सूरह Ash-Shu'ara, आयत 4

26:4

إِن نَّشَأۡ نُنَزِّلۡ عَلَيۡهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ءَايَةٗ فَظَلَّتۡ أَعۡنَٰقُهُمۡ لَهَا خَٰضِعِينَ ٤

यदि हम चाहें, तो उनपर आकाश से कोई निशानी उतार दें, फिर उसके सामने उनकी गर्दनें झुकी रह जाएँ।2

फ़ुटनोट

2 परंतु ऐसा नहीं किया, क्योंकि दबाव का ईमान स्वीकार्य तथा मान्य नहीं होता।

तफ़सीर

यदि हम उनपर आकाश से कोई निशानी उतारना चाहें, तो उसे उनपर उतार दें, फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ। किंतु हमने उनकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से ऐसा नहीं चाहा कि : क्या वे ग़ैब (परोक्ष) पर ईमान लाते हैं?