وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدٗا ثُمَّ لَا يُؤۡذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ وَلَا هُمۡ يُسۡتَعۡتَبُونَ ٨٤
और जिस दिन37 हम प्रत्येक समुदाय से एक गवाह खड़ा38 करेंगे, फिर काफ़िरों को अनुमति नहीं दी जाएगी और न उनसे क्षमा की याचना स्वीकार की जाएगी।
फ़ुटनोट
37 अर्थात प्रलय के दिन।
38 (देखिए : सूरतुन्-निसा, आयत : 41)
तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) याद करें, जिस दिन अल्लाह हर समुदाय के रसूल को खड़ा करेगा, जो उस समुदाय के मोमिन के ईमान और काफ़िर के कुफ़्र की गवाही देगा। फिर उसके बाद काफ़िरों को अपने कुफ़्र का बहाना पेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और न ही वे दुनिया में वापस लौटाए जाएँगे कि अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के काम कर सकें। क्योंकि आख़िरत हिसाब का घर है, काम का घर नहीं।