لَعَلَّكَ بَٰخِعٞ نَّفۡسَكَ أَلَّا يَكُونُواْ مُؤۡمِنِينَ ٣
शायद (ऐ रसूल!) आप अपने आपको हलाक करने वाले हैं, इसलिए कि वे ईमान नहीं लाते।1
फ़ुटनोट
1 अर्थात उनके ईमान न लाने के शोक में।
तफ़सीर
शायद (ऐ रसूल!) आप उनकी हिदायत की तीव्र उत्सुकता के कारण, उनकी हिदायत की चिंता और ग़म में अपने आपको हलाक कर लेंगे।