أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗاۖ فَإِن يَشَإِ ٱللَّهُ يَخۡتِمۡ عَلَىٰ قَلۡبِكَۗ وَيَمۡحُ ٱللَّهُ ٱلۡبَٰطِلَ وَيُحِقُّ ٱلۡحَقَّ بِكَلِمَٰتِهِۦٓۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٢٤
या वे कहते हैं कि उसने अल्लाह पर झूठ गढ़ लिया है? तो यदि अल्लाह चाहे, तो आपके दिल पर मुहर लगा दे।22 और अल्लाह असत्य को मिटा देता है और सत्य को अपने शब्दों (प्रमाणों) द्वारा साबित कर देता है। निश्चय वह सीनों (दिलों) की बातों को ख़ूब जानने वाला है।
फ़ुटनोट
22 अर्थ यह है कि ऐ नबी! इन्होंने आपको अपने जैसा समझ लिया है, जो अपने स्वार्थ के लिए झूठ का सहारा लेते हैं। किंतु अल्लाह ने आपके दिल पर मुहर नहीं लगाई है जैसे इनके दिलों पर लगा रखी है।
तफ़सीर
मुश्रिकों का यह दावा था कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस क़ुरआन को अपनी ओर से बनाकर अल्लाह के साथ संबद्ध कर दिया है। इसलिए अल्लाह उनका खंडन करते हुए कहता है : यदि आपके दिल में झूठ गढ़ने का ख़याल भी आया होता, तो मैं आपके दिल पर मुहर लगा देता और गढ़े हुए झूठ को मिटाकर सत्य को संरक्षित कर देता। जब इस तरह की कोई बात नहीं हुई, तो इससे पता चला कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपनी इस बात में सच्चे हैं कि यह क़ुरआन आप पर आपके पालनहार की ओर से वह़्य के माध्यम से अवतिरत हुआ है। निश्चय वह अपने बंदों के दिलों की बातों को ख़ूब जानने वाला है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है।