सूरह Fussilat, आयत 6

41:6

قُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُوحَىٰٓ إِلَيَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ فَٱسۡتَقِيمُوٓاْ إِلَيۡهِ وَٱسۡتَغۡفِرُوهُۗ وَوَيۡلٞ لِّلۡمُشۡرِكِينَ ٦

आप कह दें कि मैं तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ। मेरी ओर वह़्य की जाती है कि तुम्हारा पूज्य मात्र एक ही पूज्य है। अतः सीधे उसी की ओर एकाग्र रहो तथा उससे क्षमा माँगो और साझी ठहराने वालों के लिए बड़ा विनाश है।

तफ़सीर

(ऐ रसूल) इन अवज्ञाकारियों से कह दें कि मैं तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ। अल्लाह मेरी आेर वह्य भेजता है कि तुम्हारा सत्य पूज्य बस एक ही सत्य पूज्य है। वह अल्लाह है। अत-, उसी की ओर ले जाने वाली राह पर चलो। उसी से गुनाहों की क्षमा माँगो। बेशक विनाश व यातना उन मुश्रिकों के लिए है, जो अल्लाह के सिवा किसी और की वंदना करते हैं अथवा उसका किसी दूसरे को साझी बनाते हैं।