قَالُواْ جَزَٰٓؤُهُۥ مَن وُجِدَ فِي رَحۡلِهِۦ فَهُوَ جَزَٰٓؤُهُۥۚ كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلظَّٰلِمِينَ ٧٥
उन्होंने कहा : उसका दंड यह है कि जिसके सामान में वह पाया जाए, वही व्यक्ति उसका दंड है। हम अत्याचारियों को इसी प्रकार दंड देते हैं।24
फ़ुटनोट
24 अर्थात याक़ूब अलैहिस्सलाम के धर्म-विधान में चोर को दास बना लेने का नियम था। (तफ़्सीर क़ुर्तुबी)
तफ़सीर
यूसुफ़ के भाइयों ने उनसे कहा : हमारे यहाँ चोरी का दंड यह है कि जिसके सामान में चोरी का माल मिले, उसकी गरदन उस व्यक्ति के हवाले कर दी जाती है, जिसका माल चोरी हुआ है और वह उसे अपना ग़ुलाम बना लेता है। इस तरह ग़ुलाम बनाने के दंड के साथ हम चोरों को दंडित करते हैं।