सूरह Ar-Rum, आयत 52

30:52

فَإِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَلَا تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ ٥٢

निःसंदेह आप मुर्दों19 को नहीं सुना सकते और न बहरों को (अपनी) पुकार सुना सकते हैं, जब वे पीठ फेरकर लौट जाएँ।

फ़ुटनोट

19 अर्थात जिनकी अंतरात्मा मर चुकी हो और सत्य सुनने के लिए तैयार न हों।

तफ़सीर

जिस तरह आप मरे हुए लोगों को नहीं सुना सकते और न ही बहरों को सुना सकते हैं, जबकि वे आपसे यह सुनिश्चित करने के लिए दूर चले गए हैं कि उन्हें सुनाई न दे, तो उसी तरह आप उन लोगों का मार्गदर्शन नहीं कर सकते, जो मुँह फेरने और लाभ न उठाने के कारण, इन लोगों के समान हैं।