! आकाश तथा धरती को बनाने वाले और हाज़िर और ग़ायब की ख़बर रखने वाले! तू ही अपने बंदों के मतभेदों का निर्णय करने वाला है, मुझे अपनी अनुमति से जिसके प्रति मतभेद हो गया है, उसमें सत्य की राह दिखा। निश्चय तू जिसे चाहता है, उसे सही रास्ता दिखाता है।”

इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। दर्जा: सह़ीह़

3 एक बार

اللهم اجعل في قلبي نورا، وفي بَصري نورا، وفي سمعي نورا، وعن يميني نورا، وعن يساري نورا، وفَوْقِي نورا، وتحتي نورا، وأمامي نورا، وخلفي نورا، واجعل لي نورا

अनुवाद और हवाला

इब्ने अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है, वह रिवायत करते हैं कि मैंने मैमूना (रज़ियल्लाहु अन्हा) के यहाँ रात बिताई, तो नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- (नींद से उठ कर) खड़े हुए, अपनी आवश्यकता की पूर्ती की, अपना मुख व हाथ धोया, फिर आप सो गए, फिर आप (नींद से उठ कर) खड़े हुए, मश्कीज़ा के पास आए, उसका मुँह खोला तथा मुनासिब तरीका से वुजू़ किया कि बहुत अधिक पानी का प्रयोग भी नहीं किया और वुज़ू भी हर तरह से संपूर्ण था, फिर आप नमाज़ पढ़ने लगे, मैंने उठने में देर की इस बात को अप्रिय समझते हुए कि आप यह समझें कि मैं आप को देख रहा था, तत्पश्चात मैंने वुजू़ किया, आप खड़े हो कर नमाज़ पढ़ रहे थे, मैं आप के बाएं आ कर खड़ा हो गया तो आप ने मेरे कान को पकड़ कर मुझे घुमाते हुए अपने दाईं ओर खड़ा किया, आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कुल तेरह रकअत नमाज़ पढ़ी, फिर आप लेट गए यहाँ तक कि सो कर ख़र्राटे लेने गए, और आप का हाल ये था कि जब आप सोते तो ख़र्राटा लेते, यहां तक कि बिलाल ने आ कर आप को नमाज़ के बारे में बताया, तो आप ने बिना वुज़ू किए हुए नमाज़ पढ़ी, और आप यह दुआ कर रहे थे : "ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी आँख में नूर रख दे, मेरे कान में नूर रख दे, मेरे दाएँ नूर रख दे, मेरे बाएँ नूर रख दे, मेरे ऊपर नूर रख दे, मेरे नीचे नूर रख दे, मेरे सामने नूर रख दे, मेरे पीछे नूर रख दे और मेरे लिए नूर बना दे।"

इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है। दर्जा: सह़ीह़

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अनुवाद और हवाला

अबू उमामा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मुझे अम्र बिन अबसा रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया है कि उन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "अल्लाह अपने बंदे से सबसे निकट रात के अंतिम भाग में होता है। अतः यदि उस समय अल्लाह का स्मरण करने वालों में शामिल हो सको, तो हो जाओ।"

इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है दर्जा: स़ह़ीह़

शरह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि बंदा अपने रब से सबसे ज़्यादा निकट रात के अंतिम तिहाई भाग में हुआ करता है। इसलिए हर व्यक्ति का प्रयास होना चाहिए कि रात के उस भाग में जागकर अल्लाह की इबादत करे, नमाज़ पढ़े, ज़िक्र में व्यस्त रहे और तौबा करे।

फ़ायदे

  • रात के अंतिम भाग में ज़िक्र करने की प्रेरणा।
  • ज़िक्र, दुआ और नमाज़ों के समयों की फ़ज़ीलत में कमी-बेशी हुआ करती है।
  • मीरक दो हदीसों के दो वाक्यों, "पाक रब अपने बंदे से सबसे ज़्यादा निकट रात के अंतिम तिहाई भाग में हुआ करता है" और "बंदा अपने पाक रब से सबसे ज़्यादा निकट सजदे की अवस्था में हुआ करता है" का अंतर बताते हुए लिखते हैं : पहली हदीस में उद्देश्य यह बयान करना है कि पाक रब अपने बंदे से सबसे निकट कब होता है। इसका उत्तर है, रात का अंतिम भाग। जबकि दूसरी हदीस में उद्देश्य यह बयान करना है कि बंदा अपने पाक रब से सबसे निकट किस अवस्था में हुआ करता है। इसका उत्तर है, सजदे की अवस्था।

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अनुवाद और हवाला

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़रमाते हुए सुनाः "रात में एक समय होता है कि जो मुसलमान उसमें अल्लाह से दुनिया एवं आख़िरत से संबंधित कोई भलाई माँगता हुआ पाया जाएगा, अल्लाह उसे ज़रूर प्रदान करेगा। यह घड़ी हर रात आती है।"

इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। दर्जा: सह़ीह़

सवाल

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