ٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِهِۦ هُم بِهِۦ يُؤۡمِنُونَ ٥٢
जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब15 दी थी, वे16 इसपर ईमान लाते हैं।
फ़ुटनोट
15 अर्थात तौरात तथा इंजील।
16 अर्थात उनमें से जिन्होंने अपनी मूल पुस्तक में परिवर्तन नहीं किया है।
तफ़सीर
जो लोग क़ुरआन के अवतरण से पहले तौरात पर ईमान रखने में दृढ़ थे, वे क़ुरआन पर ईमान लाते हैं। क्योंकि वे अपनी किताबों में इसकी सूचना और वर्णन पाते हैं।