قُلۡ نَزَّلَهُۥ رُوحُ ٱلۡقُدُسِ مِن رَّبِّكَ بِٱلۡحَقِّ لِيُثَبِّتَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَهُدٗى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ ١٠٢
आप कह दें कि इसे रूह़ुल क़ुदुस45 ने आपके पालनहार की ओर से सत्य के साथ थोड़ा-थोड़ा करके उतारा है। ताकि उन लोगों के पाँव जमा दे, जो ईमान लाए। तथा आज्ञाकारियों के लिए मार्गदर्शन और शुभ सूचना हो।
फ़ुटनोट
45 इसका अर्थ पवित्रात्मा है। जो जिब्रील अलैहिस्सलाम की उपाधि है। यही वह फ़रिश्ता है जो वह़्य लाता था।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) उनसे कह दें : इस क़ुरआन को जिबरील अलैहिस्सलाम अल्लाह की ओर से, सत्य के साथ लेकर उतरे हैं, जिसमें कोई त्रुटि, या परिवर्तन या विकृति नहीं है। ताकि जब भी उसकी कोई नई आयत उतरे और उसमें से कुछ को निरस्त किया जाए, तो वह अल्लाह पर ईमान रखने वालों को उनके ईमान पर मज़बूत कर दे, और ताकि यह उनके लिए सत्य का मार्गदर्शन हो, और मुसलमानों के लिए उन्हें प्राप्त होने वाले उत्कृष्ट बदले की शुभ सूचना हो।