सूरह Ash-Shura, आयत 16

42:16

وَٱلَّذِينَ يُحَآجُّونَ فِي ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا ٱسۡتُجِيبَ لَهُۥ حُجَّتُهُمۡ دَاحِضَةٌ عِندَ رَبِّهِمۡ وَعَلَيۡهِمۡ غَضَبٞ وَلَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٌ ١٦

तथा जो लोग अल्लाह के (धर्म के) बारे में झगड़ते हैं, इसके पश्चात कि उसे17 स्वीकार कर लिया गया, उनका तर्क उनके रब के यहाँ बातिल (व्यर्थ) है, तथा उनपर बड़ा प्रकोप है और उनके लिए बुहत कड़ी यातना है।

फ़ुटनोट

17 अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम), और इस्लाम धर्म को।

तफ़सीर

और जो लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाले इस धर्म के बारे में झूठे तर्कों के साथ बहस करते हैं जबकि लोगों ने उसे स्वीकार कर लिया है, इन बहस करने वालों का तर्क उनके पालनहार के निकट और मोमिनों के निकट व्यर्थ है, उसका कोई प्रभाव नहीं है। तथा उनके कुफ़्र करने और सत्य का इनकार करने के कारण, उनपर अल्लाह का क्रोध है। और उनके लिए कठोर यातना है, जो क़ियामत के दिन उनकी प्रतीक्षा कर रही है।